एयर इंडिया हादसे में विदेशी थ्योरी को देसी सुर का साथ, पर कितनी सच है ये कहानी?
12 जून, 2025 को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया AI-171 फ्लाइट हादसे के बाद अब वैश्विक मीडिया की रिपोर्टिंग में पायलटों को ही दोषी ठहराने का प्रयास तेज़ हो गया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने 16 जुलाई को प्रकाशित रिपोर्ट में मुख्य पायलट सुमीत सभरवाल को हादसे का जिम्मेदार बताया है, यह दावा करते हुए कि उन्होंने जानबूझकर “फ्यूल कंट्रोल स्विच” बंद किया, जिससे इंजन फेल हो गया। हालांकि, यह दावा शुरुआती जांच रिपोर्ट से पहले ही उठाया गया था, और अब इसे तथ्यों से काटकर बड़े स्तर पर प्रचारित किया जा रहा है — जिसमें भारतीय मीडिया भी शामिल हो गया है।

WSJ की रिपोर्ट में ब्लैक बॉक्स में दर्ज बातचीत का हवाला दिया गया है, जिसमें सह-पायलट क्लाइव कुंदर कथित तौर पर पूछते हैं: “तुमने ये स्विच क्यों बंद किया?” रिपोर्ट में यह भी उल्लेख नहीं किया गया कि कैप्टन सभरवाल ने उसी बातचीत में इनकार किया था कि उन्होंने स्विच बंद किया। इसके बावजूद रायटर्स, ब्लूमबर्ग, CNN और न्यू यॉर्क पोस्ट जैसे संस्थानों ने बिना ठोस निष्कर्ष के पायलटों को ही जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है।

AAIB की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में पायलटों की किसी गलती का उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद मीडिया संस्थानों ने तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए रिपोर्टों को इस तरह पेश किया, मानो कैप्टन सभरवाल की चूक साबित हो चुकी हो। FAA की ओर से बोइंग को पहले ही क्लीन चिट दी जा चुकी है, और अब WSJ की रिपोर्ट ने इस नैरेटिव को अंतिम रूप दे दिया है, जिसमें बोइंग की गलती की बजाय पायलटों को बलि का बकरा बना दिया गया है।

सरकारी सूत्रों और विशेषज्ञों ने WSJ की इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि कॉकपिट की रिकॉर्डिंग को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और कैप्टन सभरवाल पर मानसिक दबाव में होने या जानबूझकर स्विच बंद करने का कोई प्रमाण नहीं है। पायलटों की यूनियन FIP के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने भी इसे एकतरफा ठहराया है और बोइंग से स्पष्टीकरण की मांग की है।

अंतरराष्ट्रीय विमानन विशेषज्ञ मैरी शिवाओ ने भी कैप्टन सभरवाल को दोषी मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि CVR रिकॉर्डिंग का पूरा ऑडिट जरूरी है और अभी कोई भी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। उन्होंने 2019 के ANA फ्लाइट केस का उदाहरण दिया, जिसमें बिना पायलट की गलती के फ्यूल स्विच अपने आप बंद हो गए थे — संभवतः सॉफ़्टवेयर गड़बड़ी के कारण।

54 वर्षीय कैप्टन सभरवाल तीन दशकों से विमान उड़ा रहे थे, उनके 8000+ घंटे की फ्लाइंग एक्सपीरियंस के साथ उनका व्यक्तिगत और पेशेवर रिकॉर्ड बिल्कुल साफ है। उन्हें आत्महत्या या जानबूझकर क्रैश करने वाला पायलट बताना न सिर्फ तकनीकी दृष्टि से कमजोर है, बल्कि नैतिक रूप से भी अस्वीकार्य है। अगर वे ऐसा करना चाहते, तो टेकऑफ के तुरंत बाद दुर्घटना करने की जगह किसी ऐसे समय का चयन करते जब कोई बचने की संभावना न हो — जैसा कि 1999 के इजिप्ट एयर फ्लाइट 990 मामले में हुआ था।

तकनीकी दृष्टि से भी फ्यूल कंट्रोल स्विच धोखे से हाथ लगने पर बंद नहीं होते। इन्हें एक खास विधि से ही बंद किया जा सकता है। यही बात विशेषज्ञों को 2019 के ANA ड्रीमलाइनर हादसे की ओर इशारा करने को मजबूर करती है, जहाँ स्पष्ट रूप से सॉफ़्टवेयर खराबी सामने आई थी।
इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प वित्तीय पहलू भी है: हादसे के बाद बोइंग का शेयर $215 से गिरकर $198 तक आ गया था, लेकिन जैसे ही पायलटों पर दोष मढ़ा जाना शुरू हुआ, शेयर उछलते हुए $229 तक पहुँच गया — जो एक साल का उच्चतम स्तर है। इससे स्पष्ट है कि पायलटों पर दोष डालने से बोइंग को सीधा वित्तीय लाभ हो रहा है।

अतः जब तक AAIB की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक पायलटों को दोषी मान लेना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। मीडिया को भी इस संवेदनशील मामले में संयम और निष्पक्षता बरतनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके — न कि एक वैश्विक कॉर्पोरेशन की छवि बचाने के लिए किसी व्यक्ति के करियर और जीवन को बलि पर चढ़ा दिया जाए।