तेलंगाना-छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर स्थित करेगुट्टा, जो कभी माओवादी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था, अब शांति, विकास और पर्यटन की नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) सी.वी. आनंद ने इलाके का दौरा कर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और शांति के प्रतीक के रूप में सफेद कबूतर छोड़े।
तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक सी.वी. आनंद ने सोमवार को तेलंगाना-छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे दूर-दराज के वन क्षेत्र करेगुट्टा का दौरा किया। कभी वामपंथी उग्रवाद और माओवादी गतिविधियों के लिए चर्चित इस इलाके में डीजीपी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने को प्रशासन ने बदलते हालात का प्रतीक बताया।
दौरे के दौरान डीजीपी आनंद ने इलाके में चल रहे सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने शांति का संदेश देते हुए सफेद कबूतर भी छोड़े। पुलिस, सीआरपीएफ, वन विभाग, राजस्व विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी इस संयुक्त दौरे में शामिल रहे।
50 साल बाद विकास पर फोकस
अधिकारियों के अनुसार, दशकों तक माओवादी प्रभाव से जूझने वाला करेगुट्टा अब अपेक्षाकृत शांत है। सरकार का लक्ष्य अब क्षेत्र को पर्यटन, सड़क संपर्क, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के माध्यम से विकसित करना है।
डीजीपी सी.वी. आनंद ने कहा कि सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई से क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को काफी हद तक कमजोर किया गया है। इसमें तेलंगाना पुलिस, ग्रेहाउंड्स, स्पेशल पुलिस फोर्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), कोबरा यूनिट और छत्तीसगढ़ पुलिस के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
‘ऑपरेशन कगार’ के बाद कमजोर हुआ माओवादी नेटवर्क
डीजीपी आनंद के मुताबिक, ‘ऑपरेशन कगार’ के दौरान करीब 700 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। कई वरिष्ठ माओवादी नेता मुठभेड़ों में मारे गए, जबकि अन्य ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की।
उन्होंने कहा कि देशभर में माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति के अब सीमित संख्या में ही सक्रिय नेता बचे हैं। प्रशासन का ध्यान अब सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में विकास पहुंचाने पर है।
सरेंडर करने वाले माओवादियों के पुनर्वास पर जोर
तेलंगाना सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए पुनर्वास योजनाओं पर काम कर रही है। इसके तहत आर्थिक सहायता, जमीन का आवंटन और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने जैसे कदम शामिल हैं।
पुलिस और प्रशासन की ओर से ऐसे लोगों की लगातार निगरानी और सहायता भी की जा रही है, ताकि उनका सामाजिक पुनर्वास सुचारु रूप से हो सके और वे दोबारा हिंसक गतिविधियों की ओर न लौटें।
करेगुट्टा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना
डीजीपी आनंद ने कहा कि प्राकृतिक सुंदरता और भौगोलिक विशेषताओं के कारण करेगुट्टा में पर्यटन की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार पर्यावरण और कानूनी नियमों का पालन करते हुए इलाके में पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं विकसित करना चाहती है।
पामुरु से चलामादावा तक सड़क निर्माण का एक चरण पूरा हो चुका है और आगे बिटुमिनस (BT) सड़क विकसित करने की तैयारी है। बेहतर सड़क संपर्क से न सिर्फ स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि पर्यटन और सरकारी सेवाओं की पहुंच भी बढ़ेगी।
सरकार की योजना इलाके में बिजली, मोबाइल नेटवर्क और दूसरी जरूरी आधारभूत सुविधाओं को भी मजबूत करने की है।
गुट्टी कोया परिवारों को बांटा जरूरी सामान
दौरे के दौरान डीजीपी सी.वी. आनंद ने पामुरु कैंप के आसपास रहने वाले गुट्टी कोया परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिवारों को जरूरी सामान वितरित किया और भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी आवश्यकताओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर लगातार सहयोग करती रहेगी।
CRPF के योगदान की सराहना
डीजीपी आनंद ने माओवादी-विरोधी अभियानों में सीआरपीएफ की भूमिका की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान दशकों से राज्य पुलिस बलों के साथ कठिन और संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से CRPF की 196 बटालियन के जवानों की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि जवान महीनों तक परिवारों से दूर रहकर दुर्गम इलाकों में तैनात रहते हैं। क्षेत्र में शांति बहाल करने में उनकी प्रतिबद्धता, अनुशासन और पेशेवर क्षमता की अहम भूमिका रही है।
इस दौरे में अतिरिक्त डीजीपी संजय जैन, आईजी चंद्र शेखर रेड्डी, इंटेलिजेंस आईजी कार्तिकेय, एसआईबी एसपी सिंधु शर्मा, मुलुगु कलेक्टर बोरकडे हेमंत सहदेवराव, मुलुगु एसपी सुधीर रामनाथ केकन, जिला वन अधिकारी विकास मीना, सीआरपीएफ अधिकारी तथा राजस्व, पर्यटन और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
करेगुट्टा में राष्ट्रीय ध्वज फहराने और विकास योजनाओं की समीक्षा को प्रशासन उस बदलाव के संकेत के रूप में देख रहा है, जिसमें कभी माओवादी प्रभाव वाले क्षेत्र को अब सुरक्षा अभियानों से आगे बढ़ाकर शांति, विकास और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel