देशभर में कोविड-19 मामलों में एक बार फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है, और इसी के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने सावधानीपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने से पहले सभी मंत्रियों, सांसदों और प्रमुख नेताओं के लिए RT-PCR टेस्ट अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय विशेष रूप से सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत लिया गया है, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण से प्रधानमंत्री समेत शीर्ष नेतृत्व को सुरक्षित रखा जा सके।
प्रधानमंत्री आवास पर कड़े कोविड प्रोटोकॉल
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पीएम मोदी के आधिकारिक निवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर विभिन्न विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और वरिष्ठ नेताओं की बैठकें लगातार आयोजित हो रही हैं। हाल ही में विदेश से लौटे एक डेलिगेशन की पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान भी कोविड टेस्ट अनिवार्य किया गया था। अब बीजेपी के दिल्ली के सभी विधायक, सांसद और पदाधिकारी जो आज प्रधानमंत्री से एक अहम बैठक में शामिल होने जा रहे हैं, उन्हें भी पहले कोविड टेस्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
कोविड की स्थिति देश में
देश में एक्टिव कोविड केसों की संख्या 7,121 तक पहुंच गई है। हालांकि संक्रमण की गंभीरता पहले जैसी नहीं है, लेकिन संक्रमण की रफ्तार को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है।
- दिल्ली में मामूली गिरावट देखी गई है – सोमवार को 728 केस थे, जो मंगलवार को घटकर 691 हो गए।
- केरल सबसे प्रभावित राज्य बना हुआ है, जहां 2,053 एक्टिव केस दर्ज किए गए हैं और बीते 24 घंटे में 96 नए मरीज मिले हैं।
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि:
- कोविड अब आपातकालीन महामारी की स्थिति में नहीं है,
- लेकिन यह अब फ्लू जैसे सीजनल संक्रमण का रूप ले चुका है,
- जिससे समय-समय पर मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।
सावधानी अब भी जरूरी
हालांकि कोविड अब पहले जैसी घातक लहर नहीं लाता, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों के लिए यह अभी भी संक्रमण का खतरा बन सकता है। इसलिए सार्वजनिक आयोजनों, उच्चस्तरीय बैठकों और विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों के संदर्भ में सरकार पूरी तरह से सावधानी की रणनीति अपना रही है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की बैठक से पहले RT-PCR टेस्ट की अनिवार्यता यह दिखाता है कि सरकार एक ओर जहां जनजीवन को सामान्य बनाए रखना चाहती है, वहीं दूसरी ओर कोविड को लेकर सतर्कता और जिम्मेदारी से कोई समझौता नहीं कर रही। यह नीति आने वाले समय में अन्य उच्चस्तरीय बैठकों और आयोजनों के लिए एक मॉडल के रूप में अपनाई जा सकती है।