उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में PDA के ‘A’ को आदिवासी समाज से जोड़ दिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने उन पर तीखा हमला बोला।
ओपी राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अपने राजनीतिक कार्यक्रम, सम्मेलन और लक्षित मतदाता वर्ग के अनुसार PDA की परिभाषा बदलते रहते हैं। उन्होंने फिल्म अभिनेता गोविंदा की चर्चित फिल्म ‘राजा बाबू’ का उदाहरण देते हुए अखिलेश यादव को भारतीय राजनीति का ‘राजा बाबू’ बताया।
अखिलेश यादव ने आदिवासी समाज के मुद्दे उठाए
अखिलेश यादव ने बुधवार, 24 जून 2026 को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि और पार्टी के कई नेता उपस्थित थे।
अखिलेश यादव ने आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदायों की जमीन, प्राकृतिक संसाधनों और संवैधानिक अधिकारों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं हो रही है।
सपा प्रमुख ने वीरांगना महारानी दुर्गावती के साहस और बलिदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि महारानी दुर्गावती ने अपने शासन, संघर्ष और बलिदान के माध्यम से देश के इतिहास में अमिट स्थान बनाया है।
इसी कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने अपने PDA राजनीतिक फॉर्मूले में ‘A’ को आदिवासी समाज से जोड़ते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी सभी वंचित, शोषित और उपेक्षित वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है।
अखिलेश जी ने आज अपने PDA की नई व्याख्या की। उन्होंने कहा कि PDA में A का मतलब आदिवासी है।
A को अल्पसंख्यक और अगड़ा वो, पहले ही बता चुके हैं।
डर ये लग रहा है कि अखिलेश जी किसी दिन कोई सम्मेलन करते हुए यह न कह दें कि A का मतलब आंकवादी भी होता है!
वैसे भी उनकी सरकार अपने कार्यकाल…
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) June 25, 2026
PDA के ‘A’ की नई व्याख्या पर राजभर का हमला
अखिलेश यादव के बयान के बाद ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सपा प्रमुख ने PDA की एक और नई व्याख्या प्रस्तुत कर दी है। राजभर ने लिखा कि अखिलेश यादव ने पहले ‘A’ का अर्थ अल्पसंख्यक बताया, फिर इसे अगड़ा समाज और आधी आबादी से जोड़ा तथा अब इसका अर्थ आदिवासी बता रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अलग-अलग समुदायों को अपने राजनीतिक गठबंधन में जोड़ने के लिए PDA के अक्षरों के अर्थ बदलते रहते हैं। राजभर ने कहा कि किसी राजनीतिक नारे की स्पष्ट परिभाषा होनी चाहिए और उसे राजनीतिक परिस्थिति अथवा सम्मेलन के अनुसार बार-बार नहीं बदला जाना चाहिए।
अखिलेश को बताया राजनीति का ‘राजा बाबू’
ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसने के लिए गोविंदा अभिनीत फिल्म ‘राजा बाबू’ का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि फिल्म में गोविंदा का किरदार कभी वकील, कभी डॉक्टर, कभी पुलिस अधिकारी और कभी नेता के रूप में दिखाई देता है। इसी तरह अखिलेश यादव भी अपने राजनीतिक हितों के अनुसार PDA की व्याख्या बदलते रहते हैं।
राजभर ने कहा कि इसी कारण अखिलेश यादव को भारतीय राजनीति का ‘राजा बाबू’ कहा जा सकता है। यह बयान राजनीतिक व्यंग्य के रूप में दिया गया है और इसका उद्देश्य समाजवादी पार्टी के PDA अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना है।
‘आतंकवादी’ वाले बयान पर बढ़ा विवाद
ओपी राजभर ने अपनी पोस्ट में एक अत्यंत विवादित टिप्पणी करते हुए आशंका जताई कि अखिलेश यादव भविष्य में PDA के ‘A’ का कोई और अर्थ भी बता सकते हैं।
उन्होंने तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए ‘आतंकवादी’ शब्द का भी इस्तेमाल किया। यह राजभर की राजनीतिक टिप्पणी और आरोप है, जिसे किसी समुदाय या PDA की वास्तविक परिभाषा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
PDA का इस्तेमाल समाजवादी पार्टी मुख्य रूप से पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक गठजोड़ के लिए करती रही है। अखिलेश यादव समय-समय पर इसके दायरे में आदिवासी, अगड़ा, आधी आबादी और अन्य वंचित समूहों को शामिल करने की बात भी करते रहे हैं।
पूर्व सपा सरकार पर मुकदमे वापस लेने का आरोप
ओपी राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान आतंकवाद से संबंधित कुछ मामलों को वापस लेने की कोशिश का भी उल्लेख किया।
राजभर ने वाराणसी विस्फोट और लखनऊ, फैजाबाद तथा वाराणसी की अदालतों में हुए सिलसिलेवार धमाकों से जुड़े मुकदमों का उदाहरण देते हुए सपा पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
हालांकि इस मामले में तथ्य यह है कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी। अदालतों से इसकी अनुमति मांगी गई थी, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट ने कहा था कि जिन मामलों में केंद्रीय कानून लगाए गए हैं, उन्हें केंद्र सरकार की अनुमति के बिना राज्य सरकार वापस नहीं ले सकती। इसलिए यह कहना अधिक सही होगा कि सपा सरकार ने मुकदमे वापस लेने का प्रयास किया था, लेकिन न्यायिक हस्तक्षेप के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
क्या है समाजवादी पार्टी का PDA फॉर्मूला?
समाजवादी पार्टी ने PDA को अपनी प्रमुख सामाजिक और चुनावी रणनीति के रूप में प्रस्तुत किया है। इसका मूल अर्थ ‘पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक’ बताया गया था।
इस फॉर्मूले के जरिए सपा ने गैर-यादव पिछड़े वर्गों, दलित समुदायों और अल्पसंख्यक मतदाताओं को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाने का प्रयास किया।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने PDA को सामाजिक न्याय, आरक्षण, संविधान और प्रतिनिधित्व के मुद्दों से जोड़ा था।
इसके बाद अखिलेश यादव ने अलग-अलग मौकों पर कहा कि PDA केवल तीन समुदायों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें अगड़े समाज के शोषित लोग, आदिवासी और आधी आबादी यानी महिलाएं भी शामिल हैं।
‘A’ का अर्थ पहले क्या बताया गया?
समाजवादी पार्टी के शुरुआती राजनीतिक अभियान में PDA के ‘A’ का अर्थ अल्पसंख्यक बताया गया था। बाद में अखिलेश यादव ने कहा कि ‘A’ में अगड़े समाज के वे लोग भी शामिल हैं, जो शोषित या उपेक्षित हैं।
महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की चर्चा के दौरान उन्होंने ‘A’ को आधी आबादी से भी जोड़ा। आदिवासी समाज के कार्यक्रम में अब ‘A’ का अर्थ आदिवासी बताया गया है।
समाजवादी पार्टी का तर्क है कि PDA एक विस्तृत सामाजिक गठबंधन है, जिसमें सभी वंचित और उपेक्षित वर्गों के लिए जगह है। दूसरी ओर भाजपा और उसके सहयोगी दल इसे राजनीतिक सुविधा के अनुसार बदलने वाला नारा बताते हैं।
PDA+B का भी दिया था नारा
ब्राह्मण समुदाय और अन्य अगड़े वर्गों के मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए समाजवादी पार्टी ने कुछ कार्यक्रमों में PDA+B का उल्लेख भी किया था।
इसमें ‘B’ को ब्राह्मण समाज से जोड़ते हुए सपा ने दावा किया था कि उसका राजनीतिक गठबंधन किसी जाति या धर्म के खिलाफ नहीं है।
हालांकि विरोधी दलों ने इसे चुनावी समीकरण साधने का प्रयास बताया और सवाल किया कि यदि PDA में सभी समुदाय शामिल हैं तो उसके अक्षरों की व्याख्या बार-बार करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
आदिवासी मतदाताओं पर समाजवादी पार्टी की नजर
उत्तर प्रदेश में आदिवासी मतदाताओं की संख्या कुछ अन्य सामाजिक समूहों की तुलना में कम है, लेकिन सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, ललितपुर और प्रदेश के कुछ अन्य क्षेत्रों में उनका स्थानीय राजनीतिक प्रभाव है।
समाजवादी पार्टी आदिवासी समाज को अपने सामाजिक न्याय अभियान से जोड़कर इन क्षेत्रों में संगठन मजबूत करना चाहती है।
जल, जंगल, जमीन, आरक्षण, वन अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व आदिवासी समुदायों से जुड़े प्रमुख मुद्दे हैं। अखिलेश यादव इन्हीं मुद्दों के माध्यम से भाजपा सरकार को घेरने और आदिवासी समाज को PDA गठबंधन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
2027 विधानसभा चुनाव से जुड़ी रणनीति
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके मद्देनजर समाजवादी पार्टी और भाजपा सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दल सामाजिक और जातीय समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं।
समाजवादी पार्टी PDA के जरिए पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी और महिला मतदाताओं को अपने साथ जोड़ना चाहती है।
वहीं भाजपा तथा उसके सहयोगी दल सपा पर परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाकर PDA के प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
ओपी राजभर, संजय निषाद और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये दल उत्तर प्रदेश के कई पिछड़े और अति पिछड़े समुदायों में राजनीतिक प्रभाव रखते हैं।
राजभर पहले भी साध चुके हैं PDA पर निशाना
यह पहली बार नहीं है जब ओपी राजभर ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के PDA अभियान पर हमला किया हो।
राजभर पूर्व में भी आरोप लगा चुके हैं कि समाजवादी पार्टी पिछड़े और दलित समुदायों के नाम पर राजनीति करती है, लेकिन सत्ता और संगठन में कुछ चुनिंदा लोगों को ही प्राथमिकता देती है।
उन्होंने PDA को लेकर कई व्यंग्यात्मक परिभाषाएं दी हैं और सपा पर राजभर तथा अन्य अति पिछड़े समुदायों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।
समाजवादी पार्टी इन आरोपों को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि PDA सामाजिक न्याय तथा संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई का राजनीतिक मंच है।
सियासी बयानबाजी और सामाजिक संवेदनशीलता
PDA को लेकर जारी इस विवाद में राजनीतिक दलों के बीच तीखे आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि किसी समुदाय को आतंकवाद जैसे शब्दों के साथ जोड़ने वाली बयानबाजी सामाजिक रूप से संवेदनशील और विवादास्पद हो सकती है।
राजनीतिक नेताओं के आरोपों और व्यंग्य को संबंधित व्यक्ति का बयान बताते हुए ही प्रकाशित करना आवश्यक है। उन्हें किसी पूरे समुदाय के बारे में स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। अखिलेश यादव और ओपी राजभर के बीच यह ताजा विवाद उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय, जातीय प्रतिनिधित्व और अल्पसंख्यक राजनीति को लेकर जारी राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है।
निष्कर्ष
अखिलेश यादव द्वारा PDA के ‘A’ को आदिवासी समाज से जोड़ने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। ओपी राजभर ने PDA की अलग-अलग व्याख्याओं को लेकर अखिलेश यादव पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाया और उन्हें भारतीय राजनीति का ‘राजा बाबू’ बताया।
इस विवाद के जरिए दोनों पक्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। आने वाले दिनों में PDA की परिभाषा और उसके वास्तविक राजनीतिक दायरे को लेकर सपा तथा NDA नेताओं के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
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