छत्तीसगढ़ के कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर हुए पुलिस ऑपरेशन में 31 नक्सली मार गिराए गए हैं। पुलिस ने उनकी लाशें बरामद की हैं। उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं। नक्सलियों के लिए सुरक्षित गढ़ रही इस पहाड़ी को सुरक्षाबलों ने 10 हजार जवानों के साथ घेरा था।
कर्रेगुट्टा ऑपरेशन 2025 – प्रमुख बिंदु
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थान | कर्रेगुट्टा पहाड़ी (छत्तीसगढ़-तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा) |
| ऑपरेशन शुरू | 21 अप्रैल 2025 |
| नक्सली मारे गए | कुल 31 नक्सली |
| मुख्य मुठभेड़ तिथियाँ | 24 अप्रैल (4 मारे गए), 7 मई (27 मारे गए) |
| मुठभेड़ों की कुल संख्या | 35 से अधिक |
| शहीद सुरक्षा बल | 3 जवान |
| बरामदगी | 400+ IED, 40 हथियार, 2 टन विस्फोटक |
| संचालित बल | CRPF, DRG, छत्तीसगढ़ पुलिस, कोबरा कमांडो आदि |
| नक्सली शीर्ष कमांडर | हिडमा की मौजूदगी की आशंका |
2025 में अब तक की बड़ी नक्सली मुठभेड़ें – टाइमलाइन चार्ट
| तिथि | स्थान | मारे गए नक्सली |
|---|---|---|
| 2 जनवरी | बीजापुर | 5 |
| 16 जनवरी | अनाम क्षेत्र | 18 |
| 21 जनवरी | गरियाबंद पहाड़ी | 16 (टॉप कमांडर चलापति ₹1 करोड़ इनामी सहित) |
| 9 फरवरी | नेशनल पार्क (छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर) | 31 |
| 24 अप्रैल | कर्रेगुट्टा | 4 |
| 7 मई | कर्रेगुट्टा | 27 |
| कुल (2025 अब तक) | 120+ नक्सली ढेर |
कर्रेगुट्टा ऑपरेशन की रणनीति
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10,000 जवानों की तैनाती, इलाके को पूरी तरह घेरना।
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Drones, Night Vision Devices, Ground Sensors जैसी एडवांस तकनीकों का इस्तेमाल।
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सटीक खुफिया इनपुट और स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से सटीक लक्ष्य निर्धारण।
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लगातार साफ़-सफाई अभियान के तहत IEDs और विस्फोटकों की बरामदगी।
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पहाड़ी इलाके का कब्जा — अब पूरी तरह सुरक्षाबलों के नियंत्रण में।
महत्वपूर्ण रणनीतिक परिणाम
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कर्रेगुट्टा जैसी नक्सलियों की सुरक्षित शरणस्थली अब छीन ली गई।
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हिडमा जैसे शीर्ष कमांडरों की घेराबंदी और संभवतः उनके ठिकानों की पहचान।
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नक्सली नेटवर्क की ध्वस्त होती लॉजिस्टिक्स सप्लाई और असलहा आपूर्ति।
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स्थानीय ग्रामीणों से मिलने वाला समर्थन घटा, जिससे उनका नेटवर्क कमजोर हुआ।
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दुर्गम इलाकों में सुरक्षाबलों की स्थायी चौकियाँ बनने से गतिविधियों पर निगरानी बढ़ी।
नक्सल प्रभाव में गिरावट के संकेत
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गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक का समय नक्सली सफाए का दिया है।
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2024 में 290 नक्सली मारे गए, 2025 में अब तक 130+ मारे जा चुके हैं।
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सैकड़ों नक्सली सरेंडर कर चुके हैं – यह संगठन के मनोबल में भारी गिरावट दर्शाता है।
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बड़े इनामी कमांडर (जैसे चलापति) के मारे जाने से नेतृत्व संकट उत्पन्न हुआ है।
निष्कर्ष
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कर्रेगुट्टा ऑपरेशन नक्सलवाद के इतिहास में टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
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छत्तीसगढ़ की नक्सल बेल्ट में अब सुरक्षाबलों की पकड़ मजबूत हो रही है।
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रणनीति अब केवल मुठभेड़ नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक नेटवर्क, विचारधारा और जनसमर्थन को तोड़ने की ओर बढ़ चुकी है।