बांग्लादेश में हिंदू और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चटगांव में आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कट्टरपंथी इस्लामी नेता मुफ्ती हारुन इजहार (Harun Izhar) पर हिंदुओं के खिलाफ कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक और हिंसा भड़काने वाला बयान देने का आरोप लगाया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो और उससे जुड़े दावों के मुताबिक, ‘दावा मूवमेंट’ से जुड़े एक कार्यक्रम में हारुन इजहार ने हिंदुओं को निशाना बनाते हुए धमकी भरी टिप्पणी की। हालांकि, वायरल वीडियो में कही गई बातों और उसके पूरे संदर्भ की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी सीमित है, इसलिए कथित बयान को इसी सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए। सोशल मीडिया पोस्ट में इजहार के बयान को हिंदुओं के खिलाफ प्रत्यक्ष हिंसक धमकी के रूप में पेश किया जा रहा है।
At a rally, Bangladeshi al-Qaeda leader Harun Izhar said 🇧🇩🚨
''We can kill Hindus in Bangladesh easily. I don’t need to do anything myself; my people are enough to do it.
He is now threatening us simply because we tweeted about an Indian scholar attending his Dawah program. pic.twitter.com/Ciin0wfltm
— Voice Of BD Hindus 🇧🇩 (@HinduUnityBD) August 18, 2026
कौन है हारुन इजहार?
हारुन इजहार का नाम बांग्लादेश में कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर पहले भी चर्चा में रह चुका है। बांग्लादेशी अखबार Prothom Alo की 2021 की एक रिपोर्ट में खुफिया सूत्रों के हवाले से एक कथित अल-कायदा समर्थक नेटवर्क की चर्चा करते हुए हारुन इजहार को उसके प्रमुख चेहरों में गिना गया था। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित समूह के सदस्य अल-कायदा की विचारधारा का अनुसरण करते थे। हारुन इजहार Hefazat-e-Islam से भी जुड़ा रहा है।
2013 में चटगांव के लालखान बाजार मदरसे में विस्फोट के बाद भी इजहार का नाम सामने आया था। बाद के वर्षों में उसे विभिन्न मामलों में गिरफ्तार किया गया और 2021 में Hefazat-e-Islam से जुड़ी हिंसा के मामलों में भी हिरासत तथा रिमांड का सामना करना पड़ा।
शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बनी बड़ा मुद्दा
अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले व्यापक आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पद छोड़ा और देश से बाहर चली गईं। इसके बाद बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बीच हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हमलों की अनेक शिकायतें सामने आईं। हिंदू संगठनों ने सुरक्षा और कानूनी संरक्षण की मांग करते हुए बड़े प्रदर्शन भी किए। दूसरी ओर, बांग्लादेश की तत्कालीन अंतरिम सरकार ने कहा था कि अल्पसंख्यकों पर हमलों के पैमाने को कुछ रिपोर्टों में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी 2024 के आंदोलन और उसके बाद की घटनाओं की व्यापक जांच की थी। उसकी फरवरी 2025 की रिपोर्ट ने उस दौर में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और विभिन्न समूहों द्वारा की गई हिंसा का दस्तावेजीकरण किया।
बांग्लादेश में AQIS के पैर पसारने को लेकर UNSC रिपोर्ट में चिंता
हारुन इजहार से जुड़ा वायरल वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़ी Analytical Support and Sanctions Monitoring Team की 38वीं रिपोर्ट ने बांग्लादेश को लेकर एक अलग सुरक्षा चिंता दर्ज की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात को लेकर “कुछ चिंता” है कि Al-Qaida in the Indian Subcontinent (AQIS) बांग्लादेश की परिस्थितियों का फायदा उठाकर वहां अपने सेल स्थापित करने की कोशिश कर सकता है। यह रिपोर्ट ISIL और अल-कायदा तथा उनसे संबद्ध संगठनों की गतिविधियों की निगरानी करने वाली UN व्यवस्था का हिस्सा है।
यह फर्क महत्वपूर्ण है कि UN रिपोर्ट बांग्लादेश में किसी निश्चित AQIS सेल की मौजूदगी की पुष्टि नहीं करती, बल्कि संगठन द्वारा देश का इस्तेमाल कर सेल स्थापित करने की संभावित कोशिश को लेकर चिंता दर्ज करती है।
बांग्लादेश सरकार ने UNSC रिपोर्ट पर क्या कहा?
इस पूरे मामले का दूसरा पक्ष भी अहम है। बांग्लादेश सरकार ने AQIS से जुड़ी UN रिपोर्ट के निष्कर्षों पर आपत्ति जताई है। ढाका ने रिपोर्ट को “assumption-driven” यानी धारणाओं पर आधारित बताया और कहा कि सरकार इसे अपने सुरक्षा आकलन का आधार नहीं बना रही है।
इसलिए यह कहना कि AQIS ने बांग्लादेश में अपना स्थापित नेटवर्क निश्चित रूप से खड़ा कर लिया है, उपलब्ध UN रिपोर्ट से आगे जाने वाला दावा होगा। रिपोर्ट फिलहाल संभावित खतरे और सेल स्थापित करने की कोशिश को लेकर चेतावनी देती है।
भारत के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है बांग्लादेश में कट्टरवाद का मुद्दा?
बांग्लादेश में AQIS की संभावित गतिविधियां भारत के लिए भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। 19 अगस्त 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने AQIS से पैदा होने वाले खतरे से निपटने के लिए बांग्लादेश के साथ संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता की बात कही।
भौगोलिक निकटता और लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा के कारण किसी भी अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का बांग्लादेश में विस्तार पूरे दक्षिण एशिया के लिए सुरक्षा चुनौती बन सकता है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई हिंदुओं की सुरक्षा की चिंता
हारुन इजहार का कथित वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पहले से संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। यदि वायरल वीडियो और उसके अनुवाद की प्रामाणिकता पूरी तरह प्रमाणित होती है, तो किसी धार्मिक समुदाय के खिलाफ सार्वजनिक मंच से हिंसा की धमकी गंभीर चिंता का विषय है।
फिलहाल वायरल क्लिप के पूरे संदर्भ, कार्यक्रम की तारीख और कथित बयान के आधिकारिक ट्रांसक्रिप्ट की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। वहीं AQIS के संबंध में UNSC मॉनिटरिंग टीम की चेतावनी स्वतंत्र रूप से दर्ज तथ्य है, लेकिन बांग्लादेश सरकार उसके आकलन से असहमति जता चुकी है।
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