शेयर बाजार में गिरावट: अमेरिकी टैरिफ डेडलाइन का साया
सोमवार, 7 जुलाई 2025 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रही। निवेशक इस हफ्ते अमेरिकी टैरिफ डेडलाइन को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं और ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाए हुए हैं। प्री-ओपनिंग सेशन में बीएसई सेंसेक्स 34.81 अंक की गिरावट के साथ 83,398.08 पर और निफ्टी 10.55 अंक नीचे 25,450.45 पर दिखा। सुबह 9:18 बजे तक सेंसेक्स 123.33 अंक यानी 0.15% गिरकर 83,309.56 और निफ्टी 43.20 अंक यानी 0.17% गिरकर 25,417.80 पर ट्रेड कर रहे थे।
यह दबाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी के कारण बना है। ट्रंप ने रविवार को कहा कि उनका प्रशासन कुछ देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने के करीब है और बाकी देशों को 9 जुलाई तक टैरिफ रेट की सूचना दी जाएगी। नई दरें 1 अगस्त 2025 से लागू होंगी। अभी तक आधिकारिक दिशानिर्देश सामने नहीं आए हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अप्रैल में घोषित 10% बेस टैरिफ को जुलाई 9 तक टाल दिया गया था। भारत और अमेरिका के बीच नया ट्रेड एग्रीमेंट नहीं होने के चलते भारत पर टैरिफ लागू होने की आशंका है।
पिछले हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 0.7% की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसमें सेंसेक्स 626.01 अंक टूटा। एफआईआई यानी विदेशी निवेशक लगातार पांचवें दिन भारतीय शेयरों से दूरी बनाते नजर आए। हालांकि शुक्रवार को बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली थी।
अमेरिका में बढ़ती महंगाई और टैरिफ की आशंका के चलते फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो गई है। इस वर्ष अब केवल दो बार मामूली कटौती की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, ट्रंप द्वारा हाल ही में साइन किए गए बड़े टैक्स और खर्च से जुड़े बिल के चलते अमेरिका का कुल कर्ज 36.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है और इसमें 3 ट्रिलियन डॉलर की और बढ़ोतरी का अनुमान है।
वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी का माहौल है। जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और अमेरिका के स्टॉक फ्यूचर्स सभी दबाव में हैं। सोने और चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी गई, जहां स्पॉट गोल्ड 0.6% गिरकर 3,314.21 डॉलर और सिल्वर 0.8% गिरकर 36.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका की ओर से कोई अनुकूल ट्रेड डील होती है और भारतीय कंपनियों के जून तिमाही नतीजे अच्छे रहते हैं, तो बाजार नई ऊंचाइयों को छू सकता है। लेकिन यदि इन दोनों पहलुओं में निराशा मिलती है, तो बाजार पर और दबाव बन सकता है। फिलहाल निवेशक 9 जुलाई की अमेरिकी टैरिफ डेडलाइन पर नजर गड़ाए हुए हैं।