श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश एक बार फिर सफल नहीं हो सकी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मथुरा में विशेष लोक अदालत के जरिए मंगलवार, 18 अगस्त को सुलह की तीसरी कोशिश की गई, लेकिन मुस्लिम पक्ष के उपस्थित नहीं होने के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद सुलह संबंधी पत्रावली का निस्तारण कर दिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगे की कार्यवाही पर टिक गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मामले से जुड़ी अगली कार्यवाही 21 से 23 अगस्त के बीच सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही थी सुलह की कोशिश
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद लंबे समय से अदालतों में विचाराधीन है। विवाद से जुड़े कई मुकदमों में हिंदू पक्ष की ओर से शाही ईदगाह से संबंधित भूमि पर अधिकार और मंदिर की बहाली समेत विभिन्न राहतों की मांग की गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस विवाद से जुड़े कई मुकदमे एक साथ विचाराधीन रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की पहल के बाद विवाद को बातचीत और सुलह के जरिए हल करने की संभावना तलाशी जा रही थी। इसी क्रम में मथुरा में विशेष लोक अदालत के सामने पक्षकारों को बुलाया गया था।
मुस्लिम पक्ष की गैरमौजूदगी से नहीं बढ़ी बातचीत
18 अगस्त को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार यादव द्वितीय की विशेष लोक अदालत में सुलह की तीसरी कोशिश निर्धारित थी। रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू पक्ष से जुड़े कई पक्षकार अदालत परिसर पहुंचे, लेकिन मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसी कारण सुलह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
इससे पहले भी विवाद के समाधान के लिए बातचीत का प्रयास किया गया था। जुलाई में आयोजित एक विशेष लोक अदालत में भी हिंदू पक्ष ने मस्जिद के स्थानांतरण से संबंधित प्रस्ताव रखा था, जबकि उस कार्यवाही में मुस्लिम पक्ष उपस्थित नहीं हुआ था।
हिंदू पक्ष ने अब वैकल्पिक जमीन के प्रस्ताव से किया इनकार
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने ताजा कार्यवाही के बाद कहा कि अब वे शाही ईदगाह को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के बदले वैकल्पिक जमीन देने के प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं। यह हिंदू पक्ष का दावा और कानूनी रुख है, जिस पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है।
हिंदू पक्ष का दावा है कि विवादित भूमि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का हिस्सा है। वहीं विवाद में मुस्लिम पक्ष के अपने कानूनी तर्क और दावे हैं। मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण भूमि के स्वामित्व और अन्य विवादित तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले के बाद ही तय होगा।
दस्तावेजों को लेकर हिंदू पक्ष ने उठाए सवाल
हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी ने मुस्लिम पक्ष की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उनके पास श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित मजबूत दस्तावेज नहीं हैं। हालांकि यह पक्षकार का आरोप है और इसे अदालत द्वारा स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
हिंदू पक्ष के अन्य पक्षकारों ने भी मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इससे मामले के समाधान में देरी हो रही है।
क्या है श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद?
मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर के निकट स्थित है। हिंदू वादियों की ओर से दायर मुकदमों में दावा किया गया है कि शाही ईदगाह से जुड़ी भूमि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान का हिस्सा है और वहां मंदिर से संबंधित भूमि पर मस्जिद का निर्माण हुआ था।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से कई मुकदमों में शाही ईदगाह संरचना को हटाने, भूमि पर कब्जा दिलाने और मंदिर की बहाली जैसी मांगें की गई हैं। मुस्लिम पक्ष इन दावों का कानूनी विरोध करता रहा है।
इसलिए पूरे विवाद में ऐतिहासिक दावों, स्वामित्व, पूर्व समझौतों और विभिन्न कानूनी प्रावधानों से जुड़े प्रश्न अदालत के समक्ष हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर नजर
मथुरा में सुलह की कोशिश सफल नहीं होने के बाद अब विवाद के अगले चरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही महत्वपूर्ण हो गई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार 21 से 23 अगस्त के बीच आगे की न्यायिक या सुलह संबंधी प्रक्रिया निर्धारित है।
ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद में आगे मध्यस्थता का कोई और रास्ता सुझाता है या मामला नियमित न्यायिक सुनवाई के जरिए आगे बढ़ता है।
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