केंद्र सरकार ने WhatsApp के नए ‘यूजरनेम फीचर’ को लेकर Meta को नोटिस भेजा है। सरकार ने कंपनी को निर्देश दिया है कि भारत में इस फीचर को फिलहाल शुरू न किया जाए और जब तक सरकार के साथ परामर्श पूरा नहीं हो जाता, तब तक इसके रोलआउट पर आगे न बढ़ा जाए। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने Meta से तीन दिन के भीतर इस फीचर पर विस्तृत जवाब और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है।
यह नोटिस WhatsApp की 29 जून 2026 की उस घोषणा के बाद जारी किया गया, जिसमें कंपनी ने कहा था कि यूजर्स भविष्य में मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल यूजरनेम के जरिए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। इस फीचर के तहत यूजर अपना यूनिक यूजरनेम रिजर्व कर सकेंगे और पूरी तरह एक्टिव होने के बाद बातचीत के लिए फोन नंबर दिखाना जरूरी नहीं होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 को भेजे गए नोटिस में सरकार ने WhatsApp के इंडिया चीफ कंप्लायंस ऑफिसर से पूछा है कि इस फीचर की जरूरत क्या है और इससे जुड़े सुरक्षा उपाय क्या होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने WhatsApp से तीन दिन में जवाब मांगा है और रोलआउट को परामर्श पूरा होने तक रोकने को कहा है।
Central Government has issued notice to Meta regarding roll-out of the “usernames” feature on WhatsApp in India.
The notice reads, "…It is felt that the feature may materially increase the incidence of online fraud, phishing, digital arrest scams and impersonation attacks, by… https://t.co/XvNmgoST5G pic.twitter.com/9JkzuVncuR
— ANI (@ANI) July 1, 2026
सरकार की मुख्य चिंता यह है कि मोबाइल नंबर छिप जाने के बाद ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों का जोखिम बढ़ सकता है। अधिकारियों का मानना है कि इस फीचर का दुरुपयोग करके साइबर ठग फर्जी पहचान बना सकते हैं, लोगों को भ्रमित कर सकते हैं और फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, इम्पर्सनेशन अटैक जैसे अपराधों को अंजाम दे सकते हैं।
नोटिस में यह भी चिंता जताई गई है कि कोई व्यक्ति किसी सरकारी विभाग, बैंक, वित्तीय संस्था, प्रसिद्ध व्यक्ति या सार्वजनिक प्राधिकरण जैसा यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकता है। इससे आम यूजर्स के लिए असली और नकली पहचान में फर्क करना मुश्किल हो सकता है। सरकार का कहना है कि WhatsApp जैसी बड़ी सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को भारतीय कानूनों और आईटी नियमों का पालन करते हुए ऐसा कोई फीचर नहीं लाना चाहिए, जिससे यूजर्स की सुरक्षा पर खतरा बढ़े।
WhatsApp की ओर से कहा गया है कि यह फीचर अभी पूरी तरह लाइव नहीं है और इसे साल के अंत तक धीरे-धीरे रोलआउट किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक, यूजरनेम फीचर के बावजूद WhatsApp पर रजिस्ट्रेशन के लिए फोन नंबर जरूरी रहेगा। साथ ही, किसी व्यक्ति को मैसेज करने के लिए उसका सटीक यूजरनेम पता होना जरूरी होगा।
WhatsApp ने यह भी दावा किया है कि फीचर में स्कैम रोकने के लिए कई सुरक्षा परतें जोड़ी गई हैं। इनमें नए लोगों को मैसेज करने की सीमा, यूजरनेम गेसिंग रोकने की व्यवस्था, हाई-प्रोफाइल लोगों और संस्थाओं से जुड़े नामों को सुरक्षित रखना और यूजर प्राइवेसी को मजबूत करना जैसे उपाय शामिल बताए गए हैं।
WhatsApp का कहना है कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करने के लिए लाया जा रहा है, ताकि बड़े ग्रुप, नए संपर्कों और बिजनेस चैट में यूजर का मोबाइल नंबर अपने आप सामने न आए। हालांकि, सरकार फिलहाल इस बात की समीक्षा कर रही है कि प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है, जहाँ 50 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। ऐसे में किसी भी नए फीचर का असर सीधे करोड़ों भारतीय यूजर्स पर पड़ सकता है। यही वजह है कि सरकार ने Meta से विस्तृत जवाब मांगते हुए साइबर सुरक्षा, फर्जी पहचान और डिजिटल फ्रॉड से जुड़े जोखिमों पर स्पष्ट जानकारी मांगी है।
फिलहाल इस मामले में आगे का निर्णय Meta के जवाब और सरकार के साथ होने वाली चर्चा पर निर्भर करेगा। अगर सरकार कंपनी के सुरक्षा उपायों से संतुष्ट होती है, तो फीचर को शर्तों के साथ मंजूरी मिल सकती है। वहीं, संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में आईटी नियमों के तहत कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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