नई दिल्ली में BRICS Summit 2026 से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत BRICS बिजनेस फोरम के साथ हो गई है। बिजनेस फोरम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल समेत कई प्रमुख वक्ता शामिल हुए। इस दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलाव, BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, आर्थिक सहयोग मजबूत करने और नई तकनीक से पैदा हो रहे अवसरों पर जोर दिया गया।
पीयूष गोयल बोले- हमें मिलकर काम करने की जरूरत
BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्य देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की बिजनेस फोरम में मौजूदगी मौजूदा दौर में आर्थिक कूटनीति के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।
गोयल ने कहा कि दुनिया इस समय कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसे माहौल में BRICS देशों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि साझा प्रयासों को लोगों के लिए रोजगार के अवसरों तथा सदस्य देशों के लिए संपत्ति और समृद्धि में बदलना होगा।
पीयूष गोयल के मुताबिक BRICS देश दुनिया की करीब आधी आबादी और वैश्विक GDP के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन देशों के बीच मजबूत आर्थिक और व्यापारिक सहयोग वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
#WATCH | ब्रिक्स सम्मेलन 2026 | ब्रिक्स बिज़नेस फोरम को संबोधित करते हुए, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "आज ब्रिक्स दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है। भारत, ब्रिक्स देशों के बीच होने वाले व्यापार का एक अहम स्तंभ है। भारत से होने वाले… pic.twitter.com/T81jP6Ik2Q
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 11, 2026
‘BRICS देशों के बीच व्यापार का अहम स्तंभ है भारत’
पीयूष गोयल ने BRICS के बढ़ते आर्थिक महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि आज BRICS वैश्विक व्यापार के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने भारत को BRICS देशों के बीच होने वाले व्यापार का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
गोयल ने कहा कि भारत के मैन्युफैक्चर्ड एक्सपोर्ट में इंजीनियरिंग गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी हिस्सेदारी है। इसके अलावा भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री की वैश्विक भूमिका को देखते हुए देश को दुनिया की ‘फार्मेसी’ के रूप में भी जाना जाता है।
भारत BRICS को इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल और अन्य भारतीय उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में देखता है। भारत इन क्षेत्रों में खुद को दुनिया के लिए एक भरोसेमंद साझेदार के तौर पर आगे बढ़ाना चाहता है।
सदस्य देशों से बाजार खोलने की अपील
पीयूष गोयल ने BRICS सदस्य और पार्टनर देशों से अपने बाजारों को अधिक खुला बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को मिलकर नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने और माल की खेप को तेजी से मंजूरी देने की दिशा में काम करना चाहिए।
ऐसी व्यवस्था से BRICS देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आवागमन आसान हो सकता है और कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। भारत का जोर सदस्य देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने और सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने पर है।
जयशंकर बोले- वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बड़े बदलाव
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
जयशंकर के मुताबिक अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता मौजूदा वैश्विक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं बन चुकी हैं। दुनिया भू-राजनीतिक संघर्षों, महामारियों और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के आर्थिक परिणामों को देख रही है।
इन परिस्थितियों ने वैश्विक सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, व्यापार और आर्थिक विकास के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। ऐसे में देशों के लिए बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को तेजी से ढालना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
#WATCH | BRICS Summit 2026 | Speaking at BRICS Business Forum, External Affairs Minister Dr S Jaishankar says, "We meet at a time when global political and economic order is under churn. Volatility, uncertainty, and complexity have become defining features of the world around us.… pic.twitter.com/pXJH1UpEJX
— ANI (@ANI) September 11, 2026
डिजिटलाइजेशन और टेक्नोलॉजी में नए अवसर
विदेश मंत्री ने वैश्विक चुनौतियों के साथ पैदा हो रहे अवसरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ता डिजिटलाइजेशन और तकनीकी विकास आर्थिक वृद्धि, उत्पादकता और प्रगति के नए रास्ते खोल रहा है।
नई तकनीकों के कारण वैश्विक आर्थिक माहौल तेजी से बदल रहा है। इसमें जोखिम और अवसर दोनों व्यापक स्तर पर सामने आ रहे हैं। जयशंकर ने बदलते हालात का पहले से आकलन करने, उनके अनुरूप खुद को ढालने और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता को महत्वपूर्ण बताया।
BRICS देशों के लिए डिजिटल अर्थव्यवस्था, इनोवेशन, नई तकनीक, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना आने वाले समय में अहम भूमिका निभा सकता है।
आर्थिक कूटनीति पर BRICS Business Forum का फोकस
BRICS Business Forum 2026 में आर्थिक कूटनीति और सदस्य देशों के बीच कारोबारी संबंधों को मजबूत बनाने पर खास फोकस दिखाई दिया। भारत की ओर से व्यापार बढ़ाने के साथ रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को आसान बनाने और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता सामने रखी गई।
BRICS का आर्थिक दायरा बढ़ने के साथ यह मंच ग्लोबल साउथ और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है। भारत के लिए भी BRICS अपने निर्यात, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्युटिकल, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए नए बाजार तलाशने का बड़ा मंच है।
BRICS Summit के चलते दिल्ली में VVIP मूवमेंट
BRICS Summit 2026 के कारण दिल्ली में VVIP मूवमेंट बढ़ गया है। विभिन्न देशों के नेताओं, मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा के साथ ट्रैफिक व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं।
दिल्ली पुलिस ने आम लोगों के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी के अनुसार नई दिल्ली क्षेत्र में कई प्रमुख मार्गों पर यातायात नियंत्रित किया जाएगा।
35 सड़कों पर ट्रैफिक नियंत्रण, 22 डायवर्जन पॉइंट
BRICS Summit के दौरान नई दिल्ली इलाके की 35 सड़कों पर ट्रैफिक नियंत्रित रहने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए 22 डायवर्जन पॉइंट तैयार किए गए हैं।
VVIP काफिलों की आवाजाही के समय कुछ मार्गों पर यातायात अस्थायी रूप से रोका या डायवर्ट किया जा सकता है। ऐसे में राजधानी में यात्रा करने वाले लोगों के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाना महत्वपूर्ण होगा।
BRICS Summit 2026 के आगामी कार्यक्रमों में व्यापार, वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, निवेश, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही सदस्य देशों के नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठकों पर भी दुनिया की नजर रहेगी।
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