उत्तर प्रदेश की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। संशोधन की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश का मदरसा शिक्षा बोर्ड कामिल और फाजिल जैसी उच्च शिक्षा की डिग्रियां जारी नहीं कर सकेगा।
सरकार ने यह फैसला नवंबर 2024 में आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुपालन में लिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम की अधिकांश संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, लेकिन कामिल और फाजिल जैसी उच्च शिक्षा की डिग्रियों को नियंत्रित करने वाले प्रावधानों को असंवैधानिक माना था। अदालत ने कहा था कि उच्च शिक्षा की डिग्री देने का अधिकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम यानी UGC Act के दायरे में आता है।
क्या हैं कामिल और फाजिल पाठ्यक्रम?
कामिल मदरसा शिक्षा व्यवस्था का उच्च स्तरीय पाठ्यक्रम है, जिसमें मुख्य रूप से अरबी, फारसी, इस्लामिक अध्ययन और धार्मिक विषयों की पढ़ाई कराई जाती रही है। इसे सामान्य तौर पर स्नातक यानी ग्रेजुएशन स्तर के समकक्ष माना जाता था।
फाजिल, कामिल के बाद किया जाने वाला उन्नत पाठ्यक्रम है। इसे मदरसा बोर्ड की व्यवस्था में स्नातकोत्तर यानी पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर के समकक्ष माना जाता था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य का मदरसा बोर्ड किसी विश्वविद्यालय की तरह औपचारिक उच्च शिक्षा की डिग्री नहीं दे सकता। अदालत के अनुसार, केवल UGC अधिनियम के तहत अधिकृत और मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय ही वैध स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्रियां जारी कर सकते हैं।
मदरसों में अब किस स्तर तक होगी पढ़ाई?
संशोधन लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की भूमिका स्कूली शिक्षा के स्तर तक सीमित हो जाएगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मदरसे अब बोर्ड के माध्यम से बारहवीं कक्षा या आलिम स्तर तक की शिक्षा दे सकेंगे, लेकिन कामिल और फाजिल को औपचारिक उच्च शिक्षा की डिग्री के रूप में जारी नहीं किया जा सकेगा।
इस बदलाव का अर्थ यह नहीं है कि अरबी, फारसी या इस्लामिक स्टडीज की उच्च शिक्षा पूरी तरह बंद हो जाएगी। ऐसे पाठ्यक्रम किसी UGC-मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय अथवा अधिकृत उच्च शिक्षण संस्थान के माध्यम से संचालित किए जा सकते हैं। यह निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC अधिनियम के तहत विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र पर दिए गए निर्णय से निकलता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
5 नवंबर 2024 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें पूरे उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004 को असंवैधानिक करार दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मदरसा कानून का उद्देश्य मदरसा शिक्षा को नियमित करना, पाठ्यक्रम के मानक निर्धारित करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। अदालत ने यह भी कहा कि केवल धार्मिक शिक्षा से जुड़े होने के आधार पर पूरे कानून को धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ नहीं माना जा सकता।
हालांकि, अदालत ने कामिल और फाजिल से संबंधित उन प्रावधानों को निरस्त कर दिया था, जिनके तहत मदरसा बोर्ड स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की डिग्रियां जारी करता था। अदालत के अनुसार, ऐसे प्रावधान UGC Act, 1956 से टकराते हैं और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य विधानमंडल के अधिकार से बाहर हैं।
मौजूदा विद्यार्थियों पर क्या होगा प्रभाव?
सरकार के संशोधन का सबसे बड़ा प्रभाव उन विद्यार्थियों पर पड़ सकता है, जो कामिल या फाजिल पाठ्यक्रम में पढ़ाई कर रहे हैं अथवा भविष्य में इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना चाहते थे।
फिलहाल विद्यार्थियों के समायोजन, पुराने प्रमाणपत्रों की स्थिति, वैकल्पिक विश्वविद्यालय व्यवस्था और पहले से नामांकित छात्रों के लिए संक्रमणकालीन नियमों की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। संशोधन की वैधानिक प्रक्रिया और संबंधित नियम जारी होने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर मदरसा शिक्षकों और संगठनों ने चिंता जताई थी। मार्च 2025 की एक रिपोर्ट में लगभग 37,000 कामिल-फाजिल विद्यार्थियों के प्रभावित होने की बात कही गई थी।
शिक्षा संस्थानों पर यूपी सरकार की सख्ती
उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी बोर्ड ने हाल के महीनों में गैर-कार्यशील तथा नियमों का पालन नहीं करने वाले शिक्षण संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। जून 2026 में यूपी बोर्ड ने राज्य के 465 स्ववित्तपोषित स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी थी। इन स्कूलों में दो लगातार शैक्षणिक सत्रों के दौरान न तो नियमित कक्षाएं आयोजित की गई थीं और न ही कोई विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुआ था।
कामिल और फाजिल से संबंधित नया संशोधन भी शिक्षा व्यवस्था को कानूनी एवं नियामक ढांचे के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब अधिनियम में संशोधन की आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद संशोधित नियम लागू होंगे और मदरसा शिक्षा बोर्ड की ओर से कामिल तथा फाजिल की डिग्रियां जारी करने की व्यवस्था औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगी।
सरकार को अब यह भी स्पष्ट करना होगा कि वर्तमान विद्यार्थियों को किन विश्वविद्यालयों या शिक्षण संस्थानों से जोड़ा जाएगा और पुराने कामिल-फाजिल प्रमाणपत्रों का शैक्षणिक तथा रोजगार संबंधी मामलों में क्या दर्जा रहेगा।
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