18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 का आधिकारिक आगाज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सदस्य देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की BRICS अध्यक्षता को “People Centric” और “Humanity First” दृष्टिकोण पर आधारित बताया और ग्लोबल गवर्नेंस में बड़े सुधार की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि BRICS सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। भारत की अध्यक्षता में वर्षभर बड़ी संख्या में बैठकों और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
करीब 30 शहरों में BRICS प्रतिनिधियों का स्वागत
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान BRICS से जुड़ी 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं और लगभग 30 भारतीय शहरों में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और टीमों का स्वागत किया गया। उन्होंने सदस्य देशों को भारत की BRICS अध्यक्षता को सफल बनाने में योगदान देने के लिए धन्यवाद दिया।
इससे पहले BRICS Business Forum में भी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि BRICS आज वैश्विक आबादी के लगभग आधे हिस्से, करीब 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और 25 प्रतिशत से अधिक वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।
#WATCH | Delhi: During the BRICS Summit 2026, Prime Minister Narendra Modi says, "It gives me immense pleasure to welcome and greet you all to India. India’s BRICS chairmanship is based on a people-centric and humanity-first approach. Resilience, innovation, cooperation, and… pic.twitter.com/8GWE5tWXPk
— ANI (@ANI) September 12, 2026
BRICS में निरंतरता के लिए नया तंत्र बनाने का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS की अध्यक्षता हर साल एक देश से दूसरे देश को मिलती है, लेकिन इसके कारण संगठन की योजनाओं और संस्थागत कार्यों की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने BRICS के लिए एक निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत मौजूदा ‘Troika’ व्यवस्था का उपयोग करते हुए अलग-अलग पहलों, निर्णयों और उनके क्रियान्वयन की लगातार समीक्षा की जा सकेगी।
पीएम मोदी ने एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का सुझाव भी दिया, जिसमें BRICS के प्रत्येक निर्णय से जुड़े नोडल पॉइंट, समयसीमा और क्रियान्वयन की स्थिति दर्ज की जा सके। इसका उद्देश्य घोषणाओं को केवल दस्तावेजों तक सीमित रखने के बजाय जमीन पर लागू करना होगा।
#WATCH | Delhi: During the BRICS Summit 2026, Prime Minister Narendra Modi says, "We need to work on a new and ambitious agenda for the next 20 years. We must begin this process with our own internal working systems. While the BRICS presidency rotates annually, this should not… pic.twitter.com/D9kXsqzmy8
— ANI (@ANI) September 12, 2026
‘Global South संकटों की फ्रंट रो में, फैसलों की बैक रो में’
अपने भाषण का बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री मोदी ने Global South की भूमिका पर केंद्रित रखा। उन्होंने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था को असंतुलित बताते हुए कहा कि दुनिया की मौजूदा संस्थागत संरचना में निर्णय लेने की शक्ति कुछ ही देशों के हाथों में केंद्रित है।
पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक संकटों का असर सबसे पहले और सबसे अधिक झेलते हैं, लेकिन निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उनकी पर्याप्त भागीदारी नहीं है। उन्होंने वैश्विक व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधिक और समावेशी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
Global Governance Reform के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS देशों के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखते हुए कहा कि सदस्य देशों को मिलकर Global Governance Reform के 10 ठोस प्रस्ताव तैयार करने चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि इन प्रस्तावों को अगली BRICS Summit तक एक व्यापक ‘BRICS Reform Roadmap’ का रूप दिया जा सकता है।
पीएम मोदी के मुताबिक इस रोडमैप में तीन प्रमुख आधार होने चाहिए:
Representation, Responsiveness और Rule-making.
इन तीन स्तंभों के जरिए मौजूदा वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका और प्रभाव बढ़ाने पर काम किया जा सकता है।
#WATCH | Delhi: During the BRICS Summit 2026, Prime Minister Narendra Modi says, "In formulating this roadmap, we must focus on three key aspects: Representation, Responsiveness, and Rule-making. Regarding representation, I would like to state that reform of the UN Security… pic.twitter.com/NKNqpXufCl
— ANI (@ANI) September 12, 2026
UNSC Reform अब और नहीं टाला जा सकता: मोदी
Representation के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UN Security Council में सुधार की पुरजोर वकालत की।
उन्होंने कहा कि UNSC Reform को अब और टाला नहीं जा सकता। इसके लिए टेक्स्ट-बेस्ड नेगोशिएशन को तय समयसीमा और स्पष्ट नतीजों से जोड़ने की जरूरत है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और स्थायी सदस्यता में विकासशील देशों के उचित प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है। BRICS Summit से पहले पीएम मोदी और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की बैठक में भी दोनों पक्षों ने UNSC समेत बहुपक्षीय संस्थाओं को मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बदलने की जरूरत पर जोर दिया था।
वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में भी बदलाव की मांग
पीएम मोदी ने कहा कि केवल संयुक्त राष्ट्र ही नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय संस्थाओं के ढांचे में भी बदलाव की जरूरत है। उनके मुताबिक IMF और अन्य वैश्विक संस्थाओं में Voting Power, Leadership Positions और Policy Priorities को आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जो देश वैश्विक आर्थिक विकास में बड़ा योगदान दे रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक शासन के फैसलों में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए। BRICS देशों ने हाल में वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग भी उठाई है।
Seafarers Emergency Support Network बनाने का प्रस्ताव
Responsiveness यानी वैश्विक संस्थाओं की प्रतिक्रिया क्षमता पर बात करते हुए पीएम मोदी ने समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
उन्होंने प्रस्ताव दिया कि BRICS देश मिलकर ‘Seafarers Emergency Support Network’ तैयार करें।
इस नेटवर्क के जरिए सदस्य देशों की Maritime Authorities और Missions को आपस में जोड़ा जा सकता है। संकट की स्थिति में इससे नाविकों को Distress Alerts, Medical Assistance, Evacuation और उनके परिवारों तक सूचना पहुंचाने में मदद मिलेगी।
समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा BRICS Summit के एजेंडे में अहम मुद्दा है। भारत ने पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र में चल रहे संघर्षों के कारण समुद्री व्यापार और नाविकों पर पड़ने वाले असर को भी उठाया है।
#WATCH | Delhi: During the BRICS Summit 2026, Prime Minister Narendra Modi says, "… Seafarers make a massive contribution to global trade, yet they often find themselves lacking support during difficult times. I propose that we establish a 'Seafarers' Emergency Support… pic.twitter.com/VWcWqNuQbv
— ANI (@ANI) September 12, 2026
AI से Biotechnology तक Global South की हिस्सेदारी
Rule-making के मुद्दे पर पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले समय में Artificial Intelligence, Cyber Space, Outer Space, Biotechnology और Critical Technologies वैश्विक नियमों की दिशा तय करेंगे।
उनका कहना था कि इन क्षेत्रों में नियम बनाते समय केवल विकसित देशों की आवाज नहीं होनी चाहिए। Global South की समान भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि विकासशील देशों को केवल बने-बनाए नियम स्वीकार करने वाले ‘Rule Taker’ की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ‘Rule Shaper’ बनना होगा।
#WATCH | Delhi: During the BRICS Summit 2026, Prime Minister Narendra Modi says, "The third point I wish to raise concerns rule-making. Ensuring equal participation in defining future global rules is crucial. Domains such as AI, cyberspace, outer space, biotechnology, and… pic.twitter.com/MggpAiXyuJ
— ANI (@ANI) September 12, 2026
युवा डिप्लोमैट्स और पॉलिसी मेकर्स को ट्रेनिंग का प्रस्ताव
पीएम मोदी ने BRICS के जरिए Global South के युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं के लिए विशेष ट्रेनिंग व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव भी रखा।
इसके तहत उन्हें अंतरराष्ट्रीय Negotiation Skills, Practical Training और Legal Expertise दी जा सकती है, ताकि विकासशील देश भविष्य के अंतरराष्ट्रीय समझौतों और नियमों को बनाने में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें। भारत ने इस पहल में नेतृत्व करने की इच्छा जताई है।
South-South Cooperation Day पर दिया बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन 12 सितंबर को हुआ, जिसे संयुक्त राष्ट्र International Day for South-South Cooperation के रूप में मनाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि Global South के लिए ऐसे फैसले लेना और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने भारत की ओर से इस दिशा में नेतृत्व करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
‘भविष्य साझा है तो उसे बनाने का अधिकार भी साझा होना चाहिए’
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने BRICS Summit के लिए एक व्यापक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया का भविष्य साझा है, तो उसे आकार देने का अधिकार भी सभी देशों के बीच साझा होना चाहिए। इस संदेश के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS को सिर्फ आर्थिक सहयोग के मंच के बजाय ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने वाले मंच के रूप में पेश किया।
BRICS Summit 2026 ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब समूह अपने वैश्विक प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। विस्तारित BRICS में शामिल देश दुनिया की आबादी और अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्ष समेत कई भू-राजनीतिक मुद्दों पर सदस्य देशों के हित अलग-अलग भी हैं।
ऐसे में पीएम मोदी की ओर से पेश किया गया BRICS Reform Roadmap, UNSC Reform, Seafarers Emergency Support Network और Global South को Rule Shaper बनाने का प्रस्ताव सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे में शामिल हो सकता है।
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