पुणे से एक चौंकाने वाला साइबर अपराध मामला सामने आया है, जहां म्यांमार के कुख्यात स्कैम सेंटर से छुड़ाकर भारत लाए गए तीन युवक खुद ऑनलाइन ठगी का बड़ा नेटवर्क चलाते पकड़े गए हैं।
म्यांमार के स्कैम कंपाउंड से शुरू हुई कहानी
जांच के अनुसार:
- तीनों आरोपियों की मुलाकात म्यांमार के केके पार्क साइबर स्कैम कंपाउंड में हुई
- उन्हें बैंकॉक में नौकरी के नाम पर फंसाकर म्यांमार ले जाया गया
- वहां उनसे जबरन साइबर फ्रॉड करवाया जाता था
इन स्कैम सेंटरों को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) पहले ही मानव तस्करी और ऑनलाइन अपराध का बड़ा अड्डा बता चुका है।
भारत लौटकर खुद शुरू किया ठगी नेटवर्क
जनवरी 2026 में रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भारत लौटे आरोपियों ने:
- फिर से आपस में संपर्क किया
- म्यांमार के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के साथ मिलकर
- खुद का साइबर फ्रॉड रैकेट खड़ा किया
2.1 करोड़ की ठगी से खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब:
- पिंपरी चिंचवड़ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज हुई
- एक कारोबारी परिवार से 2.1 करोड़ रुपए की ठगी की गई
- फर्जी शेयर ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश के नाम पर धोखा दिया गया
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
जांच के बाद पुलिस ने:
- मुख्य आरोपी सुशील जुवटकर को गिरफ्तार किया
- उसके सहयोगी पंकज कपूर और निशल बारेयाली को भी पकड़ा
- सभी आरोपी अलग-अलग राज्यों से जुड़े हैं
बरामद हुए अहम सबूत
छापेमारी में पुलिस को मिला:
- करीब दो दर्जन बैंक खातों की पासबुक और चेकबुक
- डेबिट कार्ड, सिम कार्ड और मोबाइल फोन
- POS मशीनें और 12 मुहरें
देशभर में फैला था नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ कि:
- इन खातों का इस्तेमाल 120 से ज्यादा साइबर अपराधों में हुआ
- कुल लेनदेन 2 करोड़ से 18 करोड़ रुपए तक
- यह एक संगठित और बड़े स्तर का नेटवर्क था
बढ़ता साइबर खतरा
यह मामला दिखाता है कि:
- अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क भारत तक सक्रिय हैं
- लोगों को निवेश और नौकरी के नाम पर ठगा जा रहा है
- सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है
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