तमिलनाडु के बिजली क्षेत्र की गंभीर वित्तीय स्थिति को लेकर राज्य सरकार ने श्वेत पत्र जारी किया है। बिजली एवं कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने 25 जून 2026 को जारी रिपोर्ट में बताया कि तमिलनाडु बिजली बोर्ड समूह पर कुल ₹2,47,130 करोड़ का बकाया कर्ज है।
भारी कर्ज और लगातार वित्तीय दबाव के बावजूद राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए साफ किया है कि इस वर्ष बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। किसानों को दी जा रही मुफ्त बिजली योजना भी पहले की तरह जारी रहेगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार बिजली बोर्ड को मजबूत करने, खर्च नियंत्रित करने, बुनियादी ढांचे में सुधार और वित्तीय प्रबंधन को पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाएगी।
बिजली बोर्ड मुख्यालय में जारी हुआ श्वेत पत्र
सीटीआर निर्मल कुमार ने चेन्नई स्थित बिजली बोर्ड मुख्यालय में बिजली क्षेत्र की वित्तीय और परिचालन स्थिति पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया।
रिपोर्ट में बीते 25 वर्षों के दौरान बिजली क्षेत्र के राजस्व, खर्च, कर्ज, घाटे, कर्मचारियों की स्थिति, बिजली खरीद, बुनियादी ढांचे, परियोजनाओं और उपकरणों से जुड़ी जानकारी शामिल की गई है।
सरकार का कहना है कि यह दस्तावेज बिजली क्षेत्र की मौजूदा वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखने और भविष्य के सुधारों की रूपरेखा तैयार करने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
बिजली क्षेत्र पर ₹2,47,130 करोड़ का कर्ज
श्वेत पत्र के अनुसार 31 मार्च 2026 तक तमिलनाडु बिजली बोर्ड समूह का कुल बकाया कर्ज ₹2,47,130 करोड़ था। इसके साथ समूह का संचित घाटा ₹1,82,361 करोड़ तक पहुंच गया है।
तमिलनाडु बिजली बोर्ड समूह में मुख्य रूप से चार सरकारी कंपनियां शामिल हैं—
- तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड
- तमिलनाडु पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड
- तमिलनाडु ग्रीन एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड
- तमिलनाडु ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड
इनमें वितरण कंपनी पर ₹1,07,365 करोड़ और बिजली उत्पादन कंपनी पर ₹1,03,128 करोड़ का बकाया कर्ज बताया गया है।
ट्रांसमिशन कंपनी पर ₹30,965 करोड़ तथा ग्रीन एनर्जी कंपनी पर ₹5,672 करोड़ का कर्ज दर्ज किया गया है।
सार्वजनिक उपक्रमों के कर्ज में बिजली क्षेत्र की हिस्सेदारी 77.6 प्रतिशत
रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु के प्रमुख सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों पर कुल लगभग ₹3.18 लाख करोड़ का कर्ज है। इसमें अकेले बिजली क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 77.6 प्रतिशत है।
इसका अर्थ है कि राज्य के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों के वित्तीय दबाव का सबसे बड़ा हिस्सा बिजली से जुड़ी कंपनियों पर केंद्रित है।
सरकार के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बिजली कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए हर वर्ष सब्सिडी, घाटा वित्तपोषण और इक्विटी सहायता के रूप में बड़ी राशि उपलब्ध करानी पड़ती है।
पांच वर्षों में ₹34,447 करोड़ का अंतर
बिजली मंत्री के अनुसार 2021 से 2026 के बीच बिजली बोर्ड ने लगभग ₹5.32 लाख करोड़ खर्च किए, जबकि इसी अवधि में उसकी आमदनी करीब ₹4.97 लाख करोड़ रही।
इस प्रकार पांच वर्षों में राजस्व और खर्च के बीच लगभग ₹34,447 करोड़ का अंतर दर्ज किया गया।
मंत्री ने सवाल उठाया कि इतने बड़े खर्च और उधारी के बावजूद बिजली उत्पादन, वितरण व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं दिखाई दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार खर्च, खरीद प्रक्रियाओं और परियोजनाओं की समीक्षा करेगी तथा अनियमितता सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
2021 के बाद तेजी से बढ़ा कर्ज
आधिकारिक श्वेत पत्र के मुताबिक मार्च 2021 में तमिलनाडु बिजली बोर्ड समूह का कर्ज ₹1,67,861 करोड़ था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर ₹2,47,130 करोड़ हो गया।
इस तरह पांच वर्षों में बिजली क्षेत्र के बकाया कर्ज में करीब ₹79,269 करोड़ की बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय से हो रहे परिचालन घाटे को उधारी के माध्यम से पूरा करने के कारण कर्ज लगातार बढ़ा है।
बिजली की औसत आपूर्ति लागत और वास्तविक रूप से प्राप्त होने वाले राजस्व के बीच अंतर भी इस वित्तीय संकट का एक प्रमुख कारण रहा है।
इस वर्ष नहीं बढ़ेंगी बिजली की दरें
श्वेत पत्र जारी करते हुए मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया कि इस वर्ष बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि बिजली दरों में संशोधन से संबंधित किसी आदेश को सरकार मंजूरी नहीं देगी। वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए उपभोक्ताओं पर तत्काल अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय दूसरे सुधारात्मक उपाय अपनाए जाएंगे।
तमिलनाडु में लगभग 3.5 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को इस घोषणा से राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार को बिजली क्षेत्र की खराब वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के बीच संतुलन बनाना होगा।
किसानों की मुफ्त बिजली योजना रहेगी जारी
बिजली मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों को दी जा रही मुफ्त बिजली योजना बंद नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि किसानों के लिए वर्तमान बिजली सब्सिडी और मुफ्त आपूर्ति की व्यवस्था जारी रखी जाएगी। इससे कृषि सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर किसानों को बड़ी राहत मिली है।
राज्य में मुफ्त कृषि बिजली लंबे समय से एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना रही है। सरकार ने संकेत दिया है कि बिजली बोर्ड की वित्तीय स्थिति सुधारने के नाम पर किसानों की इस सुविधा में कटौती नहीं की जाएगी।
₹13.18 लाख करोड़ के आंकड़े का क्या अर्थ?
बिजली क्षेत्र का श्वेत पत्र उस व्यापक वित्तीय रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद जारी हुआ है, जिसमें तमिलनाडु का कुल वित्तीय एक्सपोजर करीब ₹13.18 लाख करोड़ बताया गया था।
इस आंकड़े में केवल राज्य सरकार का प्रत्यक्ष कर्ज शामिल नहीं है। इसमें सरकारी गारंटी, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के कर्ज और अन्य वित्तीय देनदारियों को भी जोड़ा गया है।
इसलिए ₹13.18 लाख करोड़ को सीधे तौर पर तमिलनाडु सरकार का प्रत्यक्ष बकाया कर्ज कहना भ्रामक हो सकता है।
व्यापक श्वेत पत्र में बताया गया था कि बिजली, परिवहन और नागरिक आपूर्ति से जुड़े प्रमुख सरकारी उपक्रमों पर लगभग ₹3.18 लाख करोड़ का संयुक्त कर्ज है। इसमें अकेले बिजली कंपनियों पर ₹2.47 लाख करोड़ से अधिक की देनदारी है।
सरकार से हर वर्ष मिली बड़ी वित्तीय सहायता
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार 2021-22 से 2025-26 के बीच तमिलनाडु सरकार ने बिजली बोर्ड समूह को लगभग ₹1,45,185 करोड़ की वित्तीय सहायता दी।
इस सहायता में बिजली दर सब्सिडी, घाटे की भरपाई, इक्विटी पूंजी और अन्य वित्तीय सहयोग शामिल हैं।
सरकारी सहायता 2021-22 में ₹20,996 करोड़ थी, जो 2025-26 में बढ़कर ₹33,478 करोड़ तक पहुंच गई।
यह दर्शाता है कि बिजली क्षेत्र की आर्थिक स्थिति का असर सीधे राज्य के बजट और विकास कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर पड़ रहा है।
कर्मचारियों की भारी कमी भी बनी चुनौती
श्वेत पत्र में बिजली बोर्ड के कर्मचारियों की कमी को भी बड़ी समस्या बताया गया है।
मंत्री के अनुसार विभाग में कुल 1,40,635 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें केवल 74,714 पद भरे हुए हैं। लगभग 65,921 पद खाली हैं।
वर्ष 2021 से 2026 के बीच 9,136 कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए, जबकि इस अवधि में केवल 343 नई नियुक्तियां की गईं।
सरकार ने इस वर्ष लगभग 20,000 कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना की जानकारी दी है। इससे बिजली आपूर्ति, रखरखाव, शिकायत निवारण और तकनीकी सेवाओं में सुधार होने की उम्मीद है।
पुराने उपकरणों और ढांचे को बदलने की जरूरत
रिपोर्ट में राज्य के बिजली बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है।
तमिलनाडु में लाखों ट्रांसफॉर्मर काम कर रहे हैं, जिनमें हजारों ट्रांसफॉर्मर 25 वर्ष से अधिक पुराने बताए गए हैं। पुराने उपकरणों के कारण बिजली कटौती, तकनीकी खराबी और वितरण नुकसान का खतरा बढ़ता है।
सरकार ने नए सब-स्टेशन स्थापित करने और बिजली वितरण व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर काम करने की बात कही है।
लंबी अवधि के बिजली खरीद समझौतों के माध्यम से बिजली खरीद की लागत कम करने की योजना भी बनाई जा रही है।
बिजली खरीद पर खर्च घटाने की तैयारी
तमिलनाडु अपनी बिजली जरूरतों को ताप, जल, गैस और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करता है। इसके अलावा केंद्र सरकार, निजी उत्पादकों और दूसरे राज्यों से भी बिजली खरीदी जाती है।
सरकार की योजना छोटी अवधि के महंगे बिजली खरीद समझौतों को कम करके लंबी अवधि के समझौतों की ओर बढ़ने की है।
मंत्री के अनुसार इस बदलाव से सरकार को हर महीने लगभग ₹215 करोड़ की बचत हो सकती है।
हालांकि इस लक्ष्य की सफलता बिजली की मांग, उत्पादन क्षमता, बाजार दरों और नए समझौतों की शर्तों पर निर्भर करेगी।
कर्ज घटाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती
तमिलनाडु बिजली क्षेत्र पर ₹2.47 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज सरकार के लिए गंभीर वित्तीय चुनौती है।
एक ओर सरकार को बिजली कंपनियों के घाटे और कर्ज को नियंत्रित करना है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली, किसानों को मुफ्त आपूर्ति और उद्योगों को निर्बाध बिजली उपलब्ध करानी है।
सरकार ने फिलहाल दरें नहीं बढ़ाने का फैसला किया है, लेकिन लंबी अवधि में वित्तीय सुधार के लिए बिजली चोरी रोकने, वितरण नुकसान कम करने, खर्च पर नियंत्रण, बिजली खरीद में बचत और उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसे कदम आवश्यक होंगे।
श्वेत पत्र के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकार घोषित सुधारों को जमीन पर कितनी तेजी से लागू करती है और भारी कर्ज के बावजूद उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले बिना बिजली व्यवस्था को कैसे मजबूत बनाती है।
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