Skip to content
Thursday, October 29, 2026 Ahmedabad 26°C

ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को दी मंजूरी, PM मोदी बोले- किसी सदस्य ने नहीं जताई आपत्ति

ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को दी मंजूरी, PM मोदी बोले- किसी सदस्य ने नहीं जताई आपत्ति

18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान इसकी घोषणा की। साझा दस्तावेज पर सहमति को भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया के संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक व्यापार विवादों को लेकर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग रणनीतिक हित मौजूद हैं।

पीएम मोदी ने सम्मेलन में बताया कि घोषणापत्र पर किसी भी सदस्य देश ने आपत्ति नहीं जताई और इसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। दस्तावेज में अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, बहुपक्षवाद, नियम-आधारित वैश्विक व्यापार और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे प्रमुख मुद्दों पर BRICS देशों का साझा रुख सामने आया है।

संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति से

नई दिल्ली घोषणापत्र में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों को रोकने के प्रयासों पर जोर दिया गया है। सदस्य देशों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत, परामर्श और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।

घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और नागरिक आबादी की सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए BRICS देशों ने ऐसी कार्रवाइयों से बचने पर जोर दिया जो संघर्ष को और बढ़ा सकती हैं।

अलग-अलग राष्ट्रीय दृष्टिकोणों के सम्मान पर जोर

BRICS के साझा दस्तावेज में ऐसे बहुपक्षीय वैश्विक ढांचे की वकालत की गई है जिसमें बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अलग-अलग देशों के राष्ट्रीय दृष्टिकोणों और प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाए।

इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान किसी एक शक्ति केंद्र या एकतरफा फैसलों के बजाय व्यापक संवाद और सहमति के जरिए होना चाहिए।

यह रुख भारत की उस नीति से भी मेल खाता है जिसमें वह BRICS को विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए अधिक प्रभावी मंच बनाने तथा Global South की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में मजबूत करने की बात करता रहा है।

एकतरफा टैरिफ पर BRICS की गंभीर चिंता

नई दिल्ली घोषणापत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वैश्विक व्यापार से जुड़ा है। सदस्य देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों में बढ़ोतरी पर गंभीर चिंता जताई है।

BRICS देशों का कहना है कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बाधित कर सकते हैं और विश्व व्यापार संगठन यानी WTO के नियमों और सिद्धांतों के खिलाफ जा सकते हैं। समूह ने निष्पक्ष, खुली और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।

यह मुद्दा मौजूदा वैश्विक व्यापारिक तनाव के बीच खास महत्व रखता है। BRICS के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने भी सम्मेलन से पहले एकतरफा व्यापार और वित्तीय प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई थी।

new-delhi-declaration-2026

देर रात तक चली बातचीत के बाद बनी सहमति

नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति आसान नहीं थी। सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के बीच लंबे समय तक बातचीत चली और पश्चिम एशिया के संघर्ष समेत कई संवेदनशील मुद्दों पर अलग-अलग रुख सामने आए।

Reuters के मुताबिक भारत की मेजबानी में चली गहन बातचीत का मुख्य फोकस ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मौजूद मतभेदों को पाटना था। दोनों देश BRICS के सदस्य हैं, लेकिन मौजूदा खाड़ी संकट को लेकर उनकी रणनीतिक स्थितियां अलग-अलग हैं। इसके बावजूद सदस्य देशों ने ऐसा साझा शब्दांकन तैयार किया जिस पर सभी सहमत हो सके।

भारत के लिए क्यों बड़ी कूटनीतिक सफलता?

BRICS का विस्तार होने के बाद समूह के भीतर सदस्य देशों की राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा प्राथमिकताओं में विविधता काफी बढ़ गई है। भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और इंडोनेशिया भी इसके सदस्य हैं।

ऐसे समूह में संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सर्वसम्मति बनाना पहले के मुकाबले अधिक कठिन हो गया है। खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है और ऊर्जा, समुद्री व्यापार तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर उसका असर पड़ रहा है।

इस पृष्ठभूमि में नई दिल्ली घोषणापत्र पर सर्वसम्मति भारत की सहमति-निर्माण क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ईरान और UAE के मतभेदों के बीच निकला साझा रास्ता

साझा घोषणापत्र की सबसे कठिन कूटनीतिक चुनौती पश्चिम एशिया से जुड़ी भाषा को लेकर थी। ईरान और UAE दोनों BRICS के सदस्य हैं और खाड़ी क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों पर दोनों के हित समान नहीं हैं।

Reuters के मुताबिक इसी वजह से अंतिम दस्तावेज में किसी विशेष देश का नाम लिए बिना व्यापक सिद्धांतों और एकतरफा सैन्य कार्रवाई के विरोध पर जोर देने वाला संतुलित शब्दांकन तैयार किया गया।

इस तरह सदस्य देशों ने अपनी अलग-अलग राष्ट्रीय नीतियां बनाए रखते हुए भी BRICS के लिए एक साझा स्थिति तय करने की कोशिश की।

सऊदी अरब की स्थिति क्या है?

BRICS के संदर्भ में सऊदी अरब का नाम अक्सर लिया जाता है, लेकिन उसकी स्थिति अन्य मौजूदा सदस्यों से अलग है। सऊदी अरब को समूह में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था, लेकिन उसने अब तक औपचारिक रूप से सदस्यता स्वीकार नहीं की है। मौजूदा BRICS सदस्यों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और इंडोनेशिया शामिल हैं।

इसलिए नई दिल्ली घोषणापत्र पर औपचारिक सर्वसम्मति इन्हीं सदस्य देशों के बीच बनी है।

वैश्विक व्यापार की निर्बाध आवाजाही पर फोकस

घोषणापत्र में मौजूदा भू-राजनीतिक संकटों के बावजूद वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुचारु बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक परिवहन पर दबाव बढ़ा है। इसी कारण BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार की निर्बाध आवाजाही को आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

भारत भी समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा को लगातार उठा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ बैठक में Freedom of Navigation और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया था।

ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार की मांग

नई दिल्ली सम्मेलन में BRICS देशों ने केवल युद्ध और व्यापार पर ही नहीं, बल्कि मौजूदा वैश्विक संस्थागत ढांचे में सुधार पर भी जोर दिया।

समूह लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, IMF, World Bank और WTO जैसी संस्थाओं में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के अधिक प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है। इस बार भी BRICS नेताओं ने Global South की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन सत्र में भी वैश्विक शासन व्यवस्था में Representation, Responsiveness और Rule-making को सुधार का आधार बनाने का प्रस्ताव रखा था।

BRICS की एकता की परीक्षा में सफल रहा घोषणापत्र

BRICS का आकार बढ़ने के साथ उसकी राजनीतिक विविधता भी बढ़ी है। रूस और चीन समूह को पश्चिमी प्रभुत्व वाले वैश्विक ढांचे के विकल्प के रूप में अधिक सक्रिय देखना चाहते हैं, जबकि भारत और ब्राजील आर्थिक सहयोग और Global South की आवाज पर अधिक जोर देते रहे हैं।

ऐसे में एक साझा घोषणापत्र पर सर्वसम्मति यह संकेत देती है कि सदस्य देश गहरे मतभेदों के बावजूद आर्थिक सहयोग, बहुपक्षवाद और वैश्विक शासन सुधार जैसे मुद्दों पर न्यूनतम साझा आधार बनाने में सक्षम हैं।

नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 इसलिए केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि विस्तारित BRICS की एकजुटता और उसकी भविष्य की दिशा की महत्वपूर्ण परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।

 

हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे

Like, Share and Subscribe our YouTube channel

🔗 https://www.youtube.com/@oneindianewscom-Gujarat

🔗 https://www.youtube.com/@oneindianewscom

Filed under India World

Share this story

Latest News

Other States

News from every corner of India.