महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने बॉलीवुड के तीन बड़े सितारों शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। FDA का आरोप है कि इलायची के नाम पर किया जा रहा यह प्रचार प्रतिबंधित पान मसाला उत्पाद का अप्रत्यक्ष या सरोगेट विज्ञापन हो सकता है। तीनों अभिनेताओं को ब्रांड एंडोर्सर बताते हुए उनसे 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
FDA ने अभिनेताओं को केवल जवाब देने के लिए ही नहीं कहा है, बल्कि संबंधित विज्ञापन से अपनी भागीदारी बंद करने, अपने नियंत्रण वाले सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रमोशनल कंटेंट हटाने और आगे इस विज्ञापन के प्रचार-प्रसार में सहयोग नहीं करने के निर्देश भी दिए हैं।
FDA को ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन पर आपत्ति क्यों?
विवाद की जड़ विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाला ‘Vimal’ ब्रांड नाम है। विज्ञापन में ‘विमल इलायची’ का प्रचार किया जाता है, लेकिन FDA का कहना है कि यही ब्रांड नाम पान मसाला से व्यापक रूप से जुड़ा हुआ है। इसीलिए एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि कानूनी रूप से बेचे जाने वाले किसी दूसरे उत्पाद की आड़ में प्रतिबंधित या नियंत्रित उत्पाद की ब्रांड पहचान को बढ़ावा तो नहीं दिया जा रहा।
FDA की शुरुआती राय के अनुसार विज्ञापन भ्रामक और सरोगेट प्रमोशन की श्रेणी में आ सकता है। महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि नियम तोड़ने के मामले में विज्ञापन से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी की जांच की जाएगी और कार्रवाई केवल सेलिब्रिटीज तक सीमित नहीं होगी।
क्या है सरोगेट एडवर्टाइजिंग?
सरोगेट एडवर्टाइजिंग यानी छद्म विज्ञापन उस रणनीति को कहा जाता है जिसमें किसी ऐसे ब्रांड का प्रचार दूसरे वैध उत्पाद के जरिए किया जाता है, जिसके मुख्य या ज्यादा चर्चित उत्पाद का प्रत्यक्ष विज्ञापन कानून या नियमों के कारण प्रतिबंधित हो।
उदाहरण के तौर पर किसी पान मसाला ब्रांड से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल करके इलायची या माउथ फ्रेशनर का विज्ञापन करना, अथवा किसी शराब ब्रांड से जुड़े नाम के जरिए सोडा, म्यूजिक या अन्य उत्पादों को प्रमोट करना लंबे समय से विवाद का विषय रहा है।
‘विमल इलायची’ मामले में भी महाराष्ट्र FDA इसी सवाल की जांच कर रहा है कि क्या इलायची का विज्ञापन वास्तव में उसी ब्रांड से जुड़े पान मसाला की पहचान को मजबूत करने का माध्यम बन रहा है।
करीब 5 अरब डॉलर का है भारत का पान मसाला बाजार
इस विवाद के बीच पान मसाला उद्योग का आकार भी चर्चा में है। रॉयटर्स ने इंडस्ट्री अनुमानों के आधार पर भारत के पान मसाला बाजार की वैल्यू करीब 5 अरब डॉलर बताई है। इतने बड़े बाजार में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और ब्रांड रिकॉल कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं, यही वजह है कि सरोगेट एडवर्टाइजिंग को लेकर नियामक एजेंसियों की निगरानी भी बढ़ रही है।
पहले भी विवादों में रहे सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट
तंबाकू और पान मसाला से जुड़े ब्रांडों के विज्ञापनों को लेकर बॉलीवुड और अंतरराष्ट्रीय सितारे पहले भी विवादों में आ चुके हैं। सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठता रहा है कि करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वाले स्टार किसी ऐसे ब्रांड का प्रचार करते समय कितनी जिम्मेदारी निभाएं जिसका नाम स्वास्थ्य के लिहाज से विवादित उत्पादों से जुड़ा हो।
मौजूदा मामले में फिलहाल महाराष्ट्र FDA ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसलिए इसे अंतिम तौर पर कानून उल्लंघन साबित होना नहीं माना जा सकता। आगे की कार्रवाई तीनों अभिनेताओं और संबंधित पक्षों के जवाब तथा FDA की जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।
सरकार और नियामकों की सरोगेट विज्ञापनों पर नजर
केंद्र और राज्यों की एजेंसियां पिछले कुछ वर्षों से सरोगेट विज्ञापनों पर सख्ती बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। रॉयटर्स ने 2024 में रिपोर्ट किया था कि भारत शराब और अन्य प्रतिबंधित श्रेणियों से जुड़े सरोगेट विज्ञापनों पर ज्यादा कड़े नियमों पर विचार कर रहा था। अब महाराष्ट्र FDA की यह कार्रवाई सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और ब्रांड एक्सटेंशन के बीच की सीमा पर एक बार फिर बहस तेज कर सकती है।
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