भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच संसद भवन में उस समय ऐतिहासिक और भावपूर्ण माहौल देखने को मिला, जब लोकसभा में पहली बार पूरे ‘वंदे मातरम्’ के स्वर गूंजे। राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से पूरा सदन देशभक्ति और राष्ट्रभावना से ओतप्रोत नजर आया।
संसद भवन में गूंजते ‘वंदे मातरम्’ के स्वरों ने इस अवसर को विशेष बना दिया। सदन में मौजूद सांसदों ने राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इस ऐतिहासिक क्षण में भाग लिया। पूरे सदन में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता का वातावरण दिखाई दिया।
‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत रहा है। आजादी की लड़ाई के दौरान इस उद्घोष ने लाखों भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाई और स्वतंत्रता सेनानियों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित किया। ऐसे में संसद के भीतर पूरे ‘वंदे मातरम्’ का गूंजना ऐतिहासिक महत्व रखने वाला क्षण माना जा रहा है।
यह अवसर भारतीय लोकतंत्र, राष्ट्रीय गौरव और देश की सांस्कृतिक विरासत के संगम के रूप में भी देखा जा रहा है। संसद भवन में राष्ट्रगीत के स्वर गूंजने के साथ ही यह संदेश भी सामने आया कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं में देश की स्वतंत्रता, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता से जुड़े प्रतीकों का विशेष स्थान है।
सदन में ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक स्वर पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति से भरते नजर आए। यह दृश्य भारत के संसदीय इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज होने वाला क्षण बना।
वंदे मातरम्!
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