भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक ताकत को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में भारतीय नौसेना को नया स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत ‘हिमगिरि’ सौंपा गया है। यह युद्धपोत पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है और इसे कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने तैयार किया है। लगभग 6670 टन वजनी और 149 मीटर लंबा यह युद्धपोत, अत्याधुनिक हथियारों और स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिससे यह दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आता और बेहद मारक साबित होता है। ‘हिमगिरि’ को प्रोजेक्ट 17A के तहत बनाए जा रहे सात स्टील्थ फ्रिगेट्स में से तीसरे नंबर पर नौसेना को सौंपा गया है।
इससे पहले इसी परियोजना के तहत मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित ‘उदयगिरि’ को 1 जुलाई को नौसेना को सौंपा गया था। वहीं इस साल जनवरी में ‘आईएनएस नीलगिरि’ भी भारतीय नौसेना में शामिल किया जा चुका है। प्रोजेक्ट 17A के तहत कुल सात युद्धपोत बनाए जा रहे हैं, जिनमें से चार मुंबई में और तीन कोलकाता में बनाए जा रहे हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत लगभग ₹45,000 करोड़ है और बाकी चार फ्रिगेट्स को 2026 के अंत तक भारतीय नौसेना को सौंपने की योजना है।
‘हिमगिरि’ और ‘उदयगिरि’ जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत भारत की ब्लू वॉटर नेवी की अवधारणा को साकार करने की दिशा में अहम कदम हैं। ये फ्रिगेट्स न केवल दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों का मुकाबला कर सकते हैं, बल्कि हवाई हमलों को रोकने, समुद्री निगरानी, खोज और बचाव मिशनों में भी कारगर साबित होंगे। स्टील्थ डिजाइन, आधुनिक रडार और सेंसर, उन्नत हथियार प्रणालियां और मल्टी-रोल क्षमताएं इन फ्रिगेट्स को विश्व स्तरीय बनाती हैं।
इस परियोजना से भारतीय नौसेना की रणनीतिक उपस्थिति हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में और सशक्त होगी, वहीं ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को भी नई दिशा मिलेगी। क्योंकि ये युद्धपोत भारत में ही डिज़ाइन और निर्मित किए गए हैं, इससे न केवल स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूती मिली है, बल्कि भारत की तकनीकी और निर्माण क्षमताओं का भी प्रदर्शन हुआ है।
‘हिमगिरि’ जैसे युद्धपोत भारतीय नौसेना को तेजी से बदलते समुद्री खतरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ अपने सामरिक हितों की सुरक्षा भी प्रभावी ढंग से कर सके। यह भारत के रक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
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