पाकिस्तान के भारी-भरकम सैन्य और खुफिया खर्च की पारदर्शिता को लेकर अमेरिका ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी 2025 Fiscal Transparency Report में कहा है कि पाकिस्तान के सैन्य और खुफिया बजट पर पर्याप्त संसदीय या नागरिक सार्वजनिक निगरानी नहीं है। रिपोर्ट में इस्लामाबाद से रक्षा और इंटेलिजेंस एजेंसियों के बजट को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए कहा गया है।
अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने पारित बजट और वित्त वर्ष के अंत की रिपोर्ट आम लोगों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराई है। हालांकि, रिपोर्ट ने सैन्य और खुफिया एजेंसियों के बजट पर पर्याप्त संसदीय या नागरिक निगरानी नहीं होने को प्रमुख कमी बताया है। अमेरिका ने सुझाव दिया है कि इन संवेदनशील बजटों को संसद की समीक्षा एवं मंजूरी या प्रभावी नागरिक सार्वजनिक निगरानी के दायरे में लाया जाना चाहिए।
बजट प्रस्ताव में देरी पर भी अमेरिका ने उठाए सवाल
रिपोर्ट में पाकिस्तान के Executive Budget Proposal को उचित समय के भीतर सार्वजनिक न करने पर भी सवाल उठाए गए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के आकलन के अनुसार, बजट प्रस्ताव समय रहते सार्वजनिक नहीं होने से सांसदों, विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी के पास सरकारी खर्च की समीक्षा और उस पर सार्थक बहस के लिए कम समय बचता है।
इसके अलावा पाकिस्तान की सरकारी कर्ज देनदारियों की जानकारी को लेकर भी रिपोर्ट में कमी बताई गई। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि सरकार ने कर्ज संबंधी दायित्वों के बारे में केवल सीमित जानकारी सार्वजनिक की है, जिसमें प्रमुख सरकारी कंपनियों यानी State-Owned Enterprises से संबंधित देनदारियां भी शामिल हैं।
अमेरिका ने पाकिस्तान को दिए तीन बड़े सुझाव
अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान में वित्तीय पारदर्शिता बेहतर करने के लिए मुख्य रूप से तीन कदम सुझाए हैं—एग्जीक्यूटिव बजट प्रस्ताव समय पर सार्वजनिक करना, सरकारी कर्ज और सरकारी कंपनियों की देनदारियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना और सैन्य तथा खुफिया एजेंसियों के बजट को संसदीय या नागरिक सार्वजनिक निगरानी के दायरे में लाना।
हालांकि रिपोर्ट ने पाकिस्तान के वित्तीय सिस्टम के कुछ सकारात्मक पहलुओं को भी स्वीकार किया है। इसमें कहा गया कि पाकिस्तान का पारित बजट और साल के अंत की वित्तीय रिपोर्ट आम जनता के लिए आसानी से उपलब्ध थीं और देश की सर्वोच्च ऑडिट संस्था अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्रता मानकों के अनुरूप पाई गई।
पाकिस्तान का रक्षा बजट 3 ट्रिलियन रुपये
अमेरिकी रिपोर्ट में उठाए गए पारदर्शिता के सवाल ऐसे समय महत्वपूर्ण हो जाते हैं जब पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा सेवाओं पर 3 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार Dawn के अनुसार, यह पिछले वित्त वर्ष के शुरुआती रक्षा आवंटन 2.55 ट्रिलियन रुपये से करीब 17.65 प्रतिशत अधिक है।
पाकिस्तान के प्रस्तावित 3 ट्रिलियन रुपये के रक्षा बजट की हिस्सेदारी देश की अनुमानित 143.6 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये की GDP का लगभग 2.08 प्रतिशत है। वहीं, पाकिस्तान के कुल 18.77 ट्रिलियन रुपये के संघीय खर्च का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा अकेले रक्षा सेवाओं के लिए प्रस्तावित है।
Dawn के अनुसार, रक्षा बजट में वेतन और भत्तों के लिए करीब 967.55 अरब रुपये रखे गए हैं, जबकि सैन्य पेंशन के लिए 822 अरब रुपये का प्रावधान अलग से किया गया है।
सेना और खुफिया खर्च की जवाबदेही पर फोकस
अमेरिकी विदेश विभाग की चिंता मुख्य रूप से पाकिस्तान में संवेदनशील सरकारी खर्च पर संस्थागत निगरानी को लेकर है। रिपोर्ट सीधे यह नहीं कहती कि पाकिस्तान के पूरे सैन्य खर्च का “कोई हिसाब नहीं” है; बल्कि उसका निष्कर्ष यह है कि मिलिट्री और इंटेलिजेंस बजट पर्याप्त संसदीय या नागरिक सार्वजनिक निगरानी के अधीन नहीं हैं। इसलिए खबर में इसे “पैसे कहां गए, कोई हिसाब नहीं” कहने के बजाय “अमेरिका ने सैन्य-खुफिया बजट पर पर्याप्त निगरानी न होने पर सवाल उठाए” लिखना अधिक तथ्यात्मक होगा।
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