भारत ने सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 2 सितंबर को देश में बनी पहली सेमीकंडक्टर चिप को लॉन्च किया गया। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस चिप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया। इसके साथ ही उन्होंने विक्रम 32-बिट प्रोसेसर (Vikram 32-bit chip) और चार अन्य मंजूर प्रोजेक्ट्स के टेस्ट चिप्स भी प्रस्तुत किए। यह चिप ISRO की सेमीकंडक्टर लैब में तैयार की गई है, जो भारत के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
Chips are digital diamonds. pic.twitter.com/PNK6AjXIeM
— PMO India (@PMOIndia) September 2, 2025
इसी मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में Semicon India 2025 सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि जैसे तेल को “ब्लैक गोल्ड” कहा जाता है, वैसे ही सेमीकंडक्टर चिप “डिजिटल डायमंड” है। पीएम मोदी ने इसे 21वीं सदी की तरक्की का आधार बताया और कहा कि भारत अब केवल बैकएंड की भूमिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक फुल-स्टैक सेमीकंडक्टर राष्ट्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में दुनिया कहेगी—“Designed in India, Made in India, Trusted by World।”
First ‘Made in Bharat’ Chips! 🇮🇳 pic.twitter.com/QYFGA4HFLG
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) September 2, 2025
पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि वैश्विक चुनौतियों और आर्थिक अस्थिरता के बावजूद भारत ने इस साल की पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है। उन्होंने कहा कि यह विकास निर्माण, सेवा, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग जैसे हर क्षेत्र में साफ दिखाई देता है।
फिलहाल भारत में पांच सेमीकंडक्टर यूनिट्स पर काम तेजी से चल रहा है। मंत्री वैष्णव ने बताया कि आने वाले 2-3 महीनों में दो और नए प्लांट्स से चिप प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा, जबकि चार और सेमीकॉन यूनिट्स भी निर्माण के चरण में हैं। इससे भारत की डिजिटल इकॉनमी को मजबूती मिलेगी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग एवं रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
Semicon India 2025 सम्मेलन 2 सितंबर से 4 सितंबर तक चलेगा। इसमें 48 से अधिक देशों के करीब 2,500 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, एडवांस पैकेजिंग प्रोजेक्ट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा होगी। यह आयोजन भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।