लद्दाख के दुर्गम तांगत्से क्षेत्र में भारतीय सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में सेना के तीन वरिष्ठ अधिकारी सवार थे, जो घायल तो हुए लेकिन सुरक्षित बच गए। घटना बुधवार (20 मई 2026) को लेह के पास हुई, जिसकी आधिकारिक पुष्टि बाद में की गई।
वरिष्ठ अधिकारी सवार थे हेलीकॉप्टर में
दुर्घटना में सेना के 3 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) मेजर जनरल सचिन मेहता, एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर घायल हुए हैं। सभी अधिकारियों को चोटें आई हैं, लेकिन उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
मुश्किल हालात में चमत्कारिक बचाव
हादसे के बाद सामने आई तस्वीरों में अधिकारी हेलीकॉप्टर के मलबे के पास नजर आए। ऊँचाई वाले इलाके और कठिन मौसम परिस्थितियों को देखते हुए इस बचाव को बेहद चमत्कारिक माना जा रहा है। सेना ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं।
चीता हेलीकॉप्टर पर फिर उठे सवाल
दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर सेना के पुराने ‘चीता’ बेड़े का हिस्सा था, जो 1970 के दशक से सेवा में है। ये हेलीकॉप्टर खास तौर पर हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन के लिए जाने जाते हैं और सियाचिन जैसे क्षेत्रों में इनकी अहम भूमिका रही है।
हालांकि, हाल के वर्षों में चीता हेलीकॉप्टर कई हादसों का शिकार हुए हैं, जिसके बाद उनकी सुरक्षा और सेवा अवधि को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
नए हेलीकॉप्टरों से मिलेगा विकल्प
भारतीय सेना अब पुराने चीता हेलीकॉप्टरों को धीरे-धीरे स्वदेशी लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) से बदलने की योजना पर काम कर रही है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित LUH आधुनिक तकनीक से लैस है और ऊँचाई वाले इलाकों में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया है।
माना जा रहा है कि नए हेलीकॉप्टरों के आने से सेना की ऑपरेशनल क्षमता और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।
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