जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित समुदाय को एक बार फिर धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट/काउंसिल (ULC) के नाम से एक कथित धमकी भरी चिट्ठी वायरल हो रही है। इसमें कुछ कश्मीरी पंडितों के नाम और पते जैसी निजी जानकारियां होने की बात कही जा रही है। करीब 15 दिनों के भीतर इस तरह की यह दूसरी कथित धमकी सामने आने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
23 अगस्त 2026 की तारीख वाली इस कथित चिट्ठी में विस्थापित कश्मीरी पंडितों को चेतावनी देते हुए दावा किया गया है कि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, वायरल पत्र की प्रामाणिकता को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं।
‘हम आपकी हर हरकत पर नजर रख रहे हैं’
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कथित चिट्ठी में विस्थापित कश्मीरी पंडितों को लेकर आपत्तिजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इसमें उन पर दिल्ली के राजनीतिक हितों के लिए काम करने और जम्मू-कश्मीर में RSS से जुड़े कथित एजेंडे को आगे बढ़ाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
पत्र में धमकी देते हुए कहा गया है कि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इस तरह की भाषा और निजी जानकारियों के कथित खुलासे ने उन परिवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका उल्लेख पत्र में बताया जा रहा है।
23 अगस्त की कथित चिट्ठी में क्या कहा गया?
वायरल पत्र में दावा किया गया है कि संगठन ने कश्मीरी पंडितों को पहले भी चेतावनी दी थी। इसमें घाटी से विस्थापित हुए पंडितों को निशाना बनाते हुए उनके खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।
साथ ही धमकी दी गई है कि वे कहीं भी रहें या जाएं, उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इस तरह की धमकियों को कश्मीरी पंडित समुदाय में भय पैदा करने और पुनर्वास की कोशिशों को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
7 अगस्त को भी सामने आया था धमकी का मामला
इससे पहले 7 अगस्त 2026 को भी ULC के नाम से एक कथित धमकी भरी चिट्ठी सामने आई थी। उस पत्र में छह कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर दिए जाने की बात सामने आई थी। इनमें से कई कर्मचारी कथित तौर पर प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कार्यरत थे।
उस पत्र में कर्मचारियों के परिवारों, कार्यस्थलों और ठिकानों के बारे में जानकारी होने का दावा किया गया था। अब लगभग 15 दिन बाद दूसरी कथित चिट्ठी सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है।
ULC और लश्कर-ए-तैयबा कनेक्शन का दावा
ULC को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के स्तर पर इसके आतंकी नेटवर्क से कथित संबंधों की जांच होती रही है। रिपोर्ट्स में इसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा मुखौटा संगठन बताया गया है।
हालांकि, मौजूदा वायरल पत्र किसने तैयार किया, इसे कहां से पोस्ट किया गया और इसके पीछे वास्तव में कौन लोग हैं, इसे लेकर आधिकारिक जांच पूरी होने का इंतजार है।
कश्मीरी पंडित संगठनों ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग की
कश्मीरी पंडितों से जुड़े संगठनों ने इन धमकियों को गंभीर सुरक्षा चिंता बताया है। पनुन कश्मीर समेत संगठनों की ओर से मामले की गहन जांच करने, कथित पत्र में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं उनका खतरे का आकलन करने और उनके लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने भी कथित धमकी भरी चिट्ठियों की जांच की मांग की है। मामले ने एक बार फिर घाटी में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा, वापसी और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।
संदिग्ध सोशल मीडिया चैनलों पर कार्रवाई
सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे इन संदेशों की जांच कर रही हैं। कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया चैनलों को ब्लॉक किए जाने की भी बात सामने आई है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि धमकी भरे पत्र कहां से जारी किए गए और इन्हें ऑनलाइन फैलाने के पीछे कौन लोग हैं।
फिलहाल दोनों कथित पत्रों की प्रामाणिकता की जांच महत्वपूर्ण है। ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल दावों और निजी जानकारियों को बिना पुष्टि आगे साझा करने से बचना भी जरूरी है।
कश्मीरी पंडितों की वापसी के बीच बढ़ी सुरक्षा चिंता
ताजा धमकी ऐसे समय सामने आई है जब कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी और पुनर्वास को लेकर सरकारी स्तर पर प्रयास जारी हैं। लगातार सामने आ रहे धमकी के दावों ने सुरक्षा व्यवस्था और समुदाय के विश्वास को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।
अब सुरक्षा एजेंसियों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल पत्र की वास्तविकता क्या है और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क सक्रिय है।
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