प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर नवनिर्मित कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया, जो सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बनाए जा रहे कुल 10 आधुनिक भवनों में से पहला है। यह भवन सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक ही स्थान पर लाकर कार्यकुशलता, नवाचार और पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) के कार्यालय स्थानांतरित किए जाएंगे।
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi inaugurates Kartavya Bhavan at Kartavya Path in Delhi.
Kartavya Bhavan has been designed to foster efficiency, innovation, and collaboration by bringing together various Ministries and Departments currently scattered across Delhi. It will… pic.twitter.com/xT7NYyFfy7
— ANI (@ANI) August 6, 2025
कर्तव्य भवन-3 लगभग 1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला एक अत्याधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा दक्ष कार्यालय परिसर है। इसमें दो बेसमेंट और सात मंजिलें (भूतल + छह) हैं। भवन में स्मार्ट एंट्री सिस्टम, आईटी-सक्षम कार्यस्थल, सोलर पैनल, सौर जल हीटर, ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन, कांच की ध्वनि अवरोधक खिड़कियां, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और सीसीटीवी आधारित सुरक्षा निगरानी प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके डिज़ाइन में 30% कम ऊर्जा खपत को ध्यान में रखते हुए एलईडी लाइट्स, स्मार्ट लिफ्ट्स, सेंसर आधारित लाइटिंग और ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली का उपयोग किया गया है।
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi to inaugurate Kartavya Bhavan at Kartavya Path in Delhi tomorrow.
Kartavya Bhavan has been designed to foster efficiency, innovation, and collaboration by bringing together various Ministries and Departments currently scattered across… pic.twitter.com/WRW4GVVJvL
— ANI (@ANI) August 5, 2025
कर्तव्य भवन में 600 कारों की पार्किंग क्षमता, 27 लिफ्ट, दो स्वचालित सीढ़ियाँ, योगा रूम, क्रेच, मेडिकल रूम, कैफे, मल्टीपरपज हॉल, 24 बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल (प्रत्येक की क्षमता 45 व्यक्तियों की), 26 छोटे कॉन्फ्रेंस हॉल (प्रत्येक में 25 व्यक्तियों की क्षमता), तथा 67 मीटिंग रूम शामिल हैं।
#WATCH | After the inauguration of Kartavya Bhavan at Kartavya Path in Delhi, Prime Minister Narendra Modi interacted with the construction workers associated with the Kartavya Bhavan.
Source: DD News) pic.twitter.com/sxVKtOiaLr
— ANI (@ANI) August 6, 2025
शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर के अनुसार, कर्तव्य भवन-1 और 2 भी अगले महीने तक बनकर तैयार हो जाएंगे और शेष सात भवन अप्रैल 2027 तक पूरे हो जाएंगे। पूरी परियोजना पर करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस परियोजना के पूरा होने पर सरकार को हर साल 1500 करोड़ रुपये का किराया बचाने में मदद मिलेगी, जो वर्तमान में किराए की इमारतों पर खर्च हो रहा है।
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi inaugurates Kartavya Bhavan at Kartavya Path in Delhi.
(Source: DD News) pic.twitter.com/EX8MdDAcHa
— ANI (@ANI) August 6, 2025
मौजूदा समय में मंत्रालय जिन भवनों (जैसे कृषि भवन, उद्योग भवन, शास्त्री भवन और निर्माण भवन) में कार्यरत हैं, वे 1950 से 1970 के दशक में बने हैं और अब पुराने पड़ चुके हैं। इनकी मरम्मत और रखरखाव में भारी खर्च होता है। नए कर्तव्य भवनों के बनने के बाद नॉर्थ और साउथ ब्लॉक पूरी तरह खाली कर दिए जाएंगे और इनमें ‘भारत संग्रहालय’ की स्थापना की जाएगी, जिसमें महाभारत काल से लेकर आधुनिक भारत तक के इतिहास, कला और संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा। ये संग्रहालय संरचनात्मक रूप से बिना किसी बदलाव के तैयार किए जाएंगे।
#WATCH | After the inauguration of Kartavya Bhavan at Kartavya Path in Delhi, Prime Minister Narendra Modi planted a tree on the premises of the building.
(Source: DD News) pic.twitter.com/ThPI1ajNJ0
— ANI (@ANI) August 6, 2025
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत संसद भवन और उपराष्ट्रपति एन्क्लेव पहले ही तैयार हो चुके हैं, और विजय चौक से इंडिया गेट तक फैले कर्तव्य पथ का भी पुनर्विकास किया जा चुका है। आगामी चरणों में एक नया प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कैबिनेट सचिवालय, इंडिया हाउस, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय, और एक नया प्रधानमंत्री आवास भी शामिल है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह परियोजना दिसंबर 2031 तक पूरी तरह से पूर्ण कर दी जाएगी।
इस परियोजना का उद्देश्य न केवल सरकारी कार्य में दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है, बल्कि इसे ‘नए भारत’ की बुनियाद के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसमें तकनीकी प्रगति, पर्यावरणीय जागरूकता और संस्कृति संरक्षण का समावेश हो।
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