जम्मू-कश्मीर में रजिस्टर्ड रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की कुल संख्या में बड़ी बढ़ोतरी सामने नहीं आई है, लेकिन राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के भीतर उनकी मौजूदगी का भौगोलिक दायरा बढ़ने की बात सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जो आबादी पहले मुख्य रूप से जम्मू और सांबा जैसे इलाकों तक सीमित मानी जाती थी, उसकी मौजूदगी अब जम्मू और कश्मीर के कुल 16 जिलों में दर्ज की गई है। इस बदलाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में फिलहाल 8,160 रजिस्टर्ड रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक हैं। इनमें 7,656 रोहिंग्या और 504 बांग्लादेशी बताए गए हैं।
जम्मू के सभी 10 जिलों तक मौजूदगी
पहले रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी मुख्य रूप से जम्मू और सांबा में बताई जाती थी, जबकि कश्मीर घाटी में इनकी संख्या बेहद सीमित थी। अब उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इनकी मौजूदगी जम्मू क्षेत्र के सभी 10 जिलों—जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर, रियासी, रामबन, डोडा, किश्तवाड़, पुंछ और राजौरी—तक दर्ज की गई है।
इसके अलावा कश्मीर घाटी के श्रीनगर, बडगाम, गांदरबल, अनंतनाग, पुलवामा और कुलगाम में भी इनकी मौजूदगी की जानकारी सामने आई है। इस तरह कुल 16 जिलों तक इनका दायरा पहुंचने की बात कही गई है।
रामबन में पकड़े गए थे 21 रोहिंग्या
हाल ही में कश्मीर घाटी की ओर जाने की कोशिश कर रहे 21 रोहिंग्याओं को रामबन में पकड़े जाने की जानकारी भी सामने आई थी। उन्हें बाद में होल्डिंग सेंटर में रखा गया।
जांच से जुड़े दावों के मुताबिक, उन्हें कथित तौर पर घाटी पहुंचने के बाद स्थानीय आबादी के बीच घुल-मिल जाने के लिए कहा गया था। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय यह है कि इस तरह आने वाले लोगों की पहचान और गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के भी आरोप
जांच में यह आशंका भी जताई गई है कि कुछ अवैध प्रवासी पश्चिम बंगाल या असम जैसे राज्यों से फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड अथवा वोटर आईडी जैसे दस्तावेज हासिल करने में सफल रहे हों। हालांकि ऐसे आरोपों की पुष्टि संबंधित मामलों की जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है।
फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ सरकारी योजनाओं, मतदाता सूची और स्थानीय जनसांख्यिकीय रिकॉर्ड की शुद्धता से जुड़े सवाल भी खड़े करता है।
2017-18 में संख्या 13,700 तक बताई गई थी
जानकारी के मुताबिक 2017-18 के दौरान जम्मू और सांबा में करीब 13,700 विदेशी नागरिक दर्ज किए गए थे। इस आंकड़े में ऐसे परिवार भी शामिल बताए गए थे जिनका सत्यापन नहीं हुआ था।
इसके बाद 2021 से बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और पहचान की प्रक्रिया तेज होने से सत्यापित आंकड़ों में बदलाव आया। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार अब 7,656 रोहिंग्या और 504 बांग्लादेशी नागरिक रजिस्टर्ड हैं।
हाई-लेवल कमेटी को सौंपे गए आंकड़े
रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों से संबंधित आंकड़े जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन कर रही केंद्र की एक हाई-लेवल कमेटी को सौंपे जाने की जानकारी है।
बताया गया है कि कमेटी ने सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर आबादी में असामान्य बदलाव और अवैध प्रवास से जुड़े पहलुओं का जायजा लिया। टीम ने जम्मू के नरवाल स्थित प्रमुख रोहिंग्या बस्ती और नगरोटा की जगती प्रवासी बस्ती का भी दौरा किया।
हिरासत और देश से निष्कासन के स्थायी सिस्टम पर चर्चा
कमेटी के स्तर पर कथित अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान, कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत और तय समयसीमा के भीतर देश से निष्कासन के लिए एक स्थायी व्यवस्था विकसित करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या से ज्यादा उनकी मौजूदगी का नए जिलों तक फैलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है। अब निगरानी का फोकस पहचान सत्यापन, संदिग्ध दस्तावेजों की जांच और अवैध तरीके से आने वाले लोगों की पहचान पर रहने की संभावना है।
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