जमीयत हिमायतुल इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के मौलाना कारी अबरार जमाल ने देशभर में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि देश के सभी नागरिकों के लिए समान कानून होना चाहिए, जिससे प्रत्येक व्यक्ति को बराबरी, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार मिल सके।
मौलाना अबरार जमाल ने उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किए जाने का समर्थन करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रदेश में भी इसे जल्द लागू करने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि उनका संगठन शुरुआत से ही यूसीसी का समर्थन करता रहा है और वर्तमान समय में देश को इसकी आवश्यकता है।
मदरसों में रोजगार उन्मुख शिक्षा की जरूरत
मौलाना अबरार जमाल ने कहा कि मदरसों को केवल मजहबी शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक, तकनीकी और रोजगार उन्मुख पाठ्यक्रम भी शामिल किए जाने चाहिए, ताकि वहां पढ़ने वाले छात्र आत्मनिर्भर बन सकें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दे सकें।
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और राष्ट्रवाद का समन्वय देश के युवाओं के लिए बेहद जरूरी है। मदरसा छात्रों को कंप्यूटर, विज्ञान, गणित, भाषा, तकनीकी कौशल और व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने पर उनके लिए रोजगार और उच्च शिक्षा के नए अवसर खुल सकते हैं।
मदरसों को बंद नहीं, आधुनिक बनाया जाए
लेखिका तस्लीमा नसरीन द्वारा मदरसों को बंद किए जाने से संबंधित कथित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना अबरार जमाल ने कहा कि मदरसों को बंद करना समस्या का समाधान नहीं है। इसके बजाय उनमें समय के अनुसार सुधार और आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मदरसों से अमन, मोहब्बत, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रभक्ति का संदेश जाना चाहिए। इससे देश का माहौल सकारात्मक बनेगा और मदरसा शिक्षा से जुड़े छात्रों को मुख्यधारा के अवसरों से जोड़ा जा सकेगा।
मौलाना ने इस धारणा को भी खारिज किया कि मदरसों में आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान के बारे में व्यापक आरोप लगाने के बजाय शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों पर ध्यान देना चाहिए।
हलाला और तीन तलाक पर क्या बोले मौलाना?
मौलाना कारी अबरार जमाल ने कहा कि हलाला और तीन तलाक जैसी प्रथाओं के कारण कई मुस्लिम महिलाओं को अन्याय और असमानता का सामना करना पड़ा है। उनके अनुसार, यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने से महिलाओं को समान कानूनी अधिकार और सुरक्षा प्राप्त हो सकती है।
उन्होंने कहा कि देश का प्रत्येक नागरिक कानून के सामने बराबर होना चाहिए। यूसीसी का उद्देश्य ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करना होना चाहिए, जिसमें धर्म, समुदाय या लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव न हो और सभी नागरिक स्वयं को सुरक्षित तथा सम्मानित महसूस करें।
पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा पर जताई आपत्ति
मौलाना अबरार जमाल ने जंतर-मंतर पर हुए एक छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार के खिलाफ कथित रूप से इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा की निंदा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और मतभेद का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति या उसके परिवार के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है।
मौलाना ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों को माफ करके बड़ा दिल दिखाया। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की लोकतांत्रिक सोच का परिचायक बताया। हालांकि, इस घटना और माफी से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित अधिकारियों या पक्षों से होना बाकी है।
धर्मेंद्र प्रधान के फैसले की प्रशंसा
मौलाना अबरार जमाल ने धर्मेंद्र प्रधान के कथित इस्तीफे की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रहित को प्राथमिकता देकर बड़ा कदम उठाया। उन्होंने लोगों से अपील की कि लोकतंत्र में विरोध करना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान देशहित और कानून-व्यवस्था का ध्यान रखना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे पर सरकार से असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा, अभद्रता या देश को अस्थिर करने वाली गतिविधियों का समर्थन नहीं किया जा सकता।
विदेशी फंडिंग को लेकर लगाए आरोप
मौलाना अबरार जमाल ने आरोप लगाया कि कुछ संगठन विदेशी ताकतों के प्रभाव में देश का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ समूहों को विदेश से आर्थिक मदद मिलती है और उनका उद्देश्य देश में अस्थिरता पैदा करना है।
हालांकि, मौलाना ने अपने बयान में इन संगठनों के नाम या विदेशी फंडिंग से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए। ऐसे आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
यूसीसी को लेकर मौलाना का तर्क
मौलाना अबरार जमाल के अनुसार, यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने से विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और संपत्ति से संबंधित मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था बनाई जा सकती है। उनका कहना है कि इससे विशेष रूप से महिलाओं को समान अधिकार और कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से यूसीसी को लेकर व्यापक संवाद करने तथा सभी समुदायों की आशंकाओं को दूर करते हुए देशभर में समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा में कदम उठाने की मांग की।
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