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पंजाब पुलिस की बड़ी कामयाबी : मोल्दोवा से भारत लाया गया कुख्यात गैंगस्टर अमृतपाल सिंह

पंजाब पुलिस की बड़ी कामयाबी : मोल्दोवा से भारत लाया गया कुख्यात गैंगस्टर अमृतपाल सिंह

संगठित अपराध और विदेशों में छिपे भगोड़ों के खिलाफ पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की मदद से जग्गू भगवानपुरिया गैंग के प्रमुख ऑपरेटर अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत डालम को मोल्दोवा से प्रत्यर्पित कर भारत वापस ला लिया है। पंजाब पुलिस के मुताबिक यह किसी यूरोपीय देश से उसका पहला सफल प्रत्यर्पण है। अमृत डालम हत्या, हत्या के प्रयास, UAPA, आर्म्स एक्ट, नारकोटिक्स और जबरन वसूली समेत कुल 21 आपराधिक मामलों में वांछित था।

पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने इसे ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम के खिलाफ बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई करीब छह महीने तक चले इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान ‘ऑपरेशन ईस्टर्न रीच’ का नतीजा है। इस अभियान में पंजाब पुलिस की Anti-Gangster Task Force यानी AGTF और Overseas Fugitive Tracking and Extradition Cell यानी OFTEC ने केंद्रीय और विदेशी एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया।

7 हत्या के मामलों में था वांछित

पंजाब पुलिस के अनुसार अमृत डालम पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि वह कम से कम सात हत्या के मामलों में वांछित था। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी और ड्रग्स से जुड़े आरोप भी हैं। उस पर UAPA, Arms Act, NDPS Act और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज हैं।

जिन मामलों में उसका नाम सामने आया है, उनमें बटाला और होशियारपुर समेत पंजाब के अलग-अलग जिलों में हुई हत्याएं शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक उसके खिलाफ चार मामले ट्रायल स्टेज में हैं, जबकि 17 मामलों की जांच विभिन्न जिलों में जारी है।

फर्जी पासपोर्ट से भारत से भागा था अमृत डालम

पुलिस जांच में सामने आया कि अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत डालम अक्टूबर 2024 में फर्जी पासपोर्ट के जरिए भारत से फरार हुआ था। उसने गुरपाल सिंह के नाम से तैयार पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उसने UAE, जॉर्जिया और आर्मेनिया जैसे देशों के रास्ते अपने ठिकाने बदलते हुए मोल्दोवा पहुंचने की कोशिश की।

पंजाब पुलिस ने उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया शुरू की थी और उसके फर्जी पासपोर्ट, संभावित ठिकानों तथा गतिविधियों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की थी। इसी अंतरराष्ट्रीय समन्वय के चलते उसकी लोकेशन पर लगातार नजर रखी गई।

यूक्रेन जाने की कोशिश में मोल्दोवा में पकड़ा गया

मोल्दोवा की आधिकारिक बॉर्डर पुलिस के मुताबिक आरोपी को 24 फरवरी 2026 को उस समय हिरासत में लिया गया था, जब वह मोल्दोवा के Otaci बॉर्डर से यूक्रेन की ओर जाने की कोशिश कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी इंटरपोल नोटिस के आधार पर हुई थी।

इसके बाद पंजाब पुलिस के OFTEC ने उसके प्रत्यर्पण के लिए कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया शुरू की। मोल्दोवा की Chisinau अदालत ने 26 मई 2026 को भारत के पक्ष में प्रत्यर्पण की मंजूरी दी। आरोपी ने इसके खिलाफ अपील की, लेकिन 16 जुलाई 2026 को Court of Appeal Centru ने उसकी अपील खारिज कर दी, जिसके बाद प्रत्यर्पण आदेश अंतिम हो गया।

चार सदस्यीय पंजाब पुलिस टीम लेकर आई भारत

प्रत्यर्पण आदेश अंतिम होने के बाद पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय टीम मोल्दोवा भेजी गई। इस टीम का नेतृत्व AGTF के एसपी बिक्रमजीत सिंह बराड़ ने किया। टीम में इंस्पेक्टर पुषविंदर सिंह, सब-इंस्पेक्टर जसप्रीत सिंह और एएसआई वरिंदर कुमार भी शामिल थे।

टीम ने मोल्दोवा में स्थानीय अधिकारियों के साथ आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और आरोपी को हिरासत में लिया। इसके बाद उसे अजरबैजान के बाकू के रास्ते भारत लाया गया। पंजाब पुलिस की टीम नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंची, जिसके बाद आरोपी को पंजाब ले जाने और संबंधित मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।

‘Operation Eastern Reach’ से मिली सफलता

डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि अमृत डालम को वापस लाने का अभियान Operation Eastern Reach के तहत चलाया गया। करीब छह महीने तक चले इस अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन में आरोपी की गतिविधियों, ठिकानों और यात्रा मार्गों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई।

पंजाब पुलिस ने इस अभियान में मोल्दोवा और अजरबैजान के अधिकारियों, CBI की International Police Cooperation Unit, केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय समेत कई एजेंसियों के सहयोग का उल्लेख किया है।

पंजाब पुलिस का यूरोप से पहला सफल प्रत्यर्पण

इस कार्रवाई को पंजाब पुलिस के लिए इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि यह किसी यूरोपीय देश से वांछित आरोपी को भारत लाने का उसका पहला सफल प्रत्यर्पण है। मोल्दोवा के अधिकारियों ने भी इसे भारत और मोल्दोवा के बीच न्यायिक सहयोग में पहली ऐसी प्रत्यर्पण कार्रवाई बताया है।

पंजाब पुलिस ने विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए OFTEC का गठन किया था। इसका उद्देश्य ऐसे गैंगस्टरों और अन्य गंभीर अपराधों के आरोपियों को ट्रैक करना है, जो विदेश जाकर भारत में अपने नेटवर्क के जरिए आपराधिक गतिविधियां संचालित करते हैं।

विदेशों में बैठे गैंगस्टरों पर बढ़ा दबाव

अमृत डालम का प्रत्यर्पण पंजाब में संगठित अपराध के खिलाफ जारी कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि वह जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़ा प्रमुख ऑपरेटर था और विदेश से भी आपराधिक नेटवर्क के संपर्क में था।

इस मामले में इंटरपोल रेड नोटिस, फर्जी पासपोर्ट की जांच, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और प्रत्यर्पण प्रक्रिया का इस्तेमाल यह दिखाता है कि पंजाब पुलिस विदेशों में छिपे हाई-प्रायोरिटी आरोपियों को वापस लाने के लिए कानूनी और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर कार्रवाई तेज कर रही है।

अमृत डालम को भारत लाए जाने के बाद अब उससे जुड़े हत्या, हत्या के प्रयास, ड्रग्स, हथियार और संगठित अपराध के मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

 

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