ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर देश में एक नई राजनीतिक और रणनीतिक बहस छिड़ गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयान के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया से लेकर विशेषज्ञों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि इस परियोजना के तहत लगभग 160 वर्ग किलोमीटर के घने वर्षावन को नष्ट किया जाएगा और लाखों पेड़ों की कटाई होगी। उन्होंने इसे “विकास के वेश में छिपा विनाश” करार देते हुए कहा कि यह देश की प्राकृतिक संपदा और आदिवासी विरासत के खिलाफ एक गंभीर अपराध है। उन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाने की भी बात कही।
राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार द्वीप के कैम्पबेल बे क्षेत्र में प्रस्तावित इस परियोजना को देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया। उनका कहना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय नुकसान को नजरअंदाज कर विकास के नाम पर परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
पूर्व वायु सेना प्रमुख का जवाब: “भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम”
राहुल गांधी के इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व वायु सेना प्रमुख राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने कहा कि इस परियोजना को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने इसे भारत के लिए “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” जैसा रणनीतिक महत्व वाला बताया। भदौरिया के अनुसार, यह परियोजना भारत की सैन्य और समुद्री क्षमता को मजबूत करेगी, खासकर तब जब वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा का महत्व बढ़ गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित बंदरगाह Strait of Malacca से करीब 150 किलोमीटर की दूरी पर होगा, जो चीन के लगभग 75% ऊर्जा व्यापार का प्रमुख मार्ग है। ऐसे में यह परियोजना भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बड़ी रणनीतिक बढ़त दिला सकती है।
सोशल मीडिया पर तीखी बहस
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस देखने को मिल रही है। यूट्यूबर ध्रुव राधी ने इस परियोजना को “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” बताने वाले दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कहना हास्यास्पद है। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सेवानिवृत्त मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ ने कड़ी आलोचना की और इसे गलत एवं भ्रामक बताया।
क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?
NITI Aayog द्वारा वर्ष 2021 में शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी परियोजना ₹72,000 करोड़ से अधिक की लागत वाली मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर पहल है। इसका उद्देश्य Andaman and Nicobar Islands के सबसे दक्षिणी हिस्से को एक वैश्विक व्यापारिक और रणनीतिक हब में बदलना है।
इस परियोजना के तहत:
- अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल
- नागरिक एवं सैन्य उपयोग के लिए हवाई अड्डा
- आधुनिक टाउनशिप
- 450 MVA क्षमता का गैस/सौर ऊर्जा संयंत्र
का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का स्थान हिंद महासागर में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और मलक्का जलडमरू मध्य जैसे वैश्विक समुद्री मार्गों के संदर्भ में यह भारत की सामरिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। इसके जरिए भारत न केवल अपनी रक्षा क्षमता बढ़ा सकता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
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