राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 11 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ यह संशोधन अब कानून बन गया है और भारत के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक सुरक्षा मिल गई है। संसद ने जुलाई के अंत में इस विधेयक को पारित किया था।
इस कानून का उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या इसके प्रति अपमानजनक व्यवहार को दंडनीय बनाना है। यह संशोधन Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में बदलाव करता है, जिसके तहत अब तक राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान से जुड़े अपमान के मामलों में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान था। नए संशोधन के बाद राष्ट्रगीत को भी इसी कानूनी ढांचे में शामिल कर दिया गया है।
‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालने पर 3 साल तक की सजा
नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालता है या राष्ट्रगीत का जानबूझकर अपमान करता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे अपराध में तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। संसद में विधेयक पर चर्चा के दौरान भी सरकार ने स्पष्ट किया था कि प्रस्तावित दंड राष्ट्रगान से संबंधित मौजूदा दंडात्मक प्रावधानों के अनुरूप रखा गया है।
इससे पहले 1971 के कानून में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को विशेष वैधानिक सुरक्षा प्राप्त थी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ‘वंदे मातरम’ भी राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े दंडात्मक प्रावधानों के दायरे में आ गया है।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है ‘वंदे मातरम’ का ऐतिहासिक महत्व
‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीकों में से एक रहा है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान यह गीत देशभक्ति तथा ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख स्वर बन गया।
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और प्रतिष्ठा दी जानी चाहिए। इसी ऐतिहासिक संदर्भ को नए कानूनी ढांचे से जोड़ते हुए सरकार ने राष्ट्रगीत को वैधानिक सुरक्षा प्रदान की है।
‘वंदे मातरम’ का आधिकारिक संस्करण 3 मिनट 10 सेकंड का
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी राष्ट्रीय गीत संबंधी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार ‘वंदे मातरम’ के आधिकारिक संस्करण की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है। मंत्रालय ने विभिन्न सरकारी और औपचारिक अवसरों पर राष्ट्रगीत के गायन तथा वादन के लिए विस्तृत प्रोटोकॉल तय किया है।
दिशा-निर्देशों के मुताबिक सिविल इन्वेस्टिचर समारोहों, राष्ट्रपति के औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों में आगमन और प्रस्थान, राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद, राज्यपाल या उपराज्यपाल के औपचारिक कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय ध्वज को परेड में लाए जाने जैसे अवसरों पर राष्ट्रगीत का आधिकारिक संस्करण बजाया जा सकता है।
राष्ट्रगीत बजने पर सावधान की मुद्रा में खड़ा होना होगा
गृह मंत्रालय के प्रोटोकॉल में कहा गया है कि जब ‘वंदे मातरम’ का आधिकारिक संस्करण बजाया या गाया जाए, तब उपस्थित लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना चाहिए। हालांकि यदि किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जा रहा हो तो दर्शकों के खड़े होने की अपेक्षा नहीं की गई है, क्योंकि इससे फिल्म के प्रदर्शन में व्यवधान पैदा हो सकता है।
दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों गाए या बजाए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा।
स्कूलों के लिए भी जारी हुए दिशा-निर्देश
गृह मंत्रालय के आदेश में स्कूलों को लेकर भी विशेष व्यवस्था बताई गई है। इसके अनुसार स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से की जा सकती है। साथ ही स्कूल प्रशासन को विद्यार्थियों में राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना बढ़ाने के लिए अपने कार्यक्रमों में उपयुक्त व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि आधिकारिक गृह मंत्रालय के दस्तावेज में स्कूलों के लिए शब्द “may begin” इस्तेमाल किया गया है, यानी इसे हर स्कूल के लिए अनिवार्य दैनिक आदेश के रूप में नहीं लिखा गया है।
15 अगस्त को लाल किले से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम’
स्वतंत्रता दिवस 2026 का समारोह भी इस बार ऐतिहासिक होने वाला है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार 15 अगस्त 2026 को पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने को भी विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा।
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन पर राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे। ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर समारोह स्थल पर विशेष सजावट और युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिलेगी।
संसद में विधेयक को लेकर हुई थी राजनीतिक बहस
हालांकि विधेयक के पारित होने के दौरान संसद में इस पर राजनीतिक मतभेद भी सामने आए थे। सरकार और भाजपा सांसदों ने इसे राष्ट्रीय गौरव और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को सम्मान देने वाला कदम बताया, जबकि कुछ विपक्षी सांसदों ने पूर्ण राष्ट्रगीत को सरकारी कार्यक्रमों में प्रस्तुत करने की व्यावहारिकता और इसके कानूनी प्रभावों पर सवाल उठाए थे।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब यह बहस विधायी प्रक्रिया से आगे बढ़ चुकी है और ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून के तहत औपचारिक वैधानिक सुरक्षा प्राप्त हो गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता संग्राम में उसकी भूमिका को कानूनी मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है।
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