उत्तर प्रदेश के ग्रामीणों के लिए योगी सरकार ने बड़ी राहत देने वाली व्यवस्था लागू की है। 1 जुलाई 2026 से प्रदेश के सभी जिलों में लेखपाल अब ग्राम सचिवालयों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार बैठेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीणों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल और अन्य राजस्व सेवाओं के लिए बार-बार तहसील के चक्कर लगाने से राहत देना है। राजस्व परिषद ने सभी जिलाधिकारियों को ग्राम सचिवालयों में लेखपालों की बैठने की व्यवस्था और रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
अब गांव के लोगों को छोटे-छोटे प्रमाण पत्रों या जमीन से जुड़े कामों के लिए कई किलोमीटर दूर तहसील जाने की जरूरत कम पड़ेगी। पहले ग्रामीणों को आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, हैसियत प्रमाण पत्र या खतौनी की नकल जैसे कामों के लिए तहसील जाना पड़ता था। कई बार लेखपाल उपलब्ध नहीं होते थे, जिससे लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। नई व्यवस्था में लेखपाल के बैठने का दिन और समय पहले से तय रहेगा।
सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि ग्राम सचिवालय में लेखपाल की उपस्थिति को नियमित और पारदर्शी बनाया जाए। इसके लिए हर क्षेत्र में रोस्टर तैयार किया जाएगा। ग्रामीणों को यह जानकारी पहले से मिल सकेगी कि लेखपाल किस दिन और किस समय ग्राम सचिवालय में उपलब्ध रहेंगे। इससे लोगों को अनिश्चितता से राहत मिलेगी और सरकारी कामकाज में जवाबदेही बढ़ेगी।
इस व्यवस्था से राजस्व विभाग से जुड़े कई जरूरी काम गांव में ही निपट सकेंगे। वरासत यानी जमीन के नामांतरण, खतौनी की नकल, जमीन विवाद, अवैध कब्जे की शिकायत, किसान सम्मान निधि का सत्यापन, फसल नुकसान की रिपोर्ट और राजस्व अभिलेखों से जुड़े कामों में तेजी आने की उम्मीद है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम सचिवालय में लेखपालों की मौजूदगी से राजस्व सेवाएं गांव स्तर पर अधिक समयबद्ध और पारदर्शी होंगी।
योगी सरकार की इस पहल को ग्रामीण प्रशासन को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार ग्राम सचिवालयों को केवल पंचायत कार्यालय नहीं, बल्कि गांव के लिए “वन स्टॉप सर्विस सेंटर” के रूप में विकसित करना चाहती है। इसका मतलब है कि ग्रामीणों को एक ही स्थान पर पंचायत, राजस्व और अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़ी सहायता मिल सके।
लेखपाल गांव में बैठेंगे तो स्थानीय स्तर पर शिकायतों और आवेदनों का त्वरित संज्ञान लिया जा सकेगा। जमीन की पैमाइश, सीमांकन, विवादित भूमि की स्थिति, फसल क्षति का सत्यापन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी पात्रता जांच जैसे मामलों में देरी कम होगी। इससे किसानों, बुजुर्गों, महिलाओं और गरीब परिवारों को विशेष राहत मिलेगी।
नई व्यवस्था से भ्रष्टाचार और अनावश्यक भागदौड़ पर भी रोक लगने की उम्मीद है। जब लेखपाल की उपस्थिति ग्राम सचिवालय में तय समय पर होगी और जानकारी सार्वजनिक होगी, तो ग्रामीणों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और विश्वास दोनों बढ़ेंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र की जरूरत छात्रों, युवाओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को पड़ती है। छात्रवृत्ति, प्रवेश, नौकरी, पेंशन, आवास योजना, किसान योजना और अन्य सरकारी लाभों के लिए ऐसे दस्तावेज आवश्यक होते हैं। लेखपाल की गांव में उपलब्धता से इन प्रमाण पत्रों की रिपोर्ट और सत्यापन प्रक्रिया तेज हो सकती है।
किसानों के लिए भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है। फसल नुकसान की रिपोर्ट, जमीन के रिकॉर्ड, खतौनी की नकल, किसान सम्मान निधि सत्यापन और भूमि विवाद जैसे कामों के लिए लेखपाल की भूमिका बेहद अहम होती है। अब ग्राम सचिवालय में लेखपाल उपलब्ध होने से किसानों को समय पर सहायता मिल सकेगी।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला ग्रामीणों के लिए प्रशासन को उनके दरवाजे तक लाने की दिशा में बड़ा कदम है। यदि रोस्टर व्यवस्था ठीक से लागू होती है और लेखपालों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित रहती है, तो गांवों में राजस्व सेवाओं की गति, पारदर्शिता और जवाबदेही में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
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