राजस्थान की तपती गर्मी के बीच अजमेर जिले की तीर्थ नगरी पुष्कर में एक अनोखी और कठिन आध्यात्मिक साधना ने सबका ध्यान खींच लिया है। छोटी बस्ती स्थित श्मशान स्थल पर नाथ परंपरा के अंतर्गत रूसी मूल की योगिनी अन्नपूर्णा नाथ ‘9 धूणी अग्नि तपस्या’ कर रही हैं, जो इन दिनों सोशल मीडिया और आध्यात्मिक जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है।
क्या है 9 धूणी अग्नि तपस्या?
नाथ संप्रदाय की यह प्राचीन साधना बेहद कठिन मानी जाती है। इसमें साधक अपने चारों ओर नौ स्थानों पर जलती हुई अग्नि (धूणियाँ) के बीच बैठकर भगवान शिव का ध्यान और मंत्र जाप करता है।
इस साधना में—
- 9 अग्नि धूणियाँ लगातार जलती रहती हैं
- बीच में साधक ध्यान मुद्रा में बैठता है
- गोबर के कंडों से आग प्रज्वलित की जाती है
- शुरुआत 21 कंडों से होती है, जो अंतिम दिन 108 तक पहुँचती है
- साधना का समय प्रतिदिन लगभग साढ़े तीन घंटे होता है
मान्यता है कि इससे मन, शरीर और आत्मा पर नियंत्रण बढ़ता है तथा आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
राजस्थान: रूसी मूल की योगिनी अन्नपूर्णा नाथ पुष्कर में विश्व शांति के लिए तीव्र 'नौ धूनी' अग्नि तपस्या कर रही हैं।
"मैंने यह 3 मई को शुरू किया था और यह 25 मई तक चलेगी।
यह 'साधना' के अंदर 'तपस्या' है, हम परिणाम दिखाते हैं।
'तपस्या' हमारे साधना का परिणाम है, जो हम रोज करते… pic.twitter.com/c3H0JtoTyU
— One India News (@oneindianewscom) May 11, 2026
कौन हैं योगिनी अन्नपूर्णा नाथ?
योगिनी अन्नपूर्णा नाथ का जन्म पूर्व सोवियत संघ में हुआ था और उनका पालन-पोषण कजाकिस्तान में हुआ। लगभग 17 साल पहले वे भारत आईं और योग व सनातन संस्कृति से प्रभावित होकर नाथ संप्रदाय की ओर मुड़ गईं।
करीब 10 साल पहले उन्होंने दीक्षा लेकर सांसारिक जीवन त्याग दिया और पूरी तरह शिव भक्ति व साधना को अपना लिया। वर्तमान में वे टूरिस्ट वीजा पर भारत में रह रही हैं और समय-समय पर अन्य देशों की यात्रा भी करती हैं।
पुष्कर में चल रही कठिन तपस्या
यह साधना 3 मई से शुरू हुई है और 25 मई तक चलेगी। रोजाना सुबह 11 बजे से दोपहर 2:15 बजे तक यह अग्नि तपस्या चलती है। राजस्थान की भीषण गर्मी और धूणियों की आग मिलकर वातावरण को अत्यधिक गर्म बना देती है, लेकिन साधक इसे ही साधना का हिस्सा मानते हैं।
अन्नपूर्णा नाथ के साथ उनके गुरु बाल योगी दीपक नाथ भी इस तपस्या में शामिल हैं।
साधना का उद्देश्य क्या है?
बाल योगी दीपक नाथ के अनुसार यह तपस्या केवल शारीरिक कष्ट नहीं, बल्कि—
- आत्मशक्ति बढ़ाने
- मन को नियंत्रित करने
- और विश्व कल्याण की कामना
के लिए की जाती है। नाथ परंपरा में इस प्रकार की साधना सदियों से चलती आ रही है।
पहले भी रह चुकी हैं चर्चा में
अन्नपूर्णा नाथ पहले भी कठिन साधनाओं के कारण सुर्खियों में रह चुकी हैं। उन्होंने नवरात्रि के दौरान ‘खड़ेश्वरी तपस्या’ भी की थी, जिसमें वे लगातार 9 दिनों तक खड़े रहकर साधना करती रहीं।
वे इस समय 52 शक्तिपीठों की यात्रा पर भी हैं और अब तक 35 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुकी हैं।
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