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RBI लगातार दूसरी बार दे सकती है राहत, नहीं आएगी बढ़ती ब्याज दरों की आफत!

RBI लगातार दूसरी बार दे सकती है राहत, नहीं आएगी बढ़ती ब्याज दरों की आफत!

भारतीय रिजर्व बैंक एक बार फिर से देश के लोगों को बड़ी राहत दे सकती है. यह राहत बढ़ती ब्याज दरों से है. जी हां, आरबीआई की इस सप्ताह मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग होने वाली है. यह मीटिंग 6 से 8 जून होगी. 8 जून हो आरबीआई एमपीसी पॉलिसी रेट का ऐलान करेगी. जानकारों की मानें तो इस बार पॉलिसी रेट में कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है. वास्तव में महंगाई आरबीआई के टॉलरेंस लेवल से कम है. अप्रैल के महीने में रिटेल महंगाई 18 महीने के लोअर लेवल पर थी. वहीं मई में भी रिटेल महंगाई 5 फीसदी से नीचे रहने की उम्मीद जताई जा रही है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आरबीआई ब्याज दरों में ना तो इजाफा करेगी और ना ही कटौती करेगी.

इससे पहले रूस-यूक्रेन वॉर की वजह से ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में इजाफा हो गया था. जिसकी वजह से भारत समेत पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ गई थी. भारत के केंद्रीय बैंक ने महंगाई को कंट्रोल करने के लिए मई 2022 से फरवरी 2023 तक रेपो रेट में 250 बेसिस प्वाइंट यानी 2.50 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है. जिसके बाद रेपो रेट 6.50 फीसदी हो गए थे. अप्रैल के महीने में आरबीआई एमपीसी ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था. इस बार भी इसी तरह की उम्मीद की जा रही है.

मार्च और अप्रैल के महीने में महंगाई के आंकड़ें कम देखने को मिले थे. अगर बात अप्रैल की करें तो देश की रिटेल महंगाई 5 फीसदी से नीचे आते हुए 4.7 फीसदी थी, जोकि 18 महीने का लोअर लेवल था. जबकि एक साल पहले रिटेल महंगाई 7.8 फीसदी पर थे. वहीं थोक महंगाई के आंकड़ें भी काफी नीचे आ चुके हैं. आरबीआई ने रिटेल महंगाई का टारगेट 4 से 6 फीसदी रखा हुआ है. मार्च और अप्रैल दोनों महीनों में देश की रिटेल महंगाई 6 फीसदी के अपर बैंड से नीचे है.

डीबीएस बैंक इंडिया की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव के अनुसार मजबूत जीडीपी आंकड़े आरबीआई को जून में ब्याज दरों में एक और पॉज करने का मौका दे सकते हैं. राव कहते हैं कि हालांकि एमपीसी दरों में कोई बदलाव ना करने पर सर्वसम्मति से फैसला हो सकता है, लेकिल फ्यूचर में हॉकि​श रुख पर राय बदलती हुई दिखाई दे सकती है. एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि आरबीआई इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. उम्मीद है कि अगले साल के शुरुआती महीनों में ब्याज दरों में कटौती देखने को मिले. इससे पहले एमपीसी ने महामारी के दौरान इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाने के लिए रेपो दर में 115 बेसिस प्वाइंट कटौती कर दी थी और रिकॉर्ड 4 फीसदी कर दिया था.

 

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