ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon को ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ के नाम से सामान्य मिठाइयों की लिस्टिंग और बिक्री की अनुमति देना महंगा पड़ गया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Amazon Seller Services Private Limited पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने इन लिस्टिंग को भ्रामक विज्ञापन और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला व्यापारिक व्यवहार माना है।
CCPA के मुताबिक, ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ शब्द का धार्मिक संदर्भ बेहद स्पष्ट है और आम श्रद्धालु इससे उस प्रसाद को समझ सकता है, जो अयोध्या के श्री राम मंदिर से आधिकारिक रूप से जुड़ा हो। लेकिन संबंधित उत्पादों के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अनुमति, संबद्धता या समर्थन का प्रमाण नहीं था। इसके बावजूद व्यावसायिक रूप से तैयार सामान्य मिठाइयों को इस नाम से Amazon पर पेश किया गया।
प्राधिकरण ने माना कि इस तरह की लिस्टिंग केवल उत्पाद की प्रकृति और प्रामाणिकता को लेकर उपभोक्ता को भ्रमित नहीं करती, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़े शब्द का व्यावसायिक इस्तेमाल भी करती है। CCPA ने इस बात पर भी जोर दिया कि Amazon जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर किसी उत्पाद की मौजूदगी आम ग्राहक के मन में उसकी विश्वसनीयता बढ़ा सकती है।
प्राण प्रतिष्ठा से पहले हुई थी लिस्टिंग
इस पूरे मामले में लिस्टिंग का समय भी अहम रहा। विवादित उत्पाद 22 जनवरी 2024 को अयोध्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले Amazon पर उपलब्ध थे। CCPA ने 19 जनवरी 2024 को Amazon Seller Services Private Limited को नोटिस जारी किया था और सात दिनों के भीतर जवाब मांगा था। उस समय PIB की आधिकारिक जानकारी में रघुपति घी लड्डू, खोया खोबी लड्डू, घी बूंदी लड्डू और देसी गाय के दूध के पेड़े जैसे उत्पादों को ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ के नाम से सूचीबद्ध किए जाने का उल्लेख किया गया था।
CCPA के अनुसार, Amazon ने नोटिस मिलने के बाद संबंधित लिस्टिंग हटा दी थीं। बाद में कंपनी ने अपने को एक मध्यस्थ यानी intermediary बताते हुए अपना पक्ष रखा, लेकिन प्राधिकरण ने माना कि इतने बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से ऐसी संवेदनशील और भ्रामक लिस्टिंग को रोकने के लिए उचित सक्रिय कदम उठाने की अपेक्षा की जाती है।
एक विक्रेता ने की ₹25.26 लाख से ज्यादा की बिक्री
CCPA ने मामले के व्यावसायिक प्रभाव को भी महत्वपूर्ण माना है। आदेश में दर्ज जानकारी के मुताबिक, M/s Chandu Trading Company नामक एक विक्रेता की इन लिस्टिंग के जरिए Amazon प्लेटफॉर्म पर सकल बिक्री ₹25,26,309 तक पहुंची। Amazon को भी अपने सामान्य मार्केटप्लेस ऑपरेशन के तहत कमीशन या शुल्क से आय हुई। संबंधित लिस्टिंग देशभर में डिलीवरी के लिए उपलब्ध थीं।
प्राधिकरण ने कहा कि किसी बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच भ्रामक दावे के प्रभाव को कई गुना बढ़ा सकती है, क्योंकि ग्राहक प्लेटफॉर्म की प्रतिष्ठा के आधार पर उत्पाद को अधिक विश्वसनीय मान सकता है।
Amazon पर क्यों लगा ₹1 लाख का जुर्माना?
CCPA ने Amazon को Consumer Protection Act, 2019 और Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020 के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार माना। आदेश के मुताबिक प्लेटफॉर्म पर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित होने के मामले में ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया है और Amazon को आदेश की तारीख से 15 दिनों के भीतर रकम जमा करने को कहा गया है।
जनवरी 2024 में जारी सरकारी नोटिस में भी स्पष्ट किया गया था कि ई-कॉमर्स नियमों के Rule 4(3) के तहत कोई ई-कॉमर्स इकाई अनुचित व्यापारिक व्यवहार नहीं अपना सकती। Consumer Protection Act, 2019 की Section 2(28) के तहत ऐसा विज्ञापन, जो किसी उत्पाद या सेवा की प्रकृति अथवा गुणवत्ता के बारे में ग्राहक को भ्रमित करे, ‘misleading advertisement’ की श्रेणी में आ सकता है।
अब धार्मिक प्रसाद की ऑनलाइन बिक्री पर सख्त निगरानी
CCPA का आदेश केवल इस एक मामले तक सीमित नहीं है। Amazon को निर्देश दिया गया है कि किसी प्रमुख धार्मिक संस्था या मंदिर से जुड़े ‘प्रसाद’, ‘प्रसादम’, ‘महाप्रसाद’, ‘भोग’ या इसी तरह के धार्मिक उत्पाद को संबंधित संस्था की सत्यापन योग्य अनुमति के बिना लिस्ट, विज्ञापित या बिक्री के लिए उपलब्ध न कराया जाए।
वर्तमान व्यवस्था में श्री राम जन्मभूमि मंदिर, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम, श्री माता वैष्णो देवी मंदिर, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, श्री जगन्नाथ मंदिर, श्री केदारनाथ मंदिर, श्री बद्रीनाथ मंदिर, श्री सोमनाथ मंदिर, श्री द्वारकाधीश मंदिर और श्री महाकालेश्वर मंदिर समेत 10 प्रमुख धार्मिक संस्थान और तीर्थ शामिल हैं।
Amazon को विक्रेता का नाम, पूरा पता, ग्राहक सेवा नंबर और grievance officer की जानकारी भी प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 28 मई 2026 को कंपनी द्वारा प्रस्तावित due-diligence framework को मजबूत करने, की-वर्ड आधारित संदिग्ध लिस्टिंग की पहचान और उन्हें हटाने की व्यवस्था लागू करने तथा भविष्य में और धार्मिक संस्थानों को इसके दायरे में शामिल करने को कहा गया है। CCPA ने तीन से चार महीने बाद इस व्यवस्था की प्रभावशीलता की समीक्षा करने का अधिकार भी सुरक्षित रखा है।
मामले की शुरुआत कैसे हुई?
मामले में कार्रवाई की शुरुआत Confederation of All India Traders (CAIT) की शिकायत के बाद हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि Amazon पर व्यावसायिक रूप से बनाई गई मिठाइयों को ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ बताकर बेचा जा रहा है, जबकि मंदिर या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से उनके आधिकारिक जुड़ाव का प्रमाण नहीं था। इसके बाद 19 जनवरी 2024 को CCPA ने Amazon को नोटिस जारी किया था।
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