उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का दायरा तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया है। शिक्षक, प्रांतीय रक्षक दल यानी PRD के जवान, पीएम पोषण योजना से जुड़े रसोइये और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं जैसे बड़े वर्गों को अब परिवार सहित सालाना ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने पर जोर दिया जा रहा है। राजनीतिक रूप से भी इन फैसलों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनका लाभ लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों तक पहुंचेगा।
भाजपा आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल करने की कोशिश कर रही है। हाल के महीनों में योगी सरकार ने अलग-अलग कर्मचारी और सेवा समूहों के लिए स्वास्थ्य कवर के साथ मानदेय और अन्य लाभों की घोषणाएं की हैं। इससे सरकार की कोशिश उन वर्गों तक सीधा लाभ पहुंचाने की दिखती है, जो शिक्षा, पोषण, ग्रामीण सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास जैसी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं।
शिक्षकों के लिए ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज
उत्तर प्रदेश में जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना का दायरा उच्च शिक्षा क्षेत्र तक बढ़ाया गया। इसके तहत विश्वविद्यालयों, सहायता प्राप्त गैर-सरकारी महाविद्यालयों, सेल्फ-फाइनेंस्ड पाठ्यक्रमों और स्ववित्तपोषित कॉलेजों से जुड़े 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया।
योजना के तहत पात्र लाभार्थी सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज करा सकते हैं। इसमें अस्पताल में भर्ती होने, उपचार और संबंधित चिकित्सकीय खर्चों को निर्धारित नियमों के तहत कवर किया जाता है। उच्च शिक्षा से जुड़े इस कार्यक्रम में 1,900 से ज्यादा उपचार पैकेज शामिल किए गए हैं, जिनमें कैंसर, हृदय रोग और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों जैसे उपचार भी शामिल हैं।
बेसिक शिक्षा क्षेत्र के शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के कार्मिकों और अन्य श्रेणियों के लिए भी सरकार पहले ही कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी दे चुकी है। जनवरी 2026 में राज्य मंत्रिमंडल ने इस दायरे में करीब 11.95 लाख शिक्षकों और अन्य कार्मिकों को लाभ देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी।
PRD जवानों और परिवारों को भी ₹5 लाख का हेल्थ कवर
योगी सरकार ने प्रांतीय रक्षक दल यानी PRD के 31,000 से अधिक वॉलंटियर्स को भी कैशलेस मेडिकल सुविधा देने की घोषणा की है। इसके तहत PRD जवान और उनके परिवार सरकारी तथा सरकार से सूचीबद्ध अस्पतालों में हर वर्ष ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज करा सकेंगे। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से परिवारों को मिलाकर करीब 1.55 लाख लोगों को फायदा पहुंचेगा।
PRD जवान पुलिस और प्रशासन के साथ यातायात नियंत्रण, चुनाव ड्यूटी, आपदा प्रबंधन तथा बड़े आयोजनों में सहायता करते हैं। स्वास्थ्य कवर के अलावा सरकार ने PRD वॉलंटियर्स का दैनिक भत्ता ₹500 से बढ़ाकर ₹600 करने की घोषणा भी की है।
3.54 लाख रसोइयों के लिए स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा
पीएम पोषण योजना के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले रसोइयों के लिए भी सरकार ने बड़े बदलाव किए हैं। प्रदेश के करीब 3.54 लाख रसोइयों के लिए सालाना ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा शुरू की गई है। इसके साथ उनका मासिक मानदेय ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000 किया गया है।
रसोइयों को ₹2 लाख तक दुर्घटना बीमा की सुविधा देने के लिए भी व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि स्कूल पोषण व्यवस्था में काम करने वाले इस बड़े वर्ग को स्वास्थ्य सुरक्षा और बेहतर मानदेय देकर सामाजिक सुरक्षा मजबूत की जा रही है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹12 हजार
योगी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी बड़ा ऐलान किया है। राज्य की लगभग 2.91 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मानदेय वृद्धि और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ दिया जा रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय ₹8,000 से बढ़ाकर ₹12,000 कर दिया गया है, जबकि सहायिकाओं का मानदेय ₹4,000 से बढ़ाकर ₹6,000 किया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है।
इसके साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के परिवारों को भी सालाना ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त साड़ी और केंद्रों को स्मार्टफोन से लैस करने जैसे उपाय भी घोषित किए गए हैं।
चुनाव से पहले बड़े लाभार्थी वर्ग पर फोकस
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए इन घोषणाओं के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, रसोइये और PRD जवान ऐसा बड़ा नेटवर्क हैं, जिसकी मौजूदगी राज्य के लगभग हर जिले, ब्लॉक और गांव तक है।
इन कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने से सरकार सीधे लाखों परिवारों तक पहुंच बना रही है। इसी वजह से विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इन घोषणाओं को केवल सामाजिक कल्याण कार्यक्रम नहीं बल्कि 2027 चुनाव से पहले भाजपा की व्यापक राजनीतिक रणनीति के हिस्से के तौर पर भी देख रहे हैं।
हालांकि सरकार इन फैसलों को कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की नीति के तौर पर पेश कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलग-अलग कार्यक्रमों में यह कहते रहे हैं कि शिक्षा, पोषण और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े जमीनी कर्मचारियों को सम्मान और सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिकता है।
स्वास्थ्य को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी?
योगी सरकार की हालिया घोषणाओं को देखें तो स्वास्थ्य सुविधाओं को केवल आम मरीजों तक सीमित रखने के बजाय अब सरकारी और अर्ध-सरकारी सेवाओं से जुड़े बड़े कर्मचारी समूहों तक विस्तार किया जा रहा है।
₹5 लाख तक कैशलेस इलाज जैसे लाभ का सीधा असर परिवार के मेडिकल खर्च पर पड़ सकता है। गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज का भारी खर्च कर्मचारियों के लिए बड़ी समस्या बनता है। ऐसे में स्वास्थ्य कवर को वेतन या मानदेय बढ़ोतरी के साथ जोड़ना सरकार की सामाजिक सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।
वहीं समाजवादी पार्टी पहले ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठा रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की आलोचना करते हुए गरीबों के इलाज को लेकर अपनी पार्टी की योजनाओं का भी जिक्र किया था। इससे संकेत मिलता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और विपक्ष के बीच प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो सकती है।
योगी सरकार का बड़ा सोशल सिक्योरिटी दांव
एक के बाद एक कर्मचारी वर्ग को कैशलेस चिकित्सा सुविधा में शामिल किए जाने से साफ है कि उत्तर प्रदेश सरकार आने वाले महीनों में स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर अपना फोकस और बढ़ा सकती है।
शिक्षकों से लेकर रसोइयों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक इन योजनाओं का लाभ लाखों परिवारों को मिलेगा। अब राजनीतिक नजर इस बात पर रहेगी कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा इन कल्याणकारी योजनाओं को जनता के बीच किस तरह पेश करती है और विपक्ष इसके जवाब में स्वास्थ्य एवं कर्मचारियों से जुड़े कौन से मुद्दे उठाता है।
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