भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत की उदारता और सहनशीलता को उसकी कमजोरी समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर भारत जोखिम उठाने और कड़ा प्रहार करने की क्षमता रखता है, फिर चाहे उसके नतीजे कुछ भी हों।
डोभाल ने यह बात डिस्कवरी की आगामी दो-भाग वाली डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘Declassified: Operation Sindoor’ में कही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपने पहले इंटरव्यू में उन्होंने सैन्य कार्रवाई के पीछे भारत के रणनीतिक फैसलों, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संकल्प और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर बात की।
‘भारत की सहनशी लता को कमजोरी न समझें’
अजीत डोभाल ने कहा, “दुनिया के लिए संदेश बहुत साफ है—भारत की उदारता या सहनशीलता को उसकी कमजोरी नहीं समझना चाहिए। भारत जोखिम उठा सकता है, भारत कड़ा प्रहार कर सकता है, चाहे नतीजे कुछ भी हों।”
डोभाल का यह बयान भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और आतंकवाद के खिलाफ उसके रुख के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका संदेश इस बात पर केंद्रित है कि आतंकवादी हमलों के बाद भारत जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।
88 घंटे चला था ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 की सुबह हुई थी। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी। पहलगाम हमले में 26 लोगों की जान गई थी।
भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से भी भारतीय क्षेत्रों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिशें हुईं, जिनका भारत ने जवाब दिया।
भारत और पाकिस्तान के बीच यह सैन्य टकराव करीब 88 घंटे तक चला और 10 मई की शाम दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति के बाद तनाव में कमी आई।
आतंकी कैंपों को नष्ट करना था लक्ष्य
डोभाल के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकवादी ढांचे और कैंपों को निशाना बनाना था। खास तौर पर उन नेटवर्क और ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिन्हें पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ा गया था।
ऑपरेशन सिंदूर ने यह संदेश देने की कोशिश की कि भारत अपने नागरिकों पर बड़े आतंकी हमले की स्थिति में सीमा पार मौजूद आतंकवादी बुनियादी ढांचे के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का विकल्प इस्तेमाल कर सकता है।
‘Declassified: Operation Sindoor’ में सामने आएगी अंदर की कहानी
डिस्कवरी के मुताबिक दो हिस्सों वाली ‘Declassified: Operation Sindoor’ सीरीज में भारत के सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा नेतृत्व से जुड़े लोगों के अनुभव और विवरण शामिल किए गए हैं। डॉक्यूमेंट्री ऑपरेशन के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों और घटनाक्रम को सामने लाने का प्रयास करेगी।
इसमें उन अधिकारियों के अनुभव भी शामिल हैं जिन्होंने भारत की जवाबी कार्रवाई की निगरानी और रणनीतिक निर्णयों में भूमिका निभाई थी। अजीत डोभाल इसमें सैन्य जवाबी कार्रवाई के पीछे के फैसलों और भारत के संकल्प के बारे में बताते हैं।
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