Skip to content
Wednesday, October 28, 2026 Ahmedabad 27°C

AAP के ‘दिल्ली मॉडल’ से मरीजों की हालत बदतर, नहीं मिल पा रहा इलाज

AAP के ‘दिल्ली मॉडल’ से मरीजों की हालत बदतर, नहीं मिल पा रहा इलाज

प्रजा फाउंडेशन की रिपोर्ट ‘दिल्ली में स्वास्थ्य मुद्दों की स्थिति 2024’ दिल्ली नगर निगम (MCD) की स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद खामियों को उजागर करती है। रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

1. खाली पदों की समस्या

  • 2023-24 में MCD के अस्पतालों और डिस्पेंसरी में स्वीकृत पदों का 31% खाली रहा।
  • इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

2. बजट का अपर्याप्त उपयोग

  • 2022-23 के स्वास्थ्य बजट का केवल 36% उपयोग किया गया।
  • 2023-24 में स्वास्थ्य बजट में 16% की वृद्धि और 2024-25 में 12% और बढ़ोतरी के बावजूद, बजट का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाया।
  • 2023-24 के बजट के उपयोग का डेटा उपलब्ध न होना प्रशासनिक अक्षमता की ओर इशारा करता है।

3. स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता प्रभाव

  • आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
  • खाली पदों के कारण अस्पतालों और डिस्पेंसरी में काम का दबाव बढ़ता है, जिससे सेवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

4. दिल्ली सरकार का दृष्टिकोण

  • दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट बढ़ाने का प्रयास किया है, लेकिन MCD के स्तर पर कार्यान्वयन की कमी से संसाधनों का उपयोग प्रभावी नहीं हो पाया।
  • स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार के लिए बेहतर समन्वय और जवाबदेही की आवश्यकता है।

इस पूरे रिसर्च के दौरान MCD और राज्य सरकार के कई अस्पतालों ने महीनों का डेटा पूरा नहीं दिया। प्रजा फाउंडेशन के शोध प्रबंधक श्रेयस चोरगी ने बताया कि दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए डेटा संग्रह प्रणाली कमजोर है। उन्होंने कहा, “दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन केंद्र, राज्य और MCD में विभाजित है, जिससे डेटा संग्रह और विश्लेषण में बाधाएं आती हैं। एक केंद्रीकृत स्वास्थ्य सूचना प्रणाली आवश्यक है।” प्रजा फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, MCD और राज्य सरकार द्वारा संचालित कई अस्पतालों और डिस्पेंसरी ने रिसर्च के दौरान कई महीनों का डेटा ही जमा नहीं किया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में स्वास्थ्य सेवा का प्रबंधन केंद्रीय, राज्य और नगर निगम प्रशासन के बीच बंटा हुआ है, जिससे डेटा संग्रह और विश्लेषण कठिन हो जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य जानकारी को एक केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म पर एकत्र करना जरूरी है।

प्रजा फाउंडेशन की रिपोर्ट के ये आँकड़े दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। 2014 से 2023 तक की अवधि में बीमारियों और मौतों के आँकड़े यह दर्शाते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावों और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर है।

महत्वपूर्ण आँकड़े और समस्याएँ

  1. संचारी और गैर-संचारी रोगों से मौतें
    • संचारी रोगों से 1,59,129 मौतें और सांस की बीमारियों से 88,159 मौतें हुईं।
    • हाइपरटेंशन से 43,487 मौतें और टीबी से 35,800 लोगों की जान गई।
  2. डेंगू और हाइपरटेंशन के मामलों में वृद्धि
    • डेंगू से मौतों में 627% की वृद्धि (2014 में 74 से 2023 में 538 तक)।
    • हाइपरटेंशन से मौतों में 109% की वृद्धि (2014 में 1,962 से 2023 में 4,102 तक)।
    • हृदय रोग से मौतों के मामले भी 66% बढ़े।
  3. संसाधन पर्याप्त लेकिन उपयोग कम
    • 2023-24 के स्वास्थ्य बजट का मात्र 36% उपयोग होना और 31% पद खाली रहना प्रशासनिक विफलता दर्शाता है।
    • बजट और सुविधाओं के बावजूद मरीजों की संख्या और मौतों में वृद्धि होना नीति और कार्यान्वयन के बीच की खाई को उजागर करता है।

‘दिल्ली मॉडल’ पर सवाल

आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने शासनकाल के दौरान ‘दिल्ली मॉडल’ को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का आदर्श बताया। हालाँकि:

  • मोहनआवास: मोहल्ला क्लीनिक और अस्पतालों के विस्तार के बावजूद मरीजों की संख्या बढ़ रही है, और कई जगह इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
  • प्राथमिकता का अभाव: गैर-संचारी रोग जैसे हृदय रोग और हाइपरटेंशन पर नियंत्रण के लिए व्यापक नीति नहीं बनी।
  • डेंगू और संचारी रोगों का प्रकोप: रोकथाम और जागरूकता कार्यक्रमों में सुधार की आवश्यकता स्पष्ट है।

रिपोर्ट का निष्कर्ष

  • रिपोर्ट के अनुसार, बीमारियों के बढ़ते मामलों और मौतों को रोकने के लिए केवल बजट बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; नीति कार्यान्वयन, निगरानी, और स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती को प्राथमिकता देनी होगी।
  • प्रबंधन में सुधार और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए बीमारी की रोकथाम और इलाज में सुधार करना अनिवार्य है।

आगे की राह

  1. रिक्त पदों को शीघ्र भरना: डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति में तेजी लानी होगी।
  2. रोकथाम कार्यक्रम: संचारी और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
  3. बजट का कुशल उपयोग: स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और बजट के उचित उपयोग के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना होगा।
  4. डेंगू नियंत्रण योजना: डेंगू के मामलों को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान शुरू किए जाएँ।

यह रिपोर्ट दिल्ली सरकार के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल ‘दिल्ली मॉडल’ के प्रचार तक सीमित न रखकर, जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

Filed under Delhi

Share this story

Latest News

Explore States

News from every corner of India.