वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ ने एक बार फिर भारत विरोधी और भ्रामक एजेंडे को हवा देते हुए ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल (AICC) के अध्यक्ष और गुड शेफर्ड चर्च ऑफ इंडिया के प्राइमेट आर्कबिशप जोसेफ डिसूजा का एक पुराना इंटरव्यू शेयर किया है। इस क्लिप के जरिए फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन अमेंडमेंट बिल, 2026 (FCRA Bill 2026) को लेकर मोदी सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की सच्चाई और जोसेफ डिसूजा के काले कारनामों का सच।
क्या है पूरा मामला?
करण थापर के पॉडकास्ट में दिए गए इस पुराने इंटरव्यू में जोसेफ डिसूजा ने दावा किया था कि नया FCRA बिल ईसाई संस्थानों की संपत्तियों पर कब्जा करने और उन्हें लूटने का एक षड्यंत्र है। डिसूजा ने इस बिल की तुलना नाजी जर्मनी के यहूदी विरोधी कानूनों से करते हुए भारत सरकार और आरएसएस (RSS) पर गंभीर व निराधार आरोप लगाए।
लेकिन सवाल यह उठता है कि जिस व्यक्ति के बयानों को ‘द वायर’ आधार बना रहा है, उसकी अपनी साख क्या है?
FCRA Amendment Bill is "loot and theft of Christian institutions – a Sangh Parivar agenda": Archbishop Joseph Dsouza, President, All India Christian Council, to @kthaparoffice for The Wire.#Replug | #TheInterview pic.twitter.com/otlYmHkxOi
— The Wire (@thewire_in) August 7, 2026
कौन है आर्कबिशप जोसेफ डिसूजा?
जोसेफ डिसूजा को मीडिया में दलितों और हाशिए के लोगों की आवाज के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। डिसूजा और उसके संगठनों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं:
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296.6 करोड़ रुपए का घोटाला: तेलंगाना CID और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच के अनुसार, जोसेफ डिसूजा और उसके बेटे जोश लॉरेंस डिसूजा पर गरीब दलित बच्चों की मुफ्त शिक्षा के नाम पर जुटाए गए लगभग 296.6 करोड़ रुपए के विदेशी फंड को फर्जी बिलों और शेल कंपनियों के जरिए निजी खातों और रियल एस्टेट में डायवर्ट करने का गंभीर आरोप है।
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फर्जी बिलों का खेल: FCRA लाइसेंस रद्द होने के बाद डिसूजा ने अपनी व्यावसायिक इकाई ‘ओम बुक्स फाउंडेशन’ (OMBF) का इस्तेमाल कर प्रिंटिंग और पब्लिशिंग के फर्जी बिलों के जरिए अवैध रूप से विदेशी फंड भारत में मंगवाए।
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ED की कार्रवाई: PMLA के तहत कार्रवाई करते हुए ED ने जोसेफ डिसूजा और उसके सहयोगियों की 15 करोड़ रुपए से अधिक की 12 प्रमुख अचल संपत्तियों (लग्जरी विला और कमर्शियल प्रॉपर्टी) को अटैच किया है।
FCRA बिल 2026 की वास्तविकता और सुरक्षा उपाय
द वायर और अन्य निहित स्वार्थ वाले समूह इस बिल को लेकर जो डर फैला रहे हैं, वह पूरी तरह निराधार है। प्रस्तावित कानून में स्पष्ट सुरक्षा उपाय दिए गए हैं:
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पूजा स्थलों की पूरी सुरक्षा: बिल के प्रावधानों के अनुसार, नामित प्राधिकरण (डेजिग्नेटिड अथॉरिटी) किसी भी चर्च या पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को नहीं बदल सकता। पूजा स्थल का प्रबंधन ऐसे लोगों को सौंपा जाएगा जिससे उसका धार्मिक स्वरूप बरकरार रहे।
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न्यायिक समीक्षा का अधिकार: डेजिग्नेटिड अथॉरिटी द्वारा लिया गया कोई भी फैसला अंतिम नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक समीक्षा और जिला न्यायाधीश के समक्ष न्यायिक अपील के अधीन है।
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धार्मिक गतिविधियों पर रोक नहीं: यह बिल किसी भी धर्म के वास्तविक धार्मिक कार्यों या वैध विदेशी दान पर रोक नहीं लगाता। यह केवल संदिग्ध और अवैध फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और नियमों के उल्लंघन पर शिकंजा कसता है।
राजनीतिक और वैचारिक साठगाँठ
जोसेफ डिसूजा के संबंध भारत के लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम और कांग्रेस पार्टी के साथ पुराने रहे हैं। साल 2004 में यूपीए के सत्ता में आने पर डिसूजा ने इसे ‘दैवीय न्याय’ बताया था। जब भी ऐसे लोगों पर कानूनी शिकंजा कसता है, तो एक खास राजनीतिक और मीडिया वर्ग इसे ‘धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमला’ करार देने का कुचक्र रचता है।
द वायर द्वारा इस दागी और घोटाले के आरोपी पादरी के बयानों को बार-बार आगे बढ़ाना केवल मोदी सरकार को बदनाम करने और देश विरोधी नैरेटिव सेट करने का एक सुनियोजित प्रयास है।
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