गुजरात के भावनगर जिले में सामने आए नकली अंग्रेजी शराब कांड ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। ‘रॉयल स्टैग’ ब्रांड के नाम पर बेची जा रही कथित नकली शराब में जानलेवा मेथनॉल की भारी मात्रा मिलने के बाद पुलिस और स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) ने जांच तेज कर दी है। 20 अगस्त की अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या को लेकर अंतर है—एक रिपोर्ट में 6 जबकि दूसरी में कुल 7 मौतों का जिक्र किया गया है। कई प्रभावित लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है।
मामले में मुख्य बूटलेगर बताए जा रहे गौतम सोलंकी समेत कुल 21 लोगों के खिलाफ वरतेज पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। जांच अब केवल खरखड़ी गांव में हुई पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि नकली शराब तैयार करने में इस्तेमाल हुए केमिकल, बोतल, ढक्कन, नकली लेबल, ट्रांसपोर्ट और बिक्री के पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
नकली ‘Royal Stag’ में मिला 38.59 प्रतिशत मेथनॉल
जांच में सबसे चिंताजनक खुलासा कथित नकली शराब में मेथनॉल की मात्रा को लेकर हुआ है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक जब्त की गई ‘रॉयल स्टैग’ नाम वाली एक बोतल की जांच में 38.59 प्रतिशत मेथनॉल पाया गया।
मेथनॉल सामान्य रूप से पीने योग्य अल्कोहल नहीं है। शरीर में पहुंचने के बाद यह फॉर्मेल्डिहाइड और फॉर्मिक एसिड जैसे जहरीले पदार्थों में बदल सकता है। गंभीर मेथनॉल पॉइजनिंग के कारण आंखों की रोशनी प्रभावित होने, मेटाबॉलिक एसिडोसिस, मस्तिष्क और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचने तथा मौत तक का खतरा रहता है।
इसी वजह से प्रशासन की ओर से संदिग्ध नकली शराब पीने वाले लोगों को लक्षणों का इंतजार किए बिना तत्काल मेडिकल जांच कराने की सलाह दी गई है।
खरखड़ी गांव में शराब पार्टी के बाद बिगड़ी तबीयत
यह मामला घोघा तालुका के खरखड़ी गांव में 16 अगस्त की रात हुई एक शराब पार्टी के बाद सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार दोस्तों के बीच आयोजित पार्टी में कथित नकली ‘रॉयल स्टैग’ पीने के बाद एक-एक कर कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी।
इसके बाद प्रभावित लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। मरीजों की मौत सामने आने के बाद मामला गंभीर हुआ और पुलिस की जांच कथित शराब सप्लायरों से लेकर उसे बनाने वाले नेटवर्क तक पहुंच गई।
अहमदाबाद से केमिकल लाकर वरतेज में नकली शराब बनाने की जांच
पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि नकली ब्रांडेड शराब तैयार करने के लिए आवश्यक केमिकल और अन्य कच्चा माल अहमदाबाद से भावनगर के वरतेज इलाके में लाया गया था।
जांच के केंद्र में सिर्फ शराब बनाने वाला केमिकल ही नहीं, बल्कि खाली बोतलों, ढक्कनों, नकली ब्रांड स्टिकर और पैकेजिंग सामग्री की सप्लाई भी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली विदेशी शराब तैयार करने का यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
मामले में मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।
गौतम सोलंकी समेत 21 आरोपियों पर केस
स्टेट मॉनिटरिंग सेल की जांच के बाद वरतेज पुलिस स्टेशन में कथित मुख्य बूटलेगर गौतम सोलंकी समेत 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और गुजरात प्रोहिबिशन से जुड़े प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जांच एजेंसियों का फोकस अब यह पता लगाने पर है कि जहरीली शराब की कुल कितनी मात्रा बनाई गई, कितनी बोतलें या पेटियां बेची गईं और वह किन-किन इलाकों तक पहुंची।
पहले भी 51 पेटियां बेचने की जानकारी
जांच से जुड़ी रिपोर्ट में एक और बड़ा दावा सामने आया है। इसके मुताबिक आरोपियों द्वारा पहले तैयार की गई नकली शराब की 51 पेटियां बेचे जाने की जानकारी मिली है।
अगर जांच में इसकी पुष्टि होती है तो मामला केवल खरखड़ी गांव की घटना तक सीमित नहीं रहेगा। एजेंसियों के सामने यह पता लगाना बड़ी चुनौती होगी कि 51 पेटियां किन लोगों को बेची गईं, वे किन क्षेत्रों तक पहुंचीं और क्या उनसे जुड़े अन्य लोग भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित हुए हैं।
पुलिस के लिए बाजार में पहले से पहुंच चुकी संदिग्ध बोतलों को ट्रैक करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ऐसी शराब का सेवन करने वाला व्यक्ति गंभीर खतरे में पड़ सकता है।
अहमदाबाद ग्रामीण के 500 से ज्यादा गांवों तक जांच
जहरीली शराब के भावनगर से बाहर पहुंचने की आशंका के बाद अहमदाबाद ग्रामीण क्षेत्र में भी पुलिस को सतर्क किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 500 से अधिक गांवों में जांच और कार्रवाई की गई तथा स्थानीय सरपंचों की मदद से संदिग्ध शराब की बिक्री से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश की गई।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध ‘रॉयल स्टैग’ या अवैध स्रोत से खरीदी गई शराब का सेवन बिल्कुल न करें।
पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में
इतने बड़े स्तर पर कथित नकली शराब का नेटवर्क संचालित होने के बाद स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ गई है। रिपोर्टों में पुलिसकर्मियों के निलंबन की संख्या को लेकर भी अंतर है।
एक ताजा रिपोर्ट में 4 पुलिसकर्मियों के निलंबन का उल्लेख है, जबकि दूसरी रिपोर्ट में यह संख्या 5 बताई गई है। इसलिए आधिकारिक अंतिम पुष्टि तक निलंबित पुलिसकर्मियों की निश्चित संख्या को लेकर सावधानी जरूरी है।
यह सवाल भी उठ रहा है कि भावनगर में इतनी गंभीर घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य स्तर पर समय रहते दी गई थी या नहीं। रिपोर्ट के अनुसार गांधीनगर स्थित स्टेट कंट्रोल रूम की ओर से भावनगर जिला पुलिस नेतृत्व से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात सामने आई है।
SMC खंगाल रही नकली शराब की पूरी चेन
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने जांच का दायरा व्यापक कर दिया है। एजेंसी कथित शराब निर्माता से लेकर केमिकल सप्लायर, बोतल और स्टिकर उपलब्ध कराने वाले लोगों, ट्रांसपोर्टरों और स्थानीय स्तर पर शराब बेचने वाले बूटलेगरों तक पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहरीली शराब की कितनी बोतलें अभी बाजार में या लोगों के पास मौजूद हो सकती हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नकली शराब भावनगर जिले के अलावा गुजरात के दूसरे हिस्सों तक पहुंची या नहीं।
मेथनॉल इतना खतरनाक क्यों?
पीने वाली सामान्य शराब में मुख्य रूप से इथेनॉल होता है, जबकि मेथनॉल एक जहरीला अल्कोहल है। शरीर में जाने के बाद मेथनॉल का मेटाबॉलिज्म पहले फॉर्मेल्डिहाइड और फिर फॉर्मिक एसिड में होता है।
मेथनॉल पॉइजनिंग की गंभीर स्थिति में धुंधला दिखाई देना या आंखों की रोशनी जाना, उल्टी, पेट दर्द, चक्कर, सांस लेने में परेशानी, मेटाबॉलिक एसिडोसिस, बेहोशी और महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए संदिग्ध जहरीली शराब पीने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
शराबबंदी वाले गुजरात में बड़ा सवाल
गुजरात में शराबबंदी लागू होने के बावजूद नकली विदेशी शराब को ब्रांडेड बोतलों और लेबल के जरिए बेचे जाने की घटना ने अवैध शराब नेटवर्क और स्थानीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के सामने अब तीन अहम सवाल हैं—यह नेटवर्क कब से चल रहा था, कुल कितनी जहरीली शराब बाजार तक पहुंचाई गई और क्या इस अवैध कारोबार को किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा था।
भावनगर नकली शराब मामले में जांच लगातार जारी है। मृतकों, प्रभावित लोगों, गिरफ्तार आरोपियों और निलंबित पुलिसकर्मियों की संख्या से जुड़े आंकड़ों में अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है, इसलिए आगे आने वाले आधिकारिक अपडेट के साथ इन आंकड़ों में बदलाव संभव है।
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