18वें BRICS शिखर सम्मेलन में अपनाए गए नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 का एक अहम हिस्सा भारत के लिए कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में व्यापक सुधार की जरूरत दोहराई गई है। इसके साथ ही चीन और रूस ने भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र, विशेष रूप से सुरक्षा परिषद में, बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षाओं के प्रति अपना समर्थन दोहराया है।
यह भाषा भारत के लिए इसलिए अहम है क्योंकि चीन और रूस दोनों UNSC के स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो पावर है। हालांकि घोषणापत्र में भारत को स्पष्ट रूप से “स्थायी सदस्य बनाने” का वादा नहीं किया गया है, लेकिन भारत की बड़ी भूमिका की आकांक्षा को चीन और रूस का समर्थन नई दिल्ली के लंबे समय से चले आ रहे UNSC सुधार अभियान के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
घोषणापत्र के अहम हिस्से में UNSC Reform पर जोर
नई दिल्ली घोषणापत्र में कहा गया है कि BRICS देश संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार का समर्थन दोहराते हैं, ताकि यह व्यवस्था अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, प्रभावी और कुशल बन सके।
दस्तावेज में विकासशील देशों की परिषद में भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका की उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिले।
यह रुख BRICS के पुराने घोषणापत्रों की निरंतरता भी है। 2023 के Johannesburg-II Leaders’ Declaration में भी भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका समेत उभरते देशों की संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका की आकांक्षाओं का समर्थन किया गया था।
चीन और रूस ने भारत की आकांक्षा का समर्थन दोहराया
नई दिल्ली घोषणापत्र का सबसे ज्यादा चर्चा में आया हिस्सा चीन और रूस से जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में चीन और रूस, भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षाओं के प्रति अपना समर्थन दोहराते हैं।
इसी तरह की भाषा BRICS के पुराने दस्तावेजों में भी दिखाई देती रही है। उदाहरण के तौर पर पूर्व BRICS घोषणाओं में चीन और रूस ने भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की अंतरराष्ट्रीय मामलों में स्थिति और भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए संयुक्त राष्ट्र में उनकी बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन किया था।
42 पन्नो का दिल्ली डिक्लेरेशन । 13 वें सेक्शन को गौर से पढ़िए । UNSC में भारत की सदस्यता का समर्थन रूस और चाइना करेंगे । यदि चीन अपनी बात पर क़ायम रहा तो भारत के लिए यह बड़ी कूटनीतिक कामयाबी होगी । #BRICS pic.twitter.com/HnmlDscWka
— Meenakshi Joshi (@IMinakshiJoshi) September 12, 2026
क्या इसका मतलब भारत की स्थायी सदस्यता को चीन का समर्थन है?
यहीं सबसे महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
नई दिल्ली घोषणापत्र में चीन और रूस ने भारत को UNSC का स्थायी सदस्य बनाने का स्पष्ट समर्थन नहीं दिया है। दस्तावेज की भाषा “greater role” यानी बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन करती है।
इसलिए इसे सीधे यह कहना कि चीन ने भारत की स्थायी सदस्यता पर हामी भर दी है, दस्तावेज की वास्तविक भाषा से आगे की व्याख्या होगी।
इसके बावजूद यह भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन अब तक UNSC विस्तार को लेकर काफी सतर्क रहा है। यदि भविष्य की औपचारिक वार्ताओं में बीजिंग इसी रुख को आगे बढ़ाता है और भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट समर्थन करता है, तो यह नई दिल्ली के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता होगी।
रूस का रुख भारत के पक्ष में पहले से ज्यादा स्पष्ट
रूस लंबे समय से भारत की UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग के प्रति अपेक्षाकृत सकारात्मक रहा है। BRICS मंच पर भी रूस भारत की बड़ी भूमिका के समर्थन वाली भाषा का लगातार समर्थन करता आया है।
चीन का मामला ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की UNSC स्थायी सदस्यता के रास्ते में बीजिंग का रुख रणनीतिक रूप से निर्णायक माना जाता है। इसी वजह से नई दिल्ली घोषणापत्र में चीन का नाम लेकर भारत की “greater role” वाली आकांक्षा के समर्थन का दोहराया जाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
PM मोदी ने भी कहा- UNSC Reform अब और नहीं टल सकता
BRICS Summit 2026 के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी UNSC Reform को लेकर कड़ा संदेश दिया था।
उन्होंने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता और इस प्रक्रिया को स्पष्ट समयसीमा तथा ठोस नतीजों से जोड़ना चाहिए। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि Global South वैश्विक संकटों की “फ्रंट रो” में है लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में “बैक रो” में बना हुआ है।
भारत लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि आज की UNSC संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वैश्विक शक्ति व्यवस्था को दर्शाती है और मौजूदा आर्थिक तथा भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करती।
भारत के साथ ब्राजील की दावेदारी भी मजबूत
नई दिल्ली घोषणापत्र में केवल भारत ही नहीं, बल्कि ब्राजील की आकांक्षाओं का भी उल्लेख किया गया है।
भारत और ब्राजील दोनों लंबे समय से UNSC में स्थायी सदस्यता का दावा करते रहे हैं। दोनों देश G4 समूह का हिस्सा हैं और सुरक्षा परिषद के विस्तार की वकालत करते हैं।
BRICS दस्तावेज में दोनों देशों का नाम स्पष्ट रूप से आना यह दर्शाता है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा समूह के भीतर लगातार प्रमुख होता जा रहा है।
अफ्रीकी देशों की दावेदारी को भी समर्थन
घोषणापत्र में अफ्रीकी देशों की मांगों का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
BRICS ने Ezulwini Consensus और Sirte Declaration में दर्ज अफ्रीकी देशों की आकांक्षाओं को मान्यता दी है। इन दस्तावेजों में अफ्रीका लंबे समय से UNSC में अधिक प्रतिनिधित्व और स्थायी सीटों की मांग करता रहा है।
इसका मतलब है कि BRICS का UNSC Reform एजेंडा केवल भारत और ब्राजील तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका फोकस व्यापक Global South representation पर है।
Global South की आवाज मजबूत करने का प्रयास
नई दिल्ली घोषणापत्र में UNSC Reform को Global South की आवाज मजबूत करने के व्यापक एजेंडे से जोड़ा गया है।
भारत की अध्यक्षता में इस BRICS Summit का एक प्रमुख संदेश यही रहा है कि वैश्विक संस्थाओं में फैसले केवल कुछ देशों के हाथों में केंद्रित नहीं रहने चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने भाषण में कहा कि यदि दुनिया का भविष्य साझा है तो उसे आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए।
चीन के रुख पर क्यों रहेंगी सबसे ज्यादा नजरें?
भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि चीन BRICS घोषणा की इस भाषा को वास्तविक UNSC Reform negotiations में किस हद तक आगे बढ़ाता है।
BRICS दस्तावेज में समर्थन देना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत है, लेकिन स्थायी सदस्यता के लिए इससे आगे जाकर औपचारिक और स्पष्ट समर्थन जरूरी होगा।
भारत और चीन के संबंध हाल के वर्षों में तनाव से धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़े हैं। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद संबंधों में भारी गिरावट आई थी, लेकिन 2024 के बाद सीमा पर disengagement और राजनीतिक संवाद बढ़ने से रिश्तों में सुधार के संकेत मिले हैं।
अगर इसी सुधार के बीच चीन UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता को स्पष्ट समर्थन देता है, तो यह भारत-चीन संबंधों और वैश्विक कूटनीति दोनों के लिए बड़ा बदलाव होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है New Delhi Declaration?
नई दिल्ली घोषणापत्र ऐसे समय आया है जब BRICS अपना वैश्विक प्रभाव बढ़ाने और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थागत व्यवस्था में सुधार की मांग तेज करने की कोशिश कर रहा है।
समूह ने विश्व बैंक, IMF, WTO और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं में विकासशील देशों के अधिक प्रतिनिधित्व की जरूरत पर लगातार जोर दिया है।
UNSC में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका के समर्थन वाली भाषा इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा है।
भारत के लिए यह निश्चित रूप से सकारात्मक कूटनीतिक संकेत है, लेकिन अगली असली परीक्षा तब होगी जब सुरक्षा परिषद सुधार पर ठोस अंतर-सरकारी वार्ता और स्थायी सदस्यता का सवाल सामने आएगा।
अगर चीन उस चरण पर भी भारत के पक्ष में खड़ा होता है, तभी इसे भारत की UNSC स्थायी सदस्यता की दिशा में वास्तविक और ऐतिहासिक कूटनीतिक उपलब्धि कहा जा सकेगा।
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