असम ने स्वास्थ्य क्षेत्र में रचा नया इतिहास
असम ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य की मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio – MMR) घटकर अब केवल 84 रह गई है, जो पहली बार देश के राष्ट्रीय औसत 88 से भी नीचे पहुंच गई है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस उपलब्धि को अपने सार्वजनिक जीवन का “सबसे भावुक क्षण” बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस ऐतिहासिक सफलता की जानकारी साझा करते हुए हजारों डॉक्टरों, नर्सों, आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मचारियों को इसका श्रेय दिया।
480 से 84 तक: असम का ऐतिहासिक सफर
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि जब उन्होंने साल 2006 में स्वास्थ्य विभाग संभाला था, तब असम की मातृ मृत्यु दर 480 थी। उस समय यह स्थिति देश में सबसे खराब मानी जाती थी।
उन्होंने कहा:
“उस दौर में यह बदलाव लगभग असंभव लगता था, लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों की लगातार मेहनत और समर्पण से आज असम ने इतिहास रच दिया है।”
लगातार दो दशकों तक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने इस बदलाव को संभव बनाया।
There are some moments in public life which touch you very deeply. Today is one such moment for me.
Assam’s Maternal Mortality Rate has come down to 84. For the first time in our history, Assam is now below the national average of 88.
When I took over the Health Department in…
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) May 26, 2026
क्या होती है मातृ मृत्यु दर (MMR)?
मातृ मृत्यु दर यानी Maternal Mortality Ratio वह आँकड़ा होता है, जिसमें यह मापा जाता है कि हर 1 लाख जीवित बच्चों के जन्म पर कितनी महिलाओं की गर्भावस्था, प्रसव या प्रसव के 42 दिनों के भीतर मृत्यु हुई।
यह किसी भी राज्य या देश की:
- स्वास्थ्य व्यवस्था
- अस्पताल सुविधाओं
- डॉक्टरों की उपलब्धता
- महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा
का सबसे बड़ा संकेतक माना जाता है।
गर्भवती महिलाओं की मौत के मुख्य कारण
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मातृ मृत्यु के पीछे कई गंभीर कारण जिम्मेदार होते हैं:
1. अत्यधिक रक्तस्राव
डिलीवरी के दौरान या बाद में ज्यादा खून बहना सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
2. संक्रमण (इंफेक्शन)
साफ-सफाई की कमी और असुरक्षित प्रसव से गंभीर संक्रमण हो सकता है।
3. हाई ब्लड प्रेशर और एक्लेम्पसिया
गर्भावस्था में अचानक रक्तचाप बढ़ने से दिमाग और हृदय पर असर पड़ता है।
4. असुरक्षित गर्भपात
बिना मेडिकल सलाह के कराया गया गर्भपात भी कई बार जानलेवा साबित होता है।
5. एनीमिया और कुपोषण
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में खून और पोषण की कमी स्थिति को और गंभीर बना देती है।
कैसे रोकी जा सकती हैं मातृ मौतें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मातृ मौतों को रोका जा सकता है यदि:
- प्रसव अस्पताल में हो
- प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्स मौजूद हों
- गर्भावस्था में नियमित जांच हो
- आयरन और पोषण का ध्यान रखा जाए
- समय पर एम्बुलेंस और आपातकालीन सुविधा मिले
असम और भारत सरकार की प्रमुख योजनाएँ
जननी सुरक्षा योजना (JSY)
गरीब गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में सुरक्षित डिलीवरी के लिए नकद सहायता दी जाती है।
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK)
सरकारी अस्पतालों में:
- मुफ्त प्रसव
- सीजेरियन ऑपरेशन
- दवाइयाँ
- जांच
- खून
- भोजन
- एम्बुलेंस सेवा
उपलब्ध कराई जाती है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की मुफ्त विशेषज्ञ जांच की जाती है।
सुमन योजना
हर महिला को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण मातृत्व सेवा देने की गारंटी।
लक्ष्य कार्यक्रम
लेबर रूम और प्रसव कक्षों को आधुनिक और साफ-सुथरा बनाने की पहल।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं को ₹5,000 की सहायता।
एनीमिया मुक्त भारत अभियान
महिलाओं और किशोरियों को मुफ्त आयरन दवाइयाँ दी जाती हैं।
WHO का 2030 लक्ष्य क्या है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार:
- दुनिया में हर दिन 700 से अधिक महिलाएँ गर्भावस्था और प्रसव संबंधी कारणों से जान गंवाती हैं
- हर दो मिनट में एक माँ की मौत होती है
- 92% मातृ मौतें गरीब और विकासशील देशों में होती हैं
WHO ने 2030 तक वैश्विक मातृ मृत्यु दर को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य तय किया है।
असम की सफलता क्यों है महत्वपूर्ण?
असम लंबे समय तक देश के सबसे पिछड़े स्वास्थ्य सूचकांकों वाले राज्यों में शामिल रहा। लेकिन अब राज्य का राष्ट्रीय औसत से नीचे आना यह दिखाता है कि:
- मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति
- स्वास्थ्य ढांचे में निवेश
- जमीनी स्तर पर कार्य
- महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा पर फोकस
किसी भी राज्य की तस्वीर बदल सकते हैं।
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