झारखंड में JPSC-JSSC-CGL परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग स्वीकार करते हुए JSSC-CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी सभी परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। सरकार के इस फैसले के बाद पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की घोषणा के बाद रांची सदर अस्पताल में भर्ती छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहां भी उन्होंने अनशन जारी रखा था।
जयराम महतो ने देवेंद्र नाथ महतो को खिलाकर तुड़वाया अनशन
सरकार के फैसले के बाद देर रात झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और विधायक जयराम महतो रांची सदर अस्पताल पहुंचे।
यहां जयराम महतो ने देवेंद्र नाथ महतो को अपने हाथों से खाना खिलाया, जबकि दीपिका पांडेय सिंह ने उन्हें जूस पिलाया। इसके बाद देवेंद्र नाथ महतो ने औपचारिक रूप से अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार द्वारा छात्रों की मांगें माने जाने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का धन्यवाद किया। हालांकि उन्होंने साफ किया कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक रोकने और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
#WATCH रांची, झारखंड: मुख्यमंत्री द्वारा JSSC-CGL परीक्षा और TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सदर अस्पताल में झारखंड के मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी की मौजूदगी में अपना भूख हड़ताल खत्म किया। pic.twitter.com/3UNFkpGBAb
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 17, 2026
24 दिनों से जारी था छात्र आंदोलन
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं के विरोध में छात्र पिछले 24 दिनों से आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान JPSC और JSSC परीक्षाओं की निष्पक्षता, कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
देवेंद्र नाथ महतो के मुताबिक आंदोलन की शुरुआत 2 जुलाई को हुई थी। इसके बाद 20 जुलाई को मुख्यमंत्री के साथ बैठक हुई और 28 जुलाई को मामले में CID जांच शुरू की गई।
आंदोलन के दौरान कई छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उन्होंने अस्पताल में भी अनशन जारी रखा।
‘आज झारखंड के लिए बड़ी जीत’
भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यह फैसला झारखंड के छात्रों के लिए बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द करना सरकार के लिए आसान फैसला नहीं था, क्योंकि JSSC CGL भर्ती प्रक्रिया जॉइनिंग के चरण तक पहुंच चुकी थी और कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी हो चुकी थी।
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि सरकार ने गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए छात्रों की मांग पर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधायक जयराम महतो, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी समेत आंदोलन में सहयोग करने वाले लोगों का आभार जताया।
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल आंदोलन रोका जा रहा है, लेकिन झारखंड में ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाने की मांग जारी रहेगी जिसमें पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं की कोई गुंजाइश न हो।
पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून की मांग
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने राज्य सरकार से भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की निगरानी मजबूत करने की मांग की है। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ-साथ पेपर लीक और संगठित परीक्षा माफिया पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून और ठोस प्रशासनिक सुधार की जरूरत बताई।
छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। भविष्य में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, एजेंसियों की जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना जरूरी है।
देवेंद्र महतो, उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति का अनशन खत्म
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अनुसार छात्र नेता देवेंद्र महतो, उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति ने स्वेच्छा से अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है।
तीनों आंदोलनकारियों की मेडिकल जांच भी कराई गई। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक उनका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सामान्य पाया गया और स्वास्थ्य स्थिति संतोषजनक होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इरफान अंसारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के फैसले को छात्रों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है।
JSSC CGL परीक्षा रद्द होने के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर बढ़ी चिंता
सरकार के इस फैसले का दूसरा पहलू उन अभ्यर्थियों से भी जुड़ा है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण तक पहुंच चुकी थी या जिन्होंने नियुक्ति हासिल कर नौकरी ज्वाइन कर ली थी। ऐसे उम्मीदवारों के बीच अब अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि पहले से चयनित और नियुक्त उम्मीदवारों के संबंध में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
झारखंड सरकार के फैसले ने एक तरफ आंदोलनरत छात्रों को बड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ राज्य की भर्ती और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की बहस को और तेज कर दिया है।
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