दिवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल और उससे होने वाले प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने संकेत दिया कि वह पटाखों के मामले में पूर्ण प्रतिबंध और बिना रोक-टोक इस्तेमाल के बीच एक संतुलित रास्ता तलाशना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि पूरे देश में पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से कुछ लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन दूसरी तरफ 24 घंटे पटाखे जलाने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि पटाखे चलाने के लिए निश्चित समय निर्धारित करने के साथ यह भी तय किया जा सकता है कि किस प्रकार के पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति होगी। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर विचार किया। अदालत ने कहा कि देशभर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना उचित समाधान नहीं हो सकता और इससे लोगों की सांस्कृतिक एवं धार्मिक भावनाओं का सवाल भी जुड़ा है।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पटाखे चलाने की अनियंत्रित अनुमति नहीं दी जा सकती। लगातार और लंबे समय तक आतिशबाजी से बुजुर्गों, बच्चों, बीमार लोगों और अन्य संवेदनशील समूहों को परेशानी हो सकती है। इसी कारण अदालत ऐसा रास्ता तलाशना चाहती है जिसमें उत्सव मनाने की अनुमति के साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताओं का भी ध्यान रखा जाए।
पटाखे चलाने के लिए तय हो सकता है समय
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि दिवाली और अन्य अवसरों पर पटाखे चलाने के लिए निर्धारित समय सीमा तय की जा सकती है।
इसके अलावा सभी प्रकार के पटाखों को अनुमति मिलने के बजाय कुछ निर्धारित श्रेणियों के पटाखों के इस्तेमाल पर विचार किया जा सकता है। अंतिम नियम क्या होंगे, यह आगामी सुनवाई और अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
बेरियम और पटाखों के डेसिबल लेवल की होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बेरियम (Barium) और पटाखों से पैदा होने वाले शोर के स्तर यानी डेसिबल लेवल को लेकर संयुक्त परीक्षण करने को कहा है।
इन परीक्षणों से यह समझने में मदद मिलेगी कि विभिन्न प्रकार के पटाखों का पर्यावरण और स्वास्थ्य पर कितना प्रभाव पड़ता है। टेस्ट के नतीजे अदालत के सामने आने के बाद पटाखों की किन श्रेणियों को अनुमति दी जाए और किन पर प्रतिबंध जारी रखा जाए, इसे लेकर आगे विचार किया जा सकता है।
15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई
पटाखों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। CPCB और केंद्र सरकार से मांगी गई जानकारी इस सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। दिवाली से ठीक पहले होने वाली इस सुनवाई पर खास तौर पर दिल्ली-NCR के लोगों, पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों और पर्यावरण संगठनों की नजर रहेगी।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण बड़ी चिंता
दिवाली के आसपास पटाखों पर होने वाली बहस में दिल्ली-NCR का वायु प्रदूषण सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक रहता है। सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता अक्सर खराब स्तर तक पहुंच जाती है।
ऐसे समय में पटाखों से निकलने वाला धुआं और प्रदूषक तत्व हवा की गुणवत्ता पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। यही कारण है कि पटाखों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की मांग हर साल तेज हो जाती है। हालांकि, दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण के पीछे पटाखों के अलावा वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण गतिविधियां, धूल और मौसमी परिस्थितियों समेत कई कारक भी जिम्मेदार होते हैं।
Green Crackers को लेकर भी चर्चा
पिछले वर्षों में पारंपरिक पटाखों के विकल्प के रूप में Green Crackers को लेकर भी कई नियम बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य सामान्य पटाखों की तुलना में प्रदूषणकारी उत्सर्जन को कम करना है।
2025 में भी ग्रीन क्रैकर्स की सीमित बिक्री और इस्तेमाल से संबंधित व्यवस्था चर्चा में रही थी। अब सुप्रीम कोर्ट की नई सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस दिवाली किन पटाखों को अनुमति मिलेगी और उनके इस्तेमाल के लिए क्या समय निर्धारित किया जाएगा।
स्वास्थ्य, पर्यावरण और परंपरा के बीच संतुलन पर जोर
पटाखों का मामला केवल प्रदूषण तक सीमित नहीं है। इससे धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं, स्वास्थ्य, पर्यावरण और पटाखा उद्योग से जुड़े लोगों की आजीविका जैसे कई पहलू जुड़े हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि अदालत इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर संतुलित व्यवस्था बनाना चाहती है। एक तरफ लोगों को त्योहार मनाने का अवसर मिले और दूसरी तरफ पटाखों के अनियंत्रित इस्तेमाल से होने वाले प्रदूषण और शोर को नियंत्रित किया जा सके।
2024 में प्रतिबंध के बावजूद आतिशबाजी पर उठा था सवाल
दिल्ली में पटाखों के नियमों का पालन पहले भी सुप्रीम कोर्ट की चिंता का विषय रहा है। 2024 की दिवाली के दौरान प्रतिबंध के बावजूद कई इलाकों में आतिशबाजी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल उठाए थे।
अदालत ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगने के साथ पुलिस प्रशासन से भी प्रतिबंध लागू कराने के संबंध में जवाब तलब किया था।
अब 2026 की दिवाली से पहले एक बार फिर पटाखों को लेकर कानूनी और पर्यावरणीय बहस तेज हो गई है। 15 अक्टूबर की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस बार पटाखे चलाने के लिए क्या नियम और समय सीमा लागू होगी।
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