भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर देशभर से आए आदिवासी समुदाय के लोगों ने दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1.5 लाख आदिवासियों ने राजधानी में इकट्ठा होकर ST (अनुसूचित जनजाति) आरक्षण से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग उठाई।
यह प्रदर्शन RSS से जुड़े ‘जनजाति सुरक्षा मंच’ के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से 500 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने लाल किले के पास जुटकर अपनी मांगों को जोर-शोर से उठाया।
क्या हैं मुख्य मांगें?
आंदोलनकारियों का कहना है कि संविधान के आर्टिकल 342 में संशोधन किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जो लोग धर्म परिवर्तन कर इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाते हैं, उन्हें ST आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल नेताओं का आरोप है कि धर्म परिवर्तन करने वाले कुछ लोग ‘डबल बेनिफिट’ ले रहे हैं, यानी अल्पसंख्यक (माइनॉरिटी) और ST दोनों के लाभ उठा रहे हैं, जिससे वास्तविक जरूरतमंद आदिवासियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
बिरसा मुंडा जयंती पर उठी आवाज
प्रदर्शन का आयोजन बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के मौके पर किया गया, जिन्हें आदिवासी समाज के महान नायक के रूप में सम्मानित किया जाता है। इस अवसर पर वक्ताओं ने आदिवासी अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया।
सरकार से मांग
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से संविधान में आवश्यक संशोधन करने और ST आरक्षण को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है, ताकि इसका लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक ही पहुंचे।
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