गुजरात के वडोदरा शहर की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की है। भाजपा उम्मीदवार सतीश पटेल, जिन्हें सतेंद्र पटेल के नाम से भी जाना जाता है, ने कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी को 30,499 वोटों के बड़े अंतर से हराया। इस जीत के साथ भाजपा ने मांजलपुर विधानसभा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है।
मांजलपुर सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्ष 2012 से इस विधानसभा क्षेत्र पर भाजपा का कब्जा रहा है। उपचुनाव में भी पार्टी उम्मीदवार ने मतगणना की शुरुआत से बढ़त बनाए रखी और अंतिम परिणाम में बड़े अंतर से जीत हासिल की।
योगेश पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी सीट
मांजलपुर विधानसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ विधायक और गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री योगेश पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी। आठ बार विधायक रहे योगेश पटेल का जून 2026 में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनके निधन के कारण इस सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा।
चुनाव आयोग ने मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई 2026 को मतदान और 3 अगस्त 2026 को मतगणना की तारीख निर्धारित की थी। नामांकन प्रक्रिया 6 जुलाई को अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू हुई थी।
मतगणना की शुरुआत से आगे रहे सतीश पटेल
मतगणना की शुरुआत से ही भाजपा उम्मीदवार सतीश पटेल ने कांग्रेस के भीखाभाई रबारी पर बढ़त बना ली थी। शुरुआती दौर में भाजपा उम्मीदवार की बढ़त लगभग 1,600 वोटों की थी, जो बाद के राउंड में लगातार बढ़ती चली गई।
चार राउंड की मतगणना पूरी होने तक सतीश पटेल को 12,941 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी को 4,568 वोट प्राप्त हुए थे। उस समय भाजपा उम्मीदवार की बढ़त 8,373 वोटों तक पहुंच गई थी।
मतगणना के आगे बढ़ने के साथ भाजपा की बढ़त मजबूत होती गई। कांग्रेस उम्मीदवार किसी भी चरण में भाजपा की बढ़त को चुनौती नहीं दे सके। अंतिम परिणाम में सतीश पटेल ने 30,499 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
कांग्रेस के भीखाभाई रबारी को करारी हार
मांजलपुर उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री भीखाभाई रबारी को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन वह भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल नहीं हो सके।
भाजपा उम्मीदवार की बड़े अंतर से जीत को पार्टी के मजबूत संगठन, बूथ प्रबंधन और मांजलपुर क्षेत्र में उसके पारंपरिक प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, कांग्रेस के लिए यह परिणाम बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
मांजलपुर में केवल 37.50 प्रतिशत मतदान
मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ था। इस चुनाव में कुल 37.50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
उपचुनाव में मतदान का प्रतिशत वर्ष 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव की तुलना में काफी कम रहा। वर्ष 2022 में मांजलपुर विधानसभा सीट पर लगभग 60.15 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस तरह उपचुनाव में मतदान करीब 22.65 प्रतिशत अंक कम दर्ज किया गया।
कम मतदान के बावजूद भाजपा अपने समर्थकों को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने में सफल रही। चुनाव परिणाम से यह भी संकेत मिलता है कि कम मतदान का भाजपा के चुनावी प्रदर्शन पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ा।
मांजलपुर में 2.19 लाख से अधिक मतदाता
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, मांजलपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,19,494 मतदाता मतदान करने के पात्र थे। इनमें सामान्य मतदाताओं के साथ दिव्यांग, बुजुर्ग और शतायु मतदाता भी शामिल थे।
मतदाता सूची में 1,634 दिव्यांग मतदाता, 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के 1,406 मतदाता और 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के 12 मतदाता शामिल थे।
चुनाव आयोग ने वरिष्ठ नागरिकों और पात्र दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से मतदान करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई थी। मतदान के दिन से पहले कुल 107 मतदाताओं ने होम वोटिंग सुविधा के माध्यम से अपना मत डाला। इनमें 90 वरिष्ठ नागरिक शामिल थे।
भाजपा ने मांजलपुर में कायम रखा अपना दबदबा
मांजलपुर विधानसभा सीट वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर वर्ष 2012 से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। योगेश पटेल ने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र से जीत दर्ज की थी।
योगेश पटेल के निधन के बाद भाजपा के सामने अपनी परंपरागत सीट को बचाए रखने की चुनौती थी। पार्टी ने सतीश पटेल को उम्मीदवार बनाकर स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं के सहारे चुनाव लड़ा। बड़े अंतर से मिली जीत ने क्षेत्र में भाजपा की मजबूत पकड़ को एक बार फिर साबित किया है।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने मनाया जीत का जश्न
सतीश पटेल की बढ़त लगातार बढ़ने के बाद मतगणना केंद्र के बाहर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता जुटने लगे थे। अंतिम परिणाम घोषित होते ही कार्यकर्ताओं ने फटाके फोड़कर, मिठाइयां बांटकर और नारे लगाकर जीत का जश्न मनाया।
वडोदरा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने विजय जुलूस निकाले। पार्टी समर्थकों ने सतीश पटेल का स्वागत किया और मांजलपुर सीट पर दोबारा जीत मिलने को भाजपा की नीतियों तथा संगठन की सफलता बताया।
गुजरात की राजनीति में जीत के मायने
मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव की जीत भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी ने न केवल अपनी परंपरागत सीट सुरक्षित रखी, बल्कि बड़े मतांतर से जीत दर्ज कर विपक्ष को भी मजबूत संदेश दिया है।
यह परिणाम वडोदरा शहर में भाजपा के संगठनात्मक प्रभाव को दर्शाता है। वहीं, कांग्रेस के सामने शहरी विधानसभा क्षेत्रों में अपनी रणनीति और संगठन को मजबूत करने की चुनौती और बढ़ गई है।
हालांकि उपचुनाव में मतदान प्रतिशत काफी कम रहा, लेकिन भाजपा उम्मीदवार की 30 हजार से अधिक वोटों की जीत बताती है कि पार्टी ने अपने समर्थक मतदाताओं को प्रभावी तरीके से संगठित किया।
सतीश पटेल के सामने विकास की जिम्मेदारी
मांजलपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल करने के बाद सतीश पटेल के सामने क्षेत्र में लंबित विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। सड़क, यातायात, जल निकासी, पेयजल, स्वच्छता और शहरी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे क्षेत्र के मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इसके साथ ही उन्हें पूर्व विधायक योगेश पटेल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने और क्षेत्र के मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती का भी सामना करना होगा।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel