पश्चिम बंगाल में राजनीतिक नेताओं और उनके परिजनों को कथित रूप से हनीट्रैप में फँसाने तथा उनकी संवेदनशील जानकारियाँ जुटाने वाले संदिग्ध नेटवर्क की जाँच तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF ने इस मामले में आदित्य सिंह नामक 21 वर्षीय युवक को हावड़ा से गिरफ्तार किया है।
जाँच एजेंसियों को संदेह है कि यह नेटवर्क पाकिस्तान से जुड़े हैंडलरों और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध ऑपरेटिव के निर्देश पर काम कर रहा था। हालाँकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जाँच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
हावड़ा से गिरफ्तार हुआ तीसरा संदिग्ध
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बंगाल STF ने आदित्य सिंह को हावड़ा के बेलीलियस रोड इलाके से गिरफ्तार किया। वह बीकॉम का छात्र बताया जा रहा है और इस संदिग्ध मॉड्यूल की जाँच में पकड़ा गया तीसरा व्यक्ति है।
आरोप है कि आदित्य सिंह ने पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री उमेश राय के आवास और वाहन की वीडियो रिकॉर्डिंग की थी। कथित तौर पर उसने ये तस्वीरें और वीडियो संदिग्ध जैश ऑपरेटिव मोहम्मद हमीम मंडल तक पहुँचाए थे।
मंत्री के बेटे के अपहरण की कथित साजिश
जाँच एजेंसियों को आशंका है कि मंत्री के बेटे को एक महिला के जरिए हनीट्रैप में फँसाने की तैयारी की जा रही थी। इसके बाद उसे अगवा कर फिरौती वसूलने या राजनीतिक दबाव बनाने की योजना हो सकती थी।
मीडिया रिपोर्टों में अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि आरोपियों ने प्रभावशाली लोगों, राजनीतिक नेताओं और उनके परिजनों से संपर्क स्थापित करने के लिए महिलाओं तथा सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स का इस्तेमाल करने की कोशिश की।
हालाँकि, कथित अपहरण की योजना कितनी आगे बढ़ी थी और कौन-कौन से लोग निशाने पर थे, इसकी जाँच अभी जारी है।
कई VIP की रेकी करने का संदेह
प्रारंभिक जाँच में आदित्य सिंह के मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों से कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने का दावा किया गया है। STF यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसने किन-किन नेताओं, सरकारी अधिकारियों या संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और वीडियो जुटाए थे।
जाँच एजेंसियाँ आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, सोशल मीडिया प्रोफाइल, चैटिंग ऐप और पाकिस्तान से संचालित बताए जा रहे सोशल मीडिया हैंडल की भी जाँच कर रही हैं।
एजेंसियों को संदेह है कि यह मॉड्यूल पारंपरिक आतंकी हमलों के बजाय जासूसी, हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग, अपहरण और डिजिटल दुष्प्रचार जैसे तरीकों का इस्तेमाल करना चाहता था।
कौन है हमीम मंडल?
मोहम्मद हमीम मंडल को इस कथित नेटवर्क का प्रमुख संदिग्ध बताया जा रहा है। पश्चिम बंगाल STF ने उसे पहले ही हिरासत में लिया था और उससे पूछताछ के दौरान कई डिजिटल तथा व्यक्तिगत संपर्कों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया।
जाँच एजेंसियों को संदेह है कि हमीम मंडल के पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से संपर्क थे और वह जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नेटवर्क के लिए प्रभावशाली लोगों की निजी जानकारियाँ जुटा रहा था।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि संदिग्ध मॉड्यूल मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और एक अन्य मंत्री को निशाना बनाने की योजना बना रहा था। इन दावों की जाँच अभी जारी है और आरोप न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं।
झारखंड से अर्पिता सरकार गिरफ्तार
इस मामले में पश्चिम बंगाल STF ने झारखंड के साहिबगंज जिले से अर्पिता सरकार नामक 22 वर्षीय युवती को भी गिरफ्तार किया था। अर्पिता सोशल मीडिया पर मोटरसाइकिल और यात्रा से जुड़े वीडियो बनाती थी और एक उभरती हुई इंफ्लुएंसर बताई गई है।
जाँच एजेंसियों के अनुसार, अर्पिता कथित तौर पर कई वर्षों से हमीम मंडल के संपर्क में थी। उस पर प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनाने और संदिग्ध हनीट्रैप गतिविधियों में मदद करने का आरोप है।
डिजिटल साक्ष्यों से अर्पिता तक पहुँची STF
अधिकारियों का दावा है कि मोबाइल फोन, ऑनलाइन चैट, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों से मिले डिजिटल सुरागों के आधार पर अर्पिता सरकार की भूमिका सामने आई।
चार पाकिस्तान आधारित सोशल मीडिया हैंडल भी जाँच के दायरे में बताए जा रहे हैं। एजेंसियाँ यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि इन अकाउंट्स के जरिए आरोपियों को क्या निर्देश दिए जाते थे और किन लोगों को निशाना बनाने के लिए कहा गया था।
महिलाओं और इंफ्लुएंसर्स के इस्तेमाल का आरोप
जाँच एजेंसियों को संदेह है कि पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क ऐसे युवाओं और महिलाओं की पहचान करता था, जिन्हें पैसे, प्रसिद्धि या अन्य लाभ का लालच देकर संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के लिए प्रभावशाली लोगों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और प्रमुख स्थानों तक पहुँचना अपेक्षाकृत आसान होता है। वीडियो और रील बनाने के बहाने रिकॉर्ड की गई सामग्री को बाद में विदेशी हैंडलरों तक पहुँचाया जा सकता है।
हालाँकि, इस नेटवर्क से जुड़े सभी व्यक्तियों और उसकी व्यापकता की आधिकारिक पुष्टि विस्तृत जाँच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
ISI और जैश कनेक्शन की जाँच
STF कथित मॉड्यूल के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI तथा आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से संभावित संबंधों की जाँच कर रही है। आरोपियों के पास से मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजे जाने की संभावना है।
जाँच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपियों को विदेश से धन, निर्देश या तकनीकी सहायता मिली थी या नहीं। साथ ही, यह भी जाँचा जा रहा है कि इस नेटवर्क में अन्य राज्यों के लोग शामिल थे या नहीं।
आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध नहीं
आदित्य सिंह, अर्पिता सरकार और हमीम मंडल के खिलाफ लगाए गए आरोप जाँच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। आरोपियों को कानून के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार है और न्यायालय का अंतिम फैसला आने तक उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता।
मामले में पुलिस की चार्जशीट, फॉरेंसिक जाँच और न्यायिक कार्यवाही के बाद ही कथित आतंकी नेटवर्क, हनीट्रैप योजना और विदेशी संपर्कों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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