प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों के खिलाफ अभियान तेज करते हुए वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से कुल 274 वांछित आरोपियों को भारत वापस लाने का दावा किया है। इनमें आतंकवादी गतिविधियों, गैंगस्टर नेटवर्क, हत्या, दुष्कर्म, नशीले पदार्थों की तस्करी, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में वांछित लोग शामिल हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 4 अगस्त 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, भगोड़ों की वापसी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक और कूटनीतिक प्रयासों को एक साथ इस्तेमाल किया गया। सरकार ने इस रणनीति को ग्लोबल ऑपरेशंस, मजबूत समन्वय और स्मार्ट डिप्लोमेसी के तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित बताया है।
2019 से अब तक 274 भगोड़ों की हुई वापसी
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 में नौ, 2020 में सात, 2021 में 23, 2022 में 40, 2023 में 37, 2024 में 43 और 2025 में 70 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया। वर्ष 2026 में जुलाई तक 45 वांछित अपराधियों की वापसी हो चुकी है।
इस तरह 2019 से जुलाई 2026 तक कुल संख्या 274 तक पहुँच गई। सरकार के मुताबिक, इन लोगों को 36 अलग-अलग देशों से प्रत्यर्पण, निर्वासन या इंटरपोल के माध्यम से समन्वित वापसी की प्रक्रिया के तहत लाया गया है।
किस तरह के मामलों में वांछित थे भगोड़े?
भारत वापस लाए गए 274 लोगों में सबसे अधिक 62 आरोपी हत्या, डकैती और अन्य हिंसक अपराधों में वांछित थे। यौन अपराध, दुष्कर्म और पॉक्सो से जुड़े मामलों में 53 लोगों को वापस लाया गया।
इसके अलावा संगठित अपराध, गैंगस्टर और रंगदारी से जुड़े 42, मानव तस्करी और अपहरण के 18, आतंकवाद एवं नार्को-टेरर से जुड़े 17 और मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में वांछित 16 लोगों को भारत लाया गया।
तस्करी, जाली मुद्रा, साइबर अपराध और प्रतिबंधित वस्तुओं से संबंधित मामलों में 12 तथा धोखाधड़ी एवं वित्तीय अपराधों में नौ आरोपियों को वापस लाया गया। अन्य मामलों के 45 भगोड़े भी इस सूची में शामिल हैं।
वर्षवार भगोड़ों की वापसी
| वर्ष | भारत वापस लाए गए भगोड़े |
|---|---|
| 2019 | 9 |
| 2020 | 7 |
| 2021 | 23 |
| 2022 | 40 |
| 2023 | 37 |
| 2024 | 43 |
| 2025 | 70 |
| 2026, जुलाई तक | 45 |
| कुल | 274 |
‘ऑपरेशन त्रिशूल’ से अपराधियों की लोकेशन ट्रैक
सरकार के अनुसार, विदेशों में नाम और पहचान बदलकर रह रहे भगोड़ों को खोजने के लिए ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत सैटेलाइट इनपुट, निगरानी, डिजिटल फुटप्रिंट और प्रोफाइल मैपिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।
इंटरपोल के सहयोग से भारतीय एजेंसियों ने संदिग्धों की लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद संबंधित देशों को कानूनी दस्तावेज भेजकर गिरफ्तारी, प्रत्यर्पण या डिपोर्टेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
सरकार का कहना है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विदेशी अदालतों की सुनवाई में शामिल होने जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं से भी प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिली।
BHARATPOL से 1,400 से ज्यादा एजेंसियां जुड़ीं
जनवरी 2025 में शुरू किए गए BHARATPOL पोर्टल ने केंद्रीय जांच ब्यूरो, केंद्रीय एजेंसियों, राज्यों के पुलिस मुख्यालयों और जिला पुलिस इकाइयों को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, इस पोर्टल से 1,400 से अधिक केंद्रीय और राज्य इकाइयां जुड़ी हुई हैं। पहले अलग-अलग एजेंसियों से जानकारी मिलने में लंबा समय लगता था, लेकिन अब सामान्य तौर पर 10 से 20 दिन और कुछ मामलों में तीन से 10 दिन के भीतर सूचनाएं साझा की जा रही हैं।
CBI का ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर निभा रहा अहम भूमिका
विदेशों में मौजूद आरोपियों की पहचान और वापसी के लिए CBI ने विशेष ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर स्थापित किया है। CBI भारत में इंटरपोल की नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में काम करती है।
यह सेंटर विदेशी पुलिस एजेंसियों, इंटरपोल, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, NIA, ED और राज्यों की पुलिस के साथ वास्तविक समय में समन्वय करता है। प्रत्येक राज्य और केंद्रीय जांच एजेंसी में इंटरपोल संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति से सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज किया गया है।
रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या में बढ़ोतरी
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 में 40 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए थे। वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर 100, वर्ष 2024 में 107 और 2025 में 112 हो गई।
वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। सरकार का दावा है कि पिछले तीन वर्षों में कुल 401 भगोड़ों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए।
रेड कॉर्नर नोटिस किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करने वाला अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता। इसके माध्यम से इंटरपोल सदस्य देशों से वांछित व्यक्ति की पहचान, लोकेशन और उनके घरेलू कानूनों के तहत संभावित गिरफ्तारी में सहयोग माँगा जाता है।
BNSS में ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ का प्रावधान
केंद्र सरकार ने नए आपराधिक कानूनों में भगोड़े आरोपियों के खिलाफ उनकी गैर-मौजूदगी में भी न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के प्रावधान किए हैं।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 356 घोषित अपराधी के अनुपस्थित रहने पर मुकदमा चलाने से संबंधित है। धारा 355 कुछ परिस्थितियों में आरोपी की अनुपस्थिति में जांच या मुकदमे की कार्यवाही जारी रखने की व्यवस्था प्रदान करती है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश भाग जाने या जानबूझकर अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण आपराधिक मुकदमा अनिश्चितकाल तक लंबित न रहे। गृह मंत्रालय ने भी BNSS की धारा 355 और 356 को भगोड़े अपराधियों से निपटने वाले महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों के रूप में रेखांकित किया है।
₹17,874 करोड़ की संपत्ति अटैच
गृह मंत्रालय के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत वर्ष 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों से संबंधित ₹17,874 करोड़ की संपत्तियां अटैच की गईं।
इसी अवधि में आर्थिक अपराध कर देश से भागे आरोपियों से जुड़ी राशि समेत ₹18,762 करोड़ की संपत्ति या धनराशि की सफल बहाली अथवा वापसी की गई। ये आँकड़े सरकार द्वारा जारी किए गए हैं और इनमें विभिन्न मामलों में बैंकों अथवा अन्य पात्र दावेदारों को लौटाई गई राशि शामिल हो सकती है।
एजेंसियों का ‘Whole-of-Government’ मॉडल
विदेशों में छिपे भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई में इंटेलिजेंस ब्यूरो, CBI, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग, NIA, ED, विदेश मंत्रालय, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, DGGI और राज्यों की पुलिस मिलकर काम कर रही हैं।
सरकार इसे ‘Whole-of-Government’ दृष्टिकोण बताती है, जिसके तहत किसी मामले को केवल एक जांच एजेंसी की जिम्मेदारी न मानकर सुरक्षा, कूटनीति, कानून और वित्तीय जांच से जुड़ी सभी संस्थाएं मिलकर कार्रवाई करती हैं।
जनवरी 2026 में मल्टी एजेंसी सेंटर के अंतर्गत एक स्टैंडिंग फोकस ग्रुप भी बनाया गया। इसका काम महत्वपूर्ण भगोड़ा मामलों को प्राथमिकता देना, प्रत्यर्पण दस्तावेजों को मानकीकृत करना, विदेशी सहयोगियों के साथ फॉलो-अप करना और राज्य एजेंसियों को राष्ट्रीय स्तर पर सहायता देना है।
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