मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला कांग्रेस कमेटियों की नई सूची जारी होने के बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पहले भोपाल जिला कांग्रेस कमेटी को लेकर विवाद सामने आया था, अब रतलाम जिला कांग्रेस कमेटी की सूची पर दो कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया है।
रतलाम के कांग्रेस कार्यकर्ता संजय रावल और गौरव पोरवाल ने आरोप लगाया है कि जिला कांग्रेस कमेटी की सूची में एक ही व्यक्ति को दो से तीन पद दिए गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। दोनों कार्यकर्ताओं का दावा है कि जब उन्होंने इस मुद्दे पर आवाज उठाई, तो संगठन स्तर पर उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उपलब्ध रिपोर्ट में भी दोनों कार्यकर्ताओं के आरोपों और भोपाल में उनके धरने का उल्लेख किया गया है।
संजय रावल का कहना है कि वे रतलाम से करीब 300 किलोमीटर पैदल चलकर भोपाल पहुंचे हैं। उनके अनुसार, यह यात्रा उन्होंने आम कार्यकर्ताओं के सम्मान और संगठन में पारदर्शिता की मांग को लेकर की है। सोशल मीडिया पोस्ट में भी रतलाम से भोपाल तक “कार्यकर्ता सम्मान यात्रा” का जिक्र सामने आया है।
धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से मुलाकात की कोशिश के बावजूद उनकी बात गंभीरता से नहीं सुनी गई। एक रिपोर्ट के अनुसार, रतलाम में भी दो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जीतू पटवारी के काफिले के सामने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद उन्हें समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था।
गौरव पोरवाल ने आरोप लगाया कि रतलाम जिला कार्यकारिणी में एक ही व्यक्ति को तीन-चार जिम्मेदारियां दे दी गईं। उनका दावा है कि इस मुद्दे को उठाने के बाद रतलाम जिला अध्यक्ष ने उन्हें निष्कासित कर दिया। गौरव पोरवाल का कहना है कि कांग्रेस में अगर कार्यकर्ताओं की कमी बताकर एक व्यक्ति को कई पद दिए जा रहे हैं, तो यह संगठन की खराब स्थिति को दिखाता है।
दोनों निष्कासित कार्यकर्ताओं की मांग है कि पार्टी में पद उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जो जमीन पर मेहनत करते हैं। उनका कहना है कि संगठन में सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी से कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदेश नेतृत्व ने उनकी बात नहीं सुनी, तो वे दिल्ली पैदल जाकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं तक अपनी शिकायत पहुंचाएंगे।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पहले से ही संगठनात्मक बदलाव और चुनावी रणनीति को लेकर सक्रिय है। ऐसे समय में जिला कमेटियों की सूची पर उठ रहा विरोध पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकता है। खासकर 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच कार्यकर्ताओं की नाराजगी कांग्रेस के अंदरूनी प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिला स्तर की कमेटियां किसी भी पार्टी की जमीनी ताकत का आधार होती हैं। अगर नियुक्तियों को लेकर असंतोष बढ़ता है, तो इसका असर बूथ और ब्लॉक स्तर की सक्रियता पर भी पड़ सकता है। रतलाम से उठी यह नाराजगी अब भोपाल तक पहुंच चुकी है और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बढ़ा रही है।
फिलहाल संजय रावल और गौरव पोरवाल भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। दोनों का कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
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