पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को लेकर सख्ती से जुड़ा एक बड़ा दावा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों में यह कहा जा रहा है कि राज्य में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ एक नया अभियान शुरू किया गया है, जिसका नाम ‘पता लगाओ, हटाओ और देश-निकाला दो’ बताया जा रहा है।
इन दावों के अनुसार,
अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को अब कोर्ट में पेश करने के बजाय सीधे बॉर्डर सुरक्षा बल (BSF) के हवाले कर सीमा पार वापस भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया के तहत रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और पुलिस को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भारत में किसी भी राज्य सरकार या पुलिस के पास सीधे डिपोर्ट करने की स्वतंत्र कानूनी शक्ति नहीं होती। विदेशी नागरिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया आमतौर पर विदेशी अधिनियम और न्यायिक प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के समन्वय से की जाती है।
इसी बीच, यह भी दावा किया जा रहा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यक समुदायों—जैसे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई—को राहत मिल सकती है और वे नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
सरकारी स्तर पर इस तरह के किसी नए राज्य कानून या आदेश की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है, जबकि मौजूदा नियमों के अनुसार विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
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