दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार बम धमाके को लेकर बड़ा अंतरराष्ट्रीय खुलासा सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 38वीं Analytical Support and Sanctions Monitoring Team रिपोर्ट में इस हमले के लिए अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) को जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट में AQIS के तेजी से क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क के रूप में उभरने और बांग्लादेश में भी अपने सेल स्थापित करने की कोशिशों पर चिंता जताई गई है।
बिखरे समूह से क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क बना AQIS
रिपोर्ट के मुताबिक, AQIS ने पारंपरिक बड़े आतंकी ढांचे के बजाय छोटे और विकेंद्रीकृत सेल्स पर जोर दिया है। संगठन ने लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क विकसित किए हैं और दक्षिण एशिया में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में काम किया है। UN से जुड़ी रिपोर्ट में खास तौर पर बांग्लादेश में AQIS के संभावित नेटवर्क विस्तार को लेकर चिंता जताई गई है।
भारत के गृह मंत्रालय की प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सूची में अल-कायदा और उससे जुड़े संगठन शामिल हैं।
10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुआ था धमाका
दिल्ली में लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 की शाम एक कार में शक्तिशाली विस्फोट हुआ था। केंद्र सरकार ने बाद में इस घटना को आतंकी वारदात बताया था और मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई।
मामले में मृतकों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों और बाद की जांच संबंधी दस्तावेजों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए थे। मई 2026 में सामने आई NIA चार्जशीट से जुड़ी रिपोर्टों में 11 लोगों की मौत का उल्लेख किया गया।
NIA ने दाखिल की 7,500 पेज की चार्जशीट
NIA ने 14 मई 2026 को लाल किला क्षेत्र कार बम विस्फोट मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसकी पुष्टि की गई है।
जांच में आरोपियों के कथित तौर पर AQIS से जुड़े आतंकी नेटवर्क और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से संबंधों की पड़ताल की गई। रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसी ने मॉड्यूल में तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच की।
‘टेरर इंजीनियरिंग’ के लिए AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का आरोप
चार्जशीट से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने पाया कि संदिग्धों ने विस्फोटक उपकरण और रॉकेट आधारित IED तैयार करने के लिए तकनीकी जानकारी जुटाने की कोशिश की थी। आरोप है कि इस प्रक्रिया में इंटरनेट वीडियो प्लेटफॉर्म और जनरेटिव AI टूल्स का इस्तेमाल जानकारी खोजने के लिए किया गया।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि मॉड्यूल ने रॉकेट आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस तैयार करने और उनकी टेस्टिंग की योजना बनाई थी। ये NIA चार्जशीट में लगाए गए आरोप हैं और अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं हैं।
काजीगुंड के जंगल में टेस्टिंग का दावा
जांच एजेंसी की चार्जशीट से जुड़ी जानकारी में दावा किया गया कि आरोपियों ने जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग क्षेत्र के काजीगुंड जंगल में कथित तौर पर रॉकेट IED का परीक्षण भी किया था।
आरोप है कि विस्फोटक तैयार करने के लिए विभिन्न रसायनों और सामग्री की व्यवस्था की गई और कुछ आरोपियों को तकनीकी तथा सामग्री उपलब्ध कराने की अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी कनेक्शन की भी जांच
मामले की जांच के दौरान हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ लोगों के नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने उस कड़ी को भी खंगाला।
चार्जशीट से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, आरोपी जासिर बिलाल वानी के 2024-25 के दौरान फरीदाबाद जाने और वहां कुछ समय रहने की बात जांच में सामने आई। कई डॉक्टरों की कथित भूमिका की भी जांच की गई।
इन सभी व्यक्तियों के खिलाफ विवरण जांच एजेंसी के आरोपों पर आधारित हैं और अदालत में दोष सिद्ध होना बाकी है।
UN रिपोर्ट से जांच को मिला अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
UNSC से जुड़ी नई रिपोर्ट में AQIS का नाम सामने आने के बाद लाल किला आतंकी हमले की जांच को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संदर्भ मिला है। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब NIA पहले ही इस मामले में विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और आगे की कार्रवाई जारी है।
AQIS के छोटे-छोटे विकेंद्रीकृत सेल्स, तकनीकी साधनों के कथित इस्तेमाल और दक्षिण एशिया में नेटवर्क विस्तार की कोशिशों ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती खड़ी की है। UN की रिपोर्ट में बांग्लादेश में संभावित सेल स्थापित करने की कोशिशों का जिक्र इस खतरे के क्षेत्रीय स्वरूप की ओर संकेत करता है।
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