असम के डिब्रूगढ़ से ब्रह्मपुत्र नदी के रास्ते अंतरराष्ट्रीय कार्गो परिवहन का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार डिब्रूगढ़ से नदी मार्ग के जरिए माल का अंतरराष्ट्रीय निर्यात किया जा रहा है। इसकी शुरुआत असम में तैयार 1,080 टन मेथेनॉल की खेप बांग्लादेश भेजकर की जा रही है।
डिब्रूगढ़ के बोगीबील टर्मिनल से दो कंटेनर जहाज बांग्लादेश के लिए रवाना किए जा रहे हैं। इस पहल को पूर्वोत्तर भारत की जलमार्ग कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके सफल होने से ऊपरी असम के औद्योगिक और कृषि उत्पादों के लिए बांग्लादेश समेत आसपास के अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने का नया रास्ता खुल सकता है।
दो जहाजों से बांग्लादेश जाएगा 1,080 टन मेथेनॉल
बांग्लादेश भेजी जा रही मेथेनॉल की खेप का उत्पादन असम की सरकारी कंपनी Assam Petro-Chemicals Limited (APL) ने किया है।
दोनों जहाजों पर 27-27 कंटेनर लोड किए गए हैं। प्रत्येक कंटेनर में करीब 20 टन मेथेनॉल है। इस तरह एक जहाज पर करीब 540 टन और दोनों जहाजों पर कुल 1,080 टन मेथेनॉल लोड किया गया है।
यह कार्गो ब्रह्मपुत्र नदी के रास्ते बांग्लादेश की ओर जाएगा। मेथेनॉल की इस खेप को आखिरकार बांग्लादेश की राजधानी ढाका तक पहुंचाने की योजना बताई गई है।
Dibrugarh, Assam: A cargo vessel is set to sail from Dibrugarh to Dhaka, Bangladesh, for the first time since Independence. Two vessels will transport Assam Petro-Chemicals Limited’s methanol through the Brahmaputra via the Bogibeel Inland Water Transport Terminal. Each vessel… pic.twitter.com/nW0SwfhdMu
— IANS (@ians_india) September 27, 2026
80 साल बाद डिब्रूगढ़ से नदी मार्ग के जरिए निर्यात
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, Assam Petro-Chemicals Limited के चेयरमैन बिकुल डेका ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि करीब 80 वर्षों के बाद डिब्रूगढ़ से नदी के रास्ते निर्यात फिर शुरू हो रहा है।
उनके मुताबिक, आजादी के बाद डिब्रूगढ़ से ब्रह्मपुत्र नदी के जरिए अंतरराष्ट्रीय निर्यात का यह पहला मामला है। ब्रिटिश शासन के दौरान यह क्षेत्र नदी आधारित व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था, लेकिन बाद के दशकों में यह व्यवस्था लगभग खत्म हो गई थी।
अब बोगीबील टर्मिनल से अंतरराष्ट्रीय कार्गो की शुरुआत को उस पुराने व्यापारिक मार्ग के पुनर्जीवन के तौर पर भी देखा जा रहा है।
ब्रह्मपुत्र में 783 किलोमीटर का सफर करेंगे जहाज
डिब्रूगढ़ के बोगीबील टर्मिनल से रवाना होने के बाद दोनों कंटेनर जहाज ब्रह्मपुत्र नदी में करीब 783 किलोमीटर की यात्रा करेंगे।
एजेंसियों के मुताबिक, बांग्लादेश सीमा तक पहुंचने में इन जहाजों को करीब सात दिन लगने का अनुमान है। दोनों जहाज लगभग 30 साल पुराने बताए जा रहे हैं।
बांग्लादेश की सीमा तक पहुंचने के बाद आगे की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के जरिए मेथेनॉल को ढाका तक पहुंचाने की योजना है।
बोगीबील टर्मिनल को अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जोड़ने की तैयारी
इस कार्गो सेवा के साथ डिब्रूगढ़ स्थित बोगीबील टर्मिनल को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
Inland Waterways Authority of India (IWAI) के बोगीबील पोर्ट के ऑफिस इंचार्ज पूजन कुमार के मुताबिक, बंदरगाह पूरी तरह परिचालन में आने के बाद असम से कई प्रकार के उत्पाद नदी के रास्ते आसपास के अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजे जा सकेंगे।
बोगीबील में इसके लिए जरूरी आधारभूत ढांचा भी विकसित किया जा रहा है। यहां कस्टम ऑफिस, जेट्टी और वेयरहाउस तैयार किए गए हैं। इसके अलावा लाइटहाउस और रीजनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण भी प्रगति पर बताया गया है।
पेट्रोलियम से चाय तक, इन उत्पादों का हो सकेगा निर्यात
ब्रह्मपुत्र के जरिए अंतरराष्ट्रीय कार्गो सेवा नियमित होने से असम के कई प्रमुख उद्योगों को फायदा मिलने की संभावना है।
अधिकारियों के मुताबिक, भविष्य में Brahmaputra Cracker and Polymer Limited (BCPL) से जुड़े उत्पाद, पॉलिमर, पेट्रोलियम प्रोडक्ट, कोयला और चाय उद्योग से संबंधित सामान नदी के रास्ते भेजे जा सकते हैं।
असम देश के प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में जलमार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच मिलने पर लॉजिस्टिक्स के नए विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
काजी निंबू और भूत झोलकिया के लिए भी खुलेगा बाजार
औद्योगिक उत्पादों के अलावा ऊपरी असम के कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए भी बोगीबील टर्मिनल महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
डिब्रूगढ़ और आसपास के इलाकों से काजी निंबू, भूत झोलकिया और काली मिर्च जैसे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजे जा सकते हैं। इससे स्थानीय किसानों, व्यापारियों और कृषि आधारित उद्योगों के लिए नए बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है।
विशेष रूप से भूत झोलकिया और काजी निंबू जैसे पूर्वोत्तर भारत से जुड़े विशिष्ट कृषि उत्पादों के लिए बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी बाजारों तक जलमार्ग कनेक्टिविटी व्यापार की नई संभावनाएं पैदा कर सकती है।
अंग्रेजों के दौर में बड़ा व्यापारिक केंद्र था डिब्रूगढ़
डिब्रूगढ़ और ब्रह्मपुत्र नदी का व्यापारिक संबंध काफी पुराना है। ब्रिटिश शासन के दौरान असम का यह इलाका एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र हुआ करता था।
उस समय ब्रह्मपुत्र नदी के माध्यम से चाय और अन्य वस्तुओं को भारत के दूसरे हिस्सों के साथ विदेशी बाजारों तक भी पहुंचाया जाता था। डिब्रूगढ़ उस दौर में सरकारी राजस्व के महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता था।
रेल और सड़क नेटवर्क के विस्तार के बाद नदी आधारित व्यापार का महत्व धीरे-धीरे कम होता चला गया। अब करीब आठ दशक बाद अंतरराष्ट्रीय कार्गो शुरू होने से इस ऐतिहासिक व्यापार मार्ग को फिर से सक्रिय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर भारत के व्यापार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति के कारण माल परिवहन लंबे समय से बड़ी चुनौती रहा है। सड़क और रेल मार्ग से देश के बाकी हिस्सों तथा बंदरगाहों तक सामान पहुंचाने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
ऐसे में ब्रह्मपुत्र जैसे प्राकृतिक जलमार्ग का इस्तेमाल बढ़ने से उद्योगों और व्यापारियों को एक अतिरिक्त लॉजिस्टिक्स विकल्प मिल सकता है। बांग्लादेश के जलमार्गों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी पूर्वोत्तर भारत को पड़ोसी देशों और समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डिब्रूगढ़ से 1,080 टन मेथेनॉल की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप इसी दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है। इसके सफल संचालन के बाद बोगीबील टर्मिनल से नियमित अंतरराष्ट्रीय कार्गो सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
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