भारत सरकार द्वारा संसद में लाए जा रहे फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 (FCRA Amendment Bill 2026) को लेकर देश और विदेश में चल रही चर्चाओं के बीच अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट कर तमाम गलतफहमियों को दूर किया है। राजदूत ने स्पष्ट किया कि इस बिल का उद्देश्य विदेशी फंड के मैनेजमेंट को पारदर्शी बनाना है, लेकिन इसे लेकर कई तरह के भ्रम फैलाए जा रहे हैं।
1. क्या भारत दुनिया से अलग कोई नया कानून ला रहा है?
अफवाह: यह प्रचारित किया जा रहा है कि भारत अन्य लोकतांत्रिक देशों से हटकर ऐसा सख्त कानून ला रहा है।
हकीकत: राजदूत क्वात्रा ने बताया कि दुनिया के कई प्रमुख देशों में इससे भी सख्त कानून पहले से लागू हैं। अमेरिका में 1938 से FARA और 2010 से FATCA प्रभावी है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में, कनाडा ने 2024 में और यूनाइटेड किंगडम (UK) ने जुलाई 2025 में ऐसा कानून लागू किया है। यूरोपीय यूनियन (EU) भी इस दिशा में कानून बना रहा है।
Myth: FCRA has adversely impacted the working of NGOs and charitable organization and the new amendment would further restrict their ability to operate in India.
Truth: In reality, foreign money inflows into India have been rising, not falling. Foreign contributions to…
— Amb Vinay Mohan Kwatra (@AmbVMKwatra) August 10, 2026
2. क्या यह कानून किसी विशेष धर्म या समुदाय को टारगेट करता है?
अफवाह: कुछ ईसाई संगठनों और विदेशी राजनेताओं द्वारा यह दावा किया गया कि यह बिल अल्पसंख्यकों, विशेषकर चर्चों और धार्मिक चैरिटी को निशाना बनाने के लिए है।
हकीकत: विनय मोहन क्वात्रा ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह एक्ट धर्म, समुदाय या विचारधारा से ऊपर उठकर सभी संगठनों पर एक समान रूप से लागू होता है। हर धर्म के संगठनों द्वारा किए जाने वाले चैरिटेबल काम, धार्मिक शिक्षा और पूजा स्थलों का रखरखाव पहले की तरह विदेशी फंडिंग के लिए पूरी तरह योग्य (Eligible) बने रहेंगे।
3. क्या एनजीओ की संपत्तियां और पूजा स्थल जब्त किए जा रहे हैं?
अफवाह: यह डर फैलाया गया कि सरकार इस कानून के जरिए एनजीओ, अस्पतालों, स्कूलों और पूजा स्थलों की संपत्तियों को जब्त करना चाहती है।
हकीकत: राजदूत ने स्पष्ट किया कि जब किसी संगठन का रजिस्ट्रेशन रद्द या सरेंडर होता है, तो उससे जुड़े एसेट्स को राज्य सरकार के अधीन रखने का नियम साल 2010 से ही लागू है, यह नया नहीं है।
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2026 का नया बिल इसके लिए सिर्फ एक ‘डेजिग्नेटेड अथॉरिटी’ (Designated Authority) तय करता है ताकि संपत्तियों की सुरक्षा हो सके।
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यदि वह संगठन अपना रजिस्ट्रेशन दोबारा बहाल करवा लेता है, तो उसकी सारी संपत्तियां और इस्तेमाल न हुआ फंड पूरी तरह वापस लौटा दिया जाता है।
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पूजा स्थलों की संपत्तियों के लिए विशेष सुरक्षा है; यदि कोई एसोसिएशन रद्द होती है, तो पूजा की निरंतरता बनाए रखने के लिए वह प्रॉपर्टी उसी धर्म के दूसरे FCRA-रजिस्टर्ड संगठन को सौंप दी जाती है।
4. क्या एनजीओ और चैरिटेबल कार्यों पर बुरा असर पड़ा है?
अफवाह: यह कहा जा रहा है कि इस संशोधन से भारत में एनजीओ का काम करना असंभव हो जाएगा और विदेशी मदद पूरी तरह बंद हो जाएगी।
हकीकत: आंकड़ों के मुताबिक भारत में विदेशी फंडिंग घटी नहीं बल्कि बढ़ी है। रजिस्टर्ड संगठनों को 2010-11 में जहां 1.2 बिलियन डॉलर का विदेशी फंड मिला था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 2.67 बिलियन डॉलर हो गया। भारत में 3 मिलियन (30 लाख) से ज्यादा एनजीओ हैं, जिनमें से केवल 14,450 के पास FCRA रजिस्ट्रेशन है। यानी अधिकांश सिविल सोसायटी संगठन इस एक्ट के दायरे से बाहर रहकर स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं।
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